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  • 3 months ago
तेलंगाना में हैदराबाद के चेंगिचेरला अभयारण्य में भारत का पहला बाओबाब पार्क बनाने का सपना फिर से जीवंत हो गया है। दरअसल, अभयारण्य  में वन अधिकारियों को प्राकृतिक रूप से पुनर्जीवित 21 पौधें मिले हैं. बाओबाब के पेड़ मूलत: अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और मेडागास्कर में पाए जाते हैं. इनकी अनोखी पहचान इनके विशाल तने हैं. ये पौधे तीन बड़े बाओबाब पेड़ों के पास देखे गए. इन पेड़ों के बारे में माना जाता है कि ये 400 साल से भी ज्यादा पुराने हैं.हैदराबाद में करीब 37 बाओबाब के पेड़ हैं. इनमें से कई स्कूलों और निजी परिसरों में हैं. इन प्राचीन और मजबूत पेड़ों को कीटों और शहरीकरण से बढ़ते खतरों का सामना करना पड़ रहा है. इस नई खोज ने इन दुर्लभ पेड़ों के संरक्षण के लिए एक अभयारण्य बनाने की उम्मीदों को फिर से जगा दिया है.

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00:00तेलंगाना में हैदराबाद के चेंगी चेरला अभ्यारणय में भारत का पहला बाउबाब पार्क बनाने का सपना फिर से जीवन्त हो गया है।
00:30में माना जाता है कि ये 400 साल से भी ज्यादा पुराने हैं।
01:00में में में पार्क बनाने का सपना फिर से जीवन्त हो गया है।
01:24में बाउबाब के पेड़ हैं। इन में से कई स्कूलों और निजी परिसरों में हैं।
01:30इन प्राचीन और मजबूत पेड़ों को कीटों और शहरी करण से बढ़ते खत्रों का सामना करना पड़ रहा है।
01:38इस नई खोज ने इन दुरलब पेड़ों के संरक्षन के लिए एक अभ्यारने बनाने की उमीदों को फिर से जगा दिया है।
01:47झाल
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