Experience the mystery of the "Natural OM." In this deep-dive exploration by Indian Bhakti Dhara, we reveal the geological and spiritual phenomenon of Omkareshwar. Situated on the sacred Mandhata island, the very geography of this land forms the "Primal Sound" of the universe—the sacred syllable OM.
This 45-minute journey bridges the gap between Vedic Science and ancient faith, exploring the physics of the "Aadi Dhwani" (Primordial Sound) and the resonance of the Narmada river valley. Through high-fidelity 108X VFX and 16K cinematic visuals, we dive deep into the heart of the Omkareshwar Jyotirlinga, offering a meditative experience designed for soul alignment, mental clarity, and spiritual grounding in 2026.
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#Omkareshwar #TheScienceOfOm #IndianBhaktiDhara #Jyotirlinga #LordShiva #VedicScience #AncientMysteries #16KVFX #SpiritualPodcast #NarmadaRiver #DivineSound #Meditation2026 #Hinduism #CosmicVibration #Mahadev #SanatanDharma #DiscoveryBhakti #ViralDevotional
Disclaimer: This content features proprietary 108X VFX assets created by the Indian Bhakti Dhara network. All rights reserved.
Omkareshwar, Science of Om, Indian Bhakti Dhara, Jyotirlinga, Lord Shiva, Vedic Science, 16K VFX, Spiritual Podcast, Narmada, Divine Sound, Meditation, Hindu Mythology, Ancient Secrets, Mahadev, Sanatan Dharma, 8K VFX.
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00:00Ahm, if we say that, where the whole world is a beautiful shore of the whole world,
00:07four sides are only the Arajakta, Uthal-Puthal, and Vinash's view,
00:12and then, there is a very strong, very high and calm, which is the whole cosmic shore of the whole
00:18world,
00:19which is completely finished by one hour.
00:20Very calm.
00:21Yeah.
00:22This is not a new science fiction film.
00:25This is our own personal grunt, which is the same thing,
00:34Yeah, and...
00:59जिसमें इंदियन भक्ती धारा की एक बेहद व्यापक रिसर्च रिपोर्ट शामिल है
01:03शिव पुरान की कोटी रुद्र सहिता का ठार्मा अध्या है
01:06और सकंद पुरान का रेवाखंड
01:08और वायू पुरान भी
01:09जी, वायू पुरान की भी सीधे संदर्ब है
01:11तो वे सभी इसे हम सिर्फ इंट और पत्तर से बने एक धार्मिक स्थल के रूप में नहीं देखते
01:16वे इसे सपश्ट रूप से एक सिध्धक शेत्र कहते हैं
01:20और आज का हमारा मिशन भी यह है
01:23हमें यह समझना है कि कैसे एक ही स्थान पर प्रकृती का भुगोल
01:28हजारों साल पुरानी पौराने कताएं
01:30और इंसानी चेतना का सबसे गहरा दर्शन आपस में इस तरह गुनतेवें
01:38और यह सिर्फ एक प्राचीन इतिहास का पार्ट नहीं है
01:41बलकि यह देखना है कि यह सब हमारी आज की भाग दौर भरी जिंदगी में
01:46कैसे मतलब प्रासंगिक हो सकता है
01:48और जब हम उनकारिश्वर को समझने की कोशिश करते हैं
01:51तो शुरुवात इसके भुगोल से करनी पड़ती है
01:53क्योंकि देखे यहीं से इस स्थान का पूरा दर्शन जन्म लेता है
01:57मांधाता द्वीब जहां ये जोतिर लिंग स्थित है
01:59उसकी भुगोलिक संरचना अपने आप में एक बहुत बड़ा रहस्य है
02:03और जब मैंने रिसर्च नोट्स में उस द्वीब का एरियल व्यू
02:06यानि जो उपर से लिया गया दृश्य होता है वो देखा
02:09तो मैं सच में हैरान रह गई
02:11है ना वो बहुत अद्भूत है
02:12बहुत जादा
02:13मतलब नर्मदा नदी और उसकी उत्तरी सहायक नदी कावेरी
02:17इस द्वीब के चारो और इस तरह बहती हैं
02:19कि वे प्राकृतिक रूप से हिंदू प्रतीक ओम
02:22यानि प्रणव का आकार बनाती है
02:24मतलब ये किसी इंसान ने बैठकर नहीं तराशा है
02:27इसे देखकर दिमाग में सबसे पहला खयाल यही आता है
02:30कि ये तो जैसे प्रकृती का अपना कोई
02:33अमर बहुती विशाल 3D printed model है
02:36हाँ 3D printed model ये एक बहुत अच्छा तरीका है ऐसे समझने का
02:39पानी के लगातार बहाव ने सदियों में जमीन को काट कर
02:43एक पवित्र ध्वनी का आकार दे दिया
02:45लेकिन इस भौगोलिक संग्रशना को देखकर
02:47एक बहुती बुनियादी सवाल मन में उड़ता है
02:49क्या सवाल
02:50यही कि क्या हमारा भुगोल हमारे दर्शन को जन्न देता है
02:54या फिर हमारा आध्यात्मिक दर्शन
02:56हमें भुगोल को एक खास नजरिये से देखने पर मज़बूर करता है
03:01यह एक बहुती गहरा सवाल है
03:02भारतिय दर्शन में विशेश रूप से
03:05उंकारेश्वर के संदर में अगर हम देखें
03:07तो भुगोल और दर्शन अलग-अलग नहीं है
03:09अच्छा
03:09यह भुगोलिक संग्रचना में सगुन और निर्गुन के बीच के संबंद को बहुत खुपसूर्ती से जमीन पर उकेर दिये
03:14एक मिनिट सगुन और निर्गुन
03:16इन दोनों शब्दों का असल में यहां क्या अर्थ है
03:19अगर हम इसे थोड़ा आसान भाषा में खोलें तो
03:21हाँ, बिल्कुल
03:22देखिए सगुन का मतलब है वो सत्य या वो इश्वर जिसका एक रूप है
03:26एक आकार है
03:27जिसे मतलब देखा और छुआ जा सकता है
03:29तो मांधाता दुईप
03:31उसके पहाड और वो प्राकर्तिक ओम का आकार
03:33ये सब सगुन का प्रतिनी दित्व करते है
03:35और निर्गुन?
03:37वहीं दूसरी और निर्गुन का अर्थ है वो जो निराकार है
03:40जिसका कोई भौतिक रूप नहीं है
03:42लेकिन जो हर जगा व्याप्त है
03:44जो ओम की मूल ध्वनी है
03:46जो पूरे ब्रम्हांड का आधार मानी जाती है
03:48वो निर्गुन है
03:49तो मतलब ये द्वीप, सगुन और निर्गुन का एक मिलन बिंदु बन जाता है
03:54ठीका
03:55और अगर हम नदी और शिवलिंग के रिष्टे को देखें
03:58तो दर्शन और भी गहरा हो जाता है
04:00वो कैसे?
04:01नर्मदा नदी लगातार बहरी है
04:04ये जीवन के निरंतर प्रवा, समय के बीतने
04:07और दुनिया के लगातार बदलते रहने का प्रतीक है
04:11बदलता हुआ समय
04:12लेकिन इसके ठीक बीच में स्थित है जोत्रलिंग
04:15जो उस अपरिवर्तनिय सत्य का प्रतिने दित्व कता है
04:18दुनिया बदलते रहती है, पीडियां आती जाती है, समय बहता रहता है
04:22लेकिन वो परम सत्य, अपनी जगा स्थिर है
04:25वाउ
04:26स्रोत स्पष्ट करते हैं कि उमकारेश्वर में ओम सिर्फ एक प्रतीक नहीं है
04:45नदी को समय के प्रवाह के रूप में देखना और जमीन को स्थिर सत्य के रूप में ये बहुती शक्तिशाली
04:51विचार है
04:52बिलकुल है
04:52लेकिन अगर पानी समय की तरह बह रहा है, तो वो जमीन, वो पहाड क्या कर रहे है
04:59हमारे नोट्स बताते हैं कि प्राचीन ग्रंथों ने इन पहाडों को सिफ पत्थर नहीं माना
05:05बलकि उन्हें एक बकाइदा व्यक्तित्व दिया है
05:09हाँ, एक पस्नालिटी दिया है
05:11और यहीं से इस स्थान के निर्मान से जुड़ी कथाएं शुरू होती है
05:15पहली कहानी है विंध्य परवत की
05:18पुराणों के अनुसार विंध्य परवत को अपने विशाल आकार और अपनी ताकत पर बहुत ज्यादा मतलब घमंड था
05:26फिर वहाँ नारद मुनी आते हैं और उससे कहते हैं कि सुमेरू परवत उससे कहीं अधिक श्रेष्ठ और ऊचा है
05:34यह सुनकर विंध्य का एहंकार तूट जाता है
05:37वो छट-पटाने लगता है, कठोर तपस्या करता है और अंततहा शिफ प्रकट होकर उसे वर्दान देते हैं
05:44यह कथा शिफ पुराण में बहुत विस्तार से दी गई है
05:47हाँ, लेकिन यहाँ मैं थोड़ा रोक कर इस विचार को चुनौती देना चाहती हो
05:50मतलब पहाडों का मनोविज्ञान, एक निर्जीव पहाड का एहंकार कैसे हो सकता है
05:58क्या यह सिर्फ प्राचीन लेखों को द्वारा इंसानी मनोविज्ञान को समझाने के लिए
06:03प्रकृती का मानवी करण या परसॉनिफिकेशन करना नहीं है
06:07देखे
06:08मतलब यह कहानी सुनने में अच्छी लगती है लेकिन क्या हम इसे सिर्फ एक रूपा क्या मेटाफोर मान ले
06:14यह संदे बहुत स्वभाविक है
06:15लेकिन अगर हम इन ग्रंतों के लिखने के तरीके को समझें
06:19तो विंदे परवत यहां सिर्फ एक भोगोलिक इकाई नहीं है
06:22तो फिर क्या है?
06:23वो असल में इनसानी एहनकार का एक बहुत बड़ा और सटीक प्रतीक है
06:27वो कैसे?
06:28देखे, हम इनसान अकसर अपनी उपलब्धियों, अपने रुत्बे, अपनी संपत्ती
06:33या अपने ज्यान को लेकर अमुक उसी विंदे परवत की तरह कठोर, अचल और विशाल महसूस करने लगते हैं
06:40हाँ, ये तो है
06:41एक ब्रहम पैदा हो जाता है, कि हम सबसे उचे हैं
06:44इस कहानी में नारद मुनी एक उत्प्रेरक यानि कैटलिस्ट का काम करते हैं
06:49वे आकर सिर्फ एक बात कहते हैं, कि सुमेरू तुमसे बहतर है
06:53सिर्फ एक तुलना और सब खतम
06:55पैदा होता है
06:56जब तक विंदे अकेला था, वो महान था
06:59जैसे ही सुमेरू का नाम आया, उसका हैंकार असुरक्षा में बदल गया
07:03बहुत गहरी बात है ये
07:04ये कथा सिखाती है कि महानता विशाल आकार, पद या सत्ता में नहीं है
07:10महानता असल में समर्पण में है
07:12जब विंदे अपनी कठोरता छोड़ कर जुकता है, तपस्या करता है
07:16तब जाकर उस भूमी पर ईश्वर्य उर्जा का प्रकटी करण होता है
07:20ये तो इंसानी सुभाव का बहुत ही मतलब सटीक विशलेशन है
07:24और अगर हम इसी कड़ी में राजा मानधाता की कहानी देखे तो वो भी इसी विचार को आगे बढ़ाती है
07:30बिल्कुल
07:44उन्होंने यहां इतनी कठोर तपस्या की कि शिफ प्रसंद हुए और राजा ने उनसे हमेशा के लिए यहीं बस जाने
07:51का अनुरोध किया
07:53इसी लिए इस पूरे द्वीप का नाम मानधाता परवत पड़ा
07:56और राजा मानधाता की कहानी में एक बहुत ही महतुपूर विवरण है
08:01वे इतने प्रतापी थे कि उन्हें देवताओं के राजा इंद्र का सिंगहासन तक प्राप्त हो रहा था
08:06ओ स्वर्ग का सिंगहासन
08:08हाँ, लेकिन उन्होंने वो सब छोड़कर नर्मदा की किनारे इस आध्यात्मिक शांती को चुना
08:14ये कोई छोटी बात नहीं है, सबसे बड़ी सत्ता को ठुकरा देना
08:18यही तो इस थान का मूल संदेश है, ये दर्शाता है कि भौतिक दुनिया की सबसे बड़ी सत्ता, सबसे बड़ा
08:25सिंगहासन भी उस आंत्रिक शांती के सामने बहुत छोटा पड़ जाता है, जो सच्चे ज्यान से मिलती है
08:31विंध्य ने अपना अंकार छोड़ा और मांधाता ने अपनी सत्ता छोड़ी, दोनों ही कहानियों में ये जो छोड़ना या समर्पन
08:38है न, वही वो चाबी है तो इस शेत्र की उर्जा को जागरित करती है
08:42और इसी समर्पन के परिणाम स्वरूप एक बहुत ही अद्भुद घटना घटी जिसने मुझे रीसर्च के दौरान काफी हैरान किया
08:50आप ट्विन लाइट की बात कर रही है
08:51हाँ, ट्विन लाइट या दो रूपो वाले जोतिरलिंग का रहसे
08:55कहा जाता है कि जब शिव ने विंध्य परवत को वर्दान दिया
09:00तो देवों के अनुरोद पर उन्होंने अपने जोतिरलिंग स्वरूप को दो हिस्सों में विभाजित कर लिया
09:05एक ओमकारेश्वर और दूसरा ममलेश्वर
09:08जिसे अमलेश्वर भी कहा जाता है
09:10हाँ और इस तीर्थ की यातरत तब तक पूरी नहीं मानी जाती जब तक दोनों के दर्शन न किये जाए
09:16एक ही जोतिरलिंग के दो रूप
09:18क्यों इसके पीछे का दर्शन बहुत गहरा और काफी वैज्यानिक है
09:24ओमकारेश्वर और ममलेश्वर का ये विभाजन मतलब इस बात को दर्शाने के लिए है
09:29कि रचेता यानी सृष्टी का निर्मान करने वाला और पालन करता यानी जो सृष्टी को संभालता है
09:36वे अलग-अलग नहीं है
09:38अच्छा वे एक ही हैं?
09:41या पूरे ब्रह्मान्ड में संतुलन या बैलन्स का प्रतीक है
09:45द्वैत में अ-द्वैत को देखना ही इसका मुख्य उद्देश्य है
09:50संतुलन?
09:50इस शब्द से मुझे एक और प्रसंग याद आ रहा है
09:53जो हमारे नोट्स में बहुत प्रमुकता से उबरा है
09:55और ये हमें वापस उस आदी ध्वनी की तरफ ले जाता है
09:59जिसकी चर्चा हमने शुरुवात में की थी
10:02ध्वनी की उत्पत्ति और ब्रह्मान्डिय युद्ध की कथा
10:05आप देवसुर संग्राम की बात कर रही है?
10:07जी, सकंद पुरान के अनुसार
10:10जब देवताओं और राक्षसों के बीच एक भयंकर युद्ध चल रहा था
10:14और देवता बुरी तरह हार रहे थे
10:16तब उन्होंने इसी स्थान पर आकर प्रार्थना की थी
10:19और तब शिव ओमकार जोतिरलिंग के रूप में प्रकट हुए
10:23लेकिन और ये बात मुझे बहुत दिल्चस्क लगी
10:26उन्होंने कोई अस्त्र शस्त्र नहीं उठाया
10:28ग्रंथों के अनुसार उन्होंने सिर्फ ओम की ध्वनी उत्पन की
10:32और उस ध्वनी के कमपन यानि वाइब्रेशन से ही
10:36राक्षसी शक्तियों का नाश हो गया
10:38जब मैं ये पढ़ रही थी तो मेरे दिमाग में आज के समय की एक बहुत ही आधुनिक तक्नीक का
10:44खयाल आया
10:44मतलब Cosmic Noise Cancelling Headphones
10:47Cosmic Noise Cancelling Headphones
10:49ये तुलना मतलब सच में बहुत ही दिल्चस्प है
10:52इसे थोड़ा और स्पष्ट करेंगी
10:54हाँ तुसोच ये Noise Cancelling तक्नीक असल में कैसे काम करती है
10:58वो बाहर की शोर को सुनती है
11:00उसकी Frequency को पहचानती है
11:03और पिर उसके ठीक विपरीत या Antiphase एक Sound Wave या कमपन पैदा करती है
11:08हाँ Physics का Basic सिध्धानत है
11:10जी और जब ये दोनों तरंगे आपस में टकराती है
11:13तो वे एक दूसरे को खतम कर देती है
11:15और पीछे बचती है सिर्फ शानती
11:18यहाँ इस प्राचीन कथा में भी तो यही हो रहा है
11:20पूरे ब्रह्मांड में एक भयानक शोर है
11:23असुरों द्वारा पहलाई गई अराजकता है
11:26और शिव उस अराजकता से लड़ने के लिए
11:28कोई नया शोर या हिंसा नहीं करते
11:30वे ओम की वो सटीक संतुलन कारी कंपन पैदा करते हैं
11:34जो उस पूरे कोस्मिक शोर को शान्त करके
11:37ब्रह्मांड में वापस संतुलन ले आती है
11:40यह सच में एक बहुत ही
11:41मतलब सटीक और आधुनिक तुलना है
11:44और अगर हम इसके पीछे के विज्ञान और दर्शन को
11:47एक व्यापक संदर्ब में देखें
11:50तो यह सिफ एक प्राचीन युद के जादुई कहानी नहीं रह जाती
11:53यह कहानी धुनिकव प्रह्मान के प्रात्मिक सत्य के रूप में स्थापित करती है
11:58हमारे प्राचीन रिशियों को
12:00नाद भ्रह्म यानि ध्वनिही इश्वर है
12:02इसका ज्यान था
12:05आजकी आधुनिक क्वांटम फिजिक्स भी यही मानती है
12:13यानि भौतिक पदार्थ जैसी कोई ठोस चीज है ही नहीं, सब कुछ सिर्फ एक कमपन है
12:18ठीक यही बात हमारे ग्रंथ कह रहे हैं, ओम वो मूल कमपन है जो अराजकता को विवस्था में बदलता है
12:25असुर, यहां सिर्फ कोई बाहरी राक्षस नहीं है, वे अब विवस्था या एंट्रोपी और अज्ञानता का प्रतीक है
12:33ओम की ध्वनी उस अब विवस्था को वापस एक ले या हार्मोनी में ले आती है, यह हमें एक बहुत
12:39बड़ा विवारिक सबक भी देता है
12:40वो क्या?
12:41आज के समय में हर इंसान के दिमाग में विचारों, चिंताओं और तनाव का एक लगातार शोर चल रहा है,
12:47वो हमारा अपना व्यक्तिकत देव असुर संग्राम है
12:50बिल्कुल, हम सब उस युद्ध से गुजरते है
12:53तो ये कथा बताती है कि उस शोर को दबाने के लिए हमें और ज्यादा शोर नहीं चाहिए, बलकि हमें
13:00वो सही कमपन, वो सही विचार या ध्यान चाहिए, जो उस मानसिक अंधकार और अराजकता को शान्त कर सके
13:07वाउ, हम एक प्राचीन ग्रेंथ की कथा पर चर्चा कर रहे हैं, लेकिन बाते क्वांटम फिजिक्स और मानसिक स्वास्थे जैसी
13:14लग रही है, यही इस रूत सामगरी की सबसे बड़ी ताकत है
13:18अच्छा, अब उस हिस्से की तरफ बढ़ते हैं, जहां बात केवल अवधारणाओं या कॉंसेप्ट्स की नहीं, बल्कि असल इंसानों और
13:25उनके अनुभवों की होती है
13:27इस जगह से जुड़े चमतकारों और महानसंतों की कहानिया
13:32रिसर्च के दौरान एक सवाल मुझे लगातार परिशान कर रहा था
13:35कि एक ही स्थान पर इतने अलग-अलग युगों के महान लोग क्यों खिचे चले आए
13:41क्या इस जगह की हवा या पानी में ही कुछ खास है
13:44पानी या हवा में नहीं बलकि उस भूमी की ऊर्जा सनरचना में कुछ खास है
13:48जिसे हम सिद्ध छेतर कहते हैं वो असल में एक ऊर्जा का एम्प्लिफायर होता है
13:53एम्प्लिफायर मतलब जो किसी चीज के असर को बढ़ा दे
13:57हाँ ठीक वही भारती आध्यात्मिक परंपरा में ये माना जाता है
14:01कि कुछ विशेश भगौलिक स्थानों पर जहां प्रकृती के तत्व एक खास संतूलन में होते हैं
14:07जैसे ओमकारिश्वर में ओम का आकार
14:10हाँ प्रकृतिक ओम
14:11तो वहाँ भातिक दुनिया और अध्यात्मिक आयाम के बीच का परदा बहुत जीना या पतला हो जाता है
14:17ऐसे सिद्ध खित्रों में किया गया ध्यान, तपस्या या विचार कई गुना तेजी से फलित होता है
14:22ओ, अब समझ आया
14:24इसलिए योगों-योगों से ग्यान और शांती की तलाश करने वाले लोग इस एक विशेश केंद्र की ओर खिचे चले
14:30आएं
14:30और इसका सबसे बड़ा उधान है आदी शंकराचार्य
14:33इतिहास और आध्यात्म दोनों के नजरिये से ये बहुत बड़ी घटना है
14:36ये वो जगा है जहां युवा शंकराचार्य केरल से चल कर आए और अपने गुरू गोविंद भगवत पाद से मिले
14:43हमारे नोट्स में एक बहुती प्रसिद्ध कमंडलू के चमतकार का जिक्र है
14:48हाँ वो घटना उंकारेश्वर के तिहास में एक मील का पत्थर है
14:52कथा के अनुसार जब नर्मदा नदी में अचानक भयानक बाड़ आ गई थी और चारों तरफ विनाश का खत्रा था
14:59तब शंकराचारे के गुरू एक गुफा में गहरे ध्यान में लीन थे
15:04अपने गुरू की तपस्या को भंग होने से बचाने के लिए युवा शंकराचारे ने
15:09अपने एक छोटे से कमंडलू में जो पानी रखने का बरतन होता है बाड़ का सारा पानी समेट लिया था
15:16अब सुनने में ये जादू लगता है लेकिन क्या इसकी पीछे भी कोई गहरा अर्थ है
15:21देखिए हर पुरानिक चमतकार के पीछे एक मनोविज्ञानिक और आध्यात्मिक सत्यचिपा होता है
15:26बाड़ का पानी प्रकृती की उन अनियंत्रित शक्तियों का प्रतीक है जो सब कुछ नश्ट कर सकती है
15:34और कमंडलू एक सन्यासी के आत्म नियंत्रन और योग साधना का प्रतीक है
15:39ये तो बहुती सुन्दर विचार है
15:41ये कहानी दर्शाती है कि आध्यात्मिक शक्ती और ध्यान की गहराई के सामने प्रकृती की सबसे प्रचंड शक्तियां भी नियंत्रित
15:48की जा सकती हैं.
15:49और इसके अलावा गुरू गुविंद भगवत पात का वहां बरसो तक सिर्फ एक योग्य शिष्य यनि शंकराचारिय की प्रतीक्षा करना
15:57भारत में धर्म और अद्वैद दर्शन की पुनरस्थापना का सबसे बड़ा एतिया सिक्षन था.
16:05यहीं से ग्यान का वो प्रकाश निकला जिसने पूरे भारतिय उप महाद्वीब को फिर से जुड़ा.
16:11और ऐसा नहीं है कि यहाँ सिर्फ सन्यासी ही आए.
16:13राजा अमरीश की कहानी है, जिनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विश्णु का अपना सुदशन चक्र इस्थान पर पहरा देने
16:22लगा था.
16:23बिल्कुल.
16:24और सबसे दिल्चस्प कहानी तो कुबेर की है.
16:26धन के देवता कुबेर, ग्रंथों के अनुसार उन्होंने अपना खोया हुआ खजाना और अपना पद वापस पाने के लिए इसी
16:34मानधाता द्वीप के संगम पर तपस्या की थी.
16:36कुबेर का यहाँ आना उसी एम्प्लिफायर वाले सिध्धान्त को साबित करता है.
16:41वो कैसे?
16:42देखिए, मानधाता द्वीपर 24 अफ़तारों का एक मंदिर भी है, जो ये बताता है कि ओम सभी रूपों और सभी
16:50अफ़तारों का आदिस रोथ है.
16:51चाहे वो ज्यान की परमखोज में निकले शंक्राचार्य हों, या प्रचूरता और भौतिक संपदा की तलाश में कुबेर.
16:58दोनों आलग-अलग चरम है.
17:00बिल्कुल.
17:01लेकिन सबकों का उत्तर इसी आदी धोनी के उद्गम पर मिला.
17:04ये स्थान किसी एक विशेश प्रकार की इच्छा तक्सीमित नहीं है.
17:07ये उस मूल उर्जा का केंदर है, जो हर तरह के प्रकटी करण या मनिफेस्टेशन को संभव बनाती है.
17:13ये सच में अद्भुत है, और जब हम प्रकटी करण और इश्वर के हर जगा होने की बात करते हैं,
17:19तो नर्मदा नदी को मिले उस वर्दान का जिक्र मतलब बहुत जरूरी हो जाता है, जो भारतिय अध्यात्मिक्ता की सबसे
17:26सुन्दर अवधार्णों में से एक है.
17:56नर्मदेश्वर शिवलिंग का वर्दान.
17:59इस एक वल्दान ने पूरी की पूरी नदी को, सैकडों किलोमीटर लंबे जल प्रवाह को एक निरंतर वेदी और एक
18:07बहते हुए मंदिर में बदल दिया है.
18:09इसे हम पवित्रता का लोकतंत्री करण या डेमोक्रिटाइज़ेशन अब दे सेक्रिड कह सकते हैं.
18:33और यही बात हमें आज के समय की प्रासंगिक्ता की तरफ ले जाती है.
18:38क्योंकि ये सब जो हम चर्चा कर रहे हैं, ये सिर्फ हजारों साल पुरानी किताबों में बंद नहीं है.
18:43बिल्कुल नहीं, ये एक जीवित परंपरा है.
18:46हाँ, आज भी लाखों लोग हर साल नर्मदा परिक्रमा करते हैं.
18:50महीनों तक पैदल चलकर इस नदी की परिक्रमा करना एक बहुत ही कठिन साधना है.
18:56बहुत कठिन है.
18:57लोगों का रेश्वर आते हैं, वहां की प्रसिध शयन आरती और नर्मदा आरती में हिस्सा लेते हैं.
19:04लेकिन इन सब धार्मिक अनुष्ठानों के बीच जो सबसे रहस्यमई और मुझे व्यक्तिगत रूप से सबसे प्यारी बात लगी, वो
19:12है चौपड का खेल.
19:14रात की परंपरा जो हर दिन बिना नागे के निवाई जाती है.
19:16बिलकुल, रिपोर्ट में बताया गया है कि उंकार ईश्वर मंदिर में हर रात कपाट बंद होने से पहले वहां के
19:23पुजारी शिव और पारवती के लिए चौपड जो आमशितरंज जैसा ही एक प्राचीन बोर्ट गेम है, वो बिच्छाते हैं.
19:30जी.
19:30यह द्रिण मान्यता है कि रात के एकांत में शिव और पारवती वहां आकर चौपड खेलते हैं. जब मैंने ये
19:37पढ़ा तो मेरे चहरे पर एक, मतलब अपने आप एक मुस्काना गई.
19:41सौभाविक है.
19:42ये सोचकर ही कितना अच्छा लगता है कि भारतिय दर्शन में ईश्वर को इतना मानवी है, इतना अपना माना गया
19:49है कि हम उनके लिए रात में एक बोर्ट गेम बिच्छा रहे हैं. कोई डर नहीं, सिर्फ एक प्रेमपूर्ण पारिवारिक
19:55रिष्टा.
19:56ये सुनने में बहुत ही साधारन और मीठी परंपरा लगती है, लेकिन इसके पीछे भारतिय दर्शन का एक बहुत ही
20:03गहरा सिध्धान चिपा है. अच्छा. ये चौपड का केल सिर्फ एक स्थानी रीती रिवाज नहीं है. ये इस बात का
20:09प्रतीक है कि ये पूरा ब्रम्हा
20:23इसका लगतार चलते रहना और इसका अंत ये कोई बहुत गंभीर या तनावपूर्ण कारे नहीं है. ये शिव जो चेतना
20:31है और शक्ती जो उर्जा है उनके बीच का एक दिव्या आनंद में खेल है. इश्वर चौपड खेल रहा है
20:38और ये शृष्टी उसी खेल का परिणा
20:40में. वाओ! जब कोई व्यक्ती दुनिया को एक लीला के रूप में देखने लगता है, तो जीवन की और उसका
20:46पूरा नजरिया बदल जाता है. नजरिया कैसे बदल जाता है? देखे, हम इनसान अक्सर अपनी समस्याओ, अपने करियर, अपनी विफलताओं
20:54को लेकर बहुत �
20:54सादा तनाव में रहते हैं. हमें लगता है कि सब कुछ हमारे ही कंदों पर है. हाँ, ये बोच तो
21:00हम सब ही मैसूस करते हैं. लेकिन लेला का सिध्धान्त खैता है कि तुम सिर्फ इस बहुत बड़े ब्रहमांडिये खेल
21:07के एक छोटे से हिस्से हो, अपना किरदार पूरी इ
21:24आज रात की आरती और चोवर की परंपरा में दिखती है. इन दोनों का ये संगम ही ओमकारेश्वर को आज
21:30के इस अत्यधिक तनाव गरस्त और भागदोर भरे जीवन में शान्ती का एक बहुत बड़ा केंद्र बनाता है. तो अगर
21:36हम इस पूरी गहन चर्चा को एक जगा सम
21:51और हमने विल्य परवत और राजा मांधाता की कथाओं के जरीए ये भी समझा कि कैसे एहंकार का तूटना और
21:59सत्ता का समर्पण ही उस बिंदु तक ले जाता है जहां इश्वर्य कृपा प्राप्त होती है. हमने ध्वनी के विज्ञान
22:06को देखा कैसे ओम की एक कमपन ब्रह
22:09हम्हांड ये अराजकता को शान्त करती है. ठीक वैसे ही जैसे आज हम अपनी मानसिक शोर को शान्त करने की
22:16कोशिश करते हैं. और हमने देखा कि कैसे ओंकारेश्वर एक सिध्धक्षेत्र के रूप में शंकराचारे से लेकर कुबेर तक हर
22:26किसी की तपस्या को एम्पलिफा�
22:28और अंत में चौपड का वो खेल जो में याद दिलाता है कि ये सब एक दिव्य लीला है. बिल्कुल.
22:33तो आज के सफर को खत्म करने से पहले मैं एक ऐसे विचार पर बात करना चाहती हूं जो इस
22:39पूरी चर्चा से उपजा है लेकिन जो हमारी सोचने के तरीके को मतलब पू
22:54बहुत ही प्रसिद्ध सिधान्त है जिसे simulation theory या holographic universe कहा जाता है. ये आज के विज्ञान का एक
23:02बहुत ही चर्चित विशा है. ये theory कहती है कि जिसे हम अपनी ठोस वास्तविक दुनिया मानते हैं वो शायद
23:08किसी उच आयाम का सिर्फ एक projection है एक तरह का बहुत ही उननत computer simulation या
23:15खेल है. और हजारों साल पहले ओम कारेश्वर में बैठे रिशियों ने इसी बात को लीला और माया कहा था.
23:22तो सोचने वाली बात ये है अगर ये दुनिया सच में शिव और पार्वती के बीच चल रहे चौपड के
23:28खेल का एक विस्तार है. अगर हम सब सिर्फ उस holographic ब्रह
23:44अगरे दिव्य खेल का हिस्सा हैं, हमें अपनी चिंताओं से मुक्त नहीं कर देता. अगली बार जब जिन्दगी बहुत भारी
23:52लगने लगे या दिमाग में विचारों का शोर बहुत जादा बढ़ जाए, तो एक पल के लिए रुखिये. उस मूल
24:00कमपन को महसूस करने की को
24:13अपनी जिन्दगी की इस लीला का आनंद लीजे.
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