Skip to playerSkip to main content
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत को अहम फोन कॉल मिला। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सीधे भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से बात की। दोनों नेताओं ने मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति और संभावित संकट पर चर्चा की। विश्लेषकों का मानना है कि भारत ईरान को दवाइयों और मानवीय मदद देने में भूमिका निभा सकता है। इसके अलावा, जयशंकर ने कतर के प्रधानमंत्री से भी बातचीत की। भारत की यह सक्रिय कूटनीति मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए बेहद अहम है।

Amid rising US-Israel tensions with Iran, India received a crucial call from Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi. External Affairs Minister S. Jaishankar discussed Middle East security, humanitarian aid, and potential crisis management. Analysts suggest India may play a key role in providing medical supplies and supporting regional stability. Jaishankar also spoke with Qatar’s Prime Minister on reducing conflict risks. This high-stakes diplomacy highlights India’s strategic role in the Middle East, balancing humanitarian efforts and international relations, while keeping a close watch on the escalating Iran-Israel-US situation. India’s proactive engagement could influence regional peace.

#Iran #India #Jaishankar #Araghchi #MiddleEast #TrumpThreat #US #Israel #HumanitarianAid #Diplomacy

~PR.540~GR.122~HT.96~

Category

🗞
News
Transcript
00:00इरान से जारी अमेरिका और इसराइल के युद्ध के बीच भारत को अचानक एक महत्वपूर्ण फोन कॉल मिला
00:06भारतिये विदेश मंत्री S. जैशंकर ने सोशल मीडिया पर बताया कि इरान के विदेश मंत्री अब्बास अरगची ने उनसे सीधे
00:14संपर्क किया
00:15ये कॉल ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका खुल कर इसराइल के पक्ष में खड़ा हो चुका है और
00:21क्षेत्रिय तनाव बढ़ता जा रहा है
00:22दोनों नेताओं के बीच वेस्ट एशिया में वर्तमान स्थिती और संभावित संकट पर लंबी बातचीत हुई
00:29बताया जा रहा है कि इरान इस समय गंभीर संकट का सामना कर रहा है
00:33युद्ध की वजह से वहां बुनियादी जरूरतें खास कर दवाईयों की भारी कमी है
00:38विशलेशकों का मानना है कि भारत से दवाईयों और मानवतावादी मदद की संभावना पर चर्चा हुई होगी
00:44हालां कि बातचीत के दौरान दोनों देशों ने किसी भी समवेदन शील विवरन को सार्विजनिक नहीं किया
00:50ये साफ संकेत है कि भारत की भूमिका मिडल इस्ट में कूटनी तिक संतुलन बनाए रखने के लिए एहम बनी
00:56हुई है
00:56एस जैशंकर ने अरगची के अलावा कतर के प्रधान मंत्री और विदेश मंत्री मुहम्मद बिन अब्दुल रह्मान अल्थानी से भी
01:04फोन पर वारता की
01:05ये वारता भी इरान और इस्राइल के बीच चारी संगर्ज को ध्यान में रखते हुए की गई
01:10विशेशक ये मानते हैं कि इन चर्चाओं का उद्देश युद्ध की संभावनाओं को कम करना और क्षेत्र में शान्ती बनाए
01:17रखने के उपायों पर विचार करना था
01:18भारत की भूमिका इस समय बेहद नाजुक है
01:21मध्यपूर्व में सैनने टकराओ और राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहे हैं
01:26अमेरिका इसराइल के साथ खड़ा है और इरान अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए तैयार है
01:31ऐसे में भारत जैसी तीसरी ताकत का हस्तक्षेप संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है
01:37भारत ने हमेशा क्षेत्रिय शांती और स्थिर्ता के लिए कूट नीती का सहारा लिया है
01:42और अब भी इसी नीती को अपनाया जा रहा है
01:45विशलेशकों का मानना है कि इरान के साथ हुई ये बातचीत केवल दवाईयों या मानवतावादी मदब तक सीमित नहीं रही
01:52इसके पीछे लंबी रणनीती और संभावित समाधान की तलाश भी छिपी हुई है
01:57भारत की कोशिश ये होगी कि युद्ध और तबाही के बीच इरान को किसी तरह राहत और समर्थन दिया जा
02:03सके
02:03जिससे क्षेत्रिय तनाव बढ़ने से रोका जा सके
02:06अरागची और जैशंकर की बातचीत ने ये भी संकेत दिया कि भारत ने मिडल इस्ट में सक्रिय भूमे का निभाने
02:12का निर्णय किया है
02:13ये स्थिती भारत के कूटनीतिक और रणनीतिक कौशल को चुनोती दे रही है लेकिन इसे संभालने की ख्षमता भारत में
02:20मौजूद है
02:21इसके अलावा कतर के प्रधानमंत्री के साथ हुई बातचीत ने ये स्पष्ट किया कि भारत अन्य मध्यपूर्वी देशों के साथ
02:28भी समन्वे स्थापित कर रहा है ताकि युद्ध की आग को फैलने से रोका जा सके
02:32मौजूदा स्थिती में भारत की भूमिका केवल मध्यस्थता तक सीमित नहीं रहेगी यदि आवशक्ता पड़ी तो भारत ना केवल मानविय
02:39मधद प्रदान कर सकता है बलकि अंतराश्ट्रिय मंच पर भी वारता और समझोते की दिशा में दबाव बनाने का काम
02:45कर सकता है
03:04मौजदा प्रदान कर सकता है
Comments

Recommended