00:00इरान से जारी अमेरिका और इसराइल के युद्ध के बीच भारत को अचानक एक महत्वपूर्ण फोन कॉल मिला
00:06भारतिये विदेश मंत्री S. जैशंकर ने सोशल मीडिया पर बताया कि इरान के विदेश मंत्री अब्बास अरगची ने उनसे सीधे
00:14संपर्क किया
00:15ये कॉल ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका खुल कर इसराइल के पक्ष में खड़ा हो चुका है और
00:21क्षेत्रिय तनाव बढ़ता जा रहा है
00:22दोनों नेताओं के बीच वेस्ट एशिया में वर्तमान स्थिती और संभावित संकट पर लंबी बातचीत हुई
00:29बताया जा रहा है कि इरान इस समय गंभीर संकट का सामना कर रहा है
00:33युद्ध की वजह से वहां बुनियादी जरूरतें खास कर दवाईयों की भारी कमी है
00:38विशलेशकों का मानना है कि भारत से दवाईयों और मानवतावादी मदद की संभावना पर चर्चा हुई होगी
00:44हालां कि बातचीत के दौरान दोनों देशों ने किसी भी समवेदन शील विवरन को सार्विजनिक नहीं किया
00:50ये साफ संकेत है कि भारत की भूमिका मिडल इस्ट में कूटनी तिक संतुलन बनाए रखने के लिए एहम बनी
00:56हुई है
00:56एस जैशंकर ने अरगची के अलावा कतर के प्रधान मंत्री और विदेश मंत्री मुहम्मद बिन अब्दुल रह्मान अल्थानी से भी
01:04फोन पर वारता की
01:05ये वारता भी इरान और इस्राइल के बीच चारी संगर्ज को ध्यान में रखते हुए की गई
01:10विशेशक ये मानते हैं कि इन चर्चाओं का उद्देश युद्ध की संभावनाओं को कम करना और क्षेत्र में शान्ती बनाए
01:17रखने के उपायों पर विचार करना था
01:18भारत की भूमिका इस समय बेहद नाजुक है
01:21मध्यपूर्व में सैनने टकराओ और राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहे हैं
01:26अमेरिका इसराइल के साथ खड़ा है और इरान अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए तैयार है
01:31ऐसे में भारत जैसी तीसरी ताकत का हस्तक्षेप संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है
01:37भारत ने हमेशा क्षेत्रिय शांती और स्थिर्ता के लिए कूट नीती का सहारा लिया है
01:42और अब भी इसी नीती को अपनाया जा रहा है
01:45विशलेशकों का मानना है कि इरान के साथ हुई ये बातचीत केवल दवाईयों या मानवतावादी मदब तक सीमित नहीं रही
01:52इसके पीछे लंबी रणनीती और संभावित समाधान की तलाश भी छिपी हुई है
01:57भारत की कोशिश ये होगी कि युद्ध और तबाही के बीच इरान को किसी तरह राहत और समर्थन दिया जा
02:03सके
02:03जिससे क्षेत्रिय तनाव बढ़ने से रोका जा सके
02:06अरागची और जैशंकर की बातचीत ने ये भी संकेत दिया कि भारत ने मिडल इस्ट में सक्रिय भूमे का निभाने
02:12का निर्णय किया है
02:13ये स्थिती भारत के कूटनीतिक और रणनीतिक कौशल को चुनोती दे रही है लेकिन इसे संभालने की ख्षमता भारत में
02:20मौजूद है
02:21इसके अलावा कतर के प्रधानमंत्री के साथ हुई बातचीत ने ये स्पष्ट किया कि भारत अन्य मध्यपूर्वी देशों के साथ
02:28भी समन्वे स्थापित कर रहा है ताकि युद्ध की आग को फैलने से रोका जा सके
02:32मौजूदा स्थिती में भारत की भूमिका केवल मध्यस्थता तक सीमित नहीं रहेगी यदि आवशक्ता पड़ी तो भारत ना केवल मानविय
02:39मधद प्रदान कर सकता है बलकि अंतराश्ट्रिय मंच पर भी वारता और समझोते की दिशा में दबाव बनाने का काम
02:45कर सकता है
03:04मौजदा प्रदान कर सकता है
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