00:00सिध्धी गाव, नाम जितना शांत लगता है, उतना ही डरावना है इसका इतिहास, लोग कहते हैं यहां वक्त रुख जाता
00:08है, खास कर उस वीरान हवेली के पास, हर शाम ढलते ही गाव वाले दर्वाजे बंद कर लेते हैं, दिये
00:16बुझा देते हैं, और मंदिर में घंटिया �
00:19बजनी बन हो जाती है, कारण एक भयानक हवेली, जो गाव की सीमा पर खड़ी है, अकेली, उजडी हुई, लेकिन
00:28जिन्दा, इस हवेली का इतिहास खून से लिखा गया है, कभी वहां ठाकुर अंबी का सिन्ह रहा करते थे, कहते
00:36हैं, उसने अपनी ही पतनी को जिन्दा जला
00:39दिया, और उसी रात हवेली में पहली बार किसी ने उसे देखा, गाव वालों के मताबिक हवेली में तीन प्रेत
00:48रहते हैं, एक बुढ़ा भूत जो छट पर चलता है, एक जली हुई चुडैल जो हर रात रोती है, और
00:55वो जिसके बारे में कोई कुछ नहीं जानता, सिवाए
00:59इसके की जो उसे देखता है, वो कभी नॉर्मल नहीं रहता, आज तक जिसने भी हवेली में कदम रखा, या
01:06तो पागल हो गया, या फिर कभी लौटा ही नहीं, लेकिन इनसान की सबसे बड़ी कमजोरी होती है जिग्यासा, और
01:14यही जिग्यासा एक दिन ले आती है तीन दोस
01:17दोस्तों को, उस हवेली के दर्वाजे तक तीन दोस्त, अरजुन, रौनक और तनवी एक यूनिवर्सिटी प्रोजेक्ट के लिए सिध्धी गाव
01:27पहुँचे थे
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