00:0029 साल निधी अपने नए फ्लाट में अकेली रहती थी, एक शाम उसने देखा कि दीवार पर उसकी परचाई थोड़ी
00:08अलग तरह से हिल रही है, पहले उसने सोचा शायद लाइट की वज़े से ऐसा हो रहा होगा, लेकिन धीरे
00:15धीरे उसे एक डरावनी बात समझाई, जब ही व
00:29परचाई अभी भी चलती रही, निधी का दिल जोर से धड़कने लगा, उसने लाइट बंद कर दी, कमरा अंधेरे में
00:37डूग गया, लेकिन दीवार पर उसकी परचाई अभी भी दिख रही थी, और इस बार वो धीरे धीरे उसकी तरफ
00:45बढ़ रही थी, निधी चीक कर कमरे
00:48से बाहर भाग गई, अगली सुबद जब वो लोटी, दीवार पर सिर्फ एक चीज लिखी थी, अब मेरी बारी है
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