00:00गाव में रात को कोई नहीं निकलता, सब जानते थे, क्यों? रात के नौ बजे के बाद, गलियों में कोई
00:08नहीं, यातरी आशुतोष को नहीं पता था, वो रात को गाव पहुँचा, घूमने निकला, गलिया खाली, सनाटा, पर उसे लगा,
00:19कोई पीछे है, मुडा, कोई नही
00:22फिर चला, फिर लगा, फिर मुडा, इस बार एक पूरी भीड थी, पर सब चुप, सब पारदर्शी, एक बुजुर्ग आगे
00:33आए, जाओ, बेटा, रात को यहां मत रहो, आशुतोष भागा, सीधे सराय में, अगली सुबह गाव वालों ने बताया, रात
00:44को हमारे पूर्ख
00:45आते हैं, गाव की रखवाली करते हैं, अजन्बियों को भगा देते हैं, आशुतोष ने पूछा, डरावना नहीं लगता, गाव वाले
00:54मुस्कुराएं, वो हमारे हैं
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