00:01क्या कभी आपने ऐसा सफर किया है जहां हर जगे सिरफ घूमने की नहीं मैसूस करने की कहाने बंजयाई जहां
00:08विडियो बहुत ही इंट्रेस्टिंग होने वाला है एंड तक बने रहेगा
00:12सबसे पहले हमने एहमदाबाद में यात्रा की शुरुवात की जू से
00:16एंट्री गेर देखकर ऐसा लग रहा था
00:18जैसे कोई बाज खड़ा होकर हमारा वेलकम कर रहा हो
00:22अंदर जाते ही सबसे पहले हमने पानी में कच्छुए देखे
00:25और खिलते हुए कमल के फूल
00:27जो मन को शांती दे रहे थे
00:29थोड़ा आगे भड़े तो एक शेर दोपैर की धूप में अराम करता हुआ दिखा
00:34जैसे अपनी ही दुनिया में खोया हुँ
00:37वहीं पास में चीता इधर उधर टहल रहा था
00:40उसकी चाल में एक अलग ही रोयल अंदास था
00:44और फिर बच्चों की तरह बेल पत्र तोड़ने का आनन देते हुए
00:48हमारे अंकल आंटी और ममी
00:50उसके बाद हम सैकेंड नमबर पर आगए अक्षर धाम
00:52जी हाँ दुनिया का सबसे पहला स्वामी नरायर मंदिर
00:55गुज्जात के एहमताबाद में बना है
00:57यह इसकी खाशियत है
00:59इस मंदिर में काफी बारीक नकाशी है
01:02और कई धर्मों के दर्शन यहां होते हैं
01:04गुलाबी पत्रों पर बना बारीक कला
01:06और हर दिवार जैसे कोई कहानी कहती है
01:10अंदर कदम रगते ही एक अलग ही शान्ती और सुकून मैसूस होता है
01:15और शाम होते ही रंग भिरंगी रोशनी में नाया हुआ मंदिर ऐसा लगता है
01:21जैसे सोनी सा चमकता हुआ आसमान से बाते कर रहा हूँ
01:25यहां की खूबसूरती सिर्फ आखों से नहीं दिल से मैसूस होती है
01:29स्वामी नरायन मंदिरों की खास पहचान यह है कि
01:33यहां पर स्वामी नरायन की मूर्तिया रखे हुए है
01:37साथ ही उनकी व्यक्तिगत मूर्तिया भी यहां रखे हुए है
01:41उनके दाथ उनके बाल भी यहां पर सहच कर रखे हुए है
01:46उसके बार नमबर थी पर हम आते हैं दांडी कुटिर की दांडी कुटिर
02:02दिखाई देता है और यह कोई संयोग नहीं है बलकि यह एक इतिहासी घटना है जब 1930 में गांधी चीनी
02:11नमक कानून के खिलाफ दाड़ी मार्च शुरू किया था यह वही आंदोलन था बहार से भले ही यह एक शांत
02:18सरंचना लगी लेकिन जैसे ही आप अंदर एंट्री करते है
02:22आप एक अलग ही दुनिया में पहुंच जाते हो उसके बाद नमबर फोर पर हम पहुंचते हैं वाव अदालत या
02:28अडलास की बावड़ी जी हां यह सिरफ एक कुवा नहीं बलकि कला और भावनाओं का संगम है इसका निर्मान कारिया
02:37शुरू करवाया था राजा नन्वियर
02:40सिंग ने लेकिन इसे पूरा करवाया उनकी पत्नी रानी रुधा बाईनी साल 1499 में जी हां अपने पती की आदमी
02:48जैसे ही आप इस बावड़ी में कदम रखते हो ऐसा लगता है जैसे समय पीछे कहीं चला गया हो यह
02:55बावड़ी पांच मंजिला है और इसकी बनावट अश्
03:03आज भी उस दोर की कला और इंजिनेरिंग की श्रेश्टा को दिखाती है जी हां वहां हमने पूछने पर हमें
03:11पता लगा कि यह जो इमारत है जो इनको इनके उपर जो स्टम खड़े किये गए थे वो चावल और
03:17डाल शहद गुड से जोड का लिक्विड पेस्ट पनाकर इन
03:33अंदर पहुंचती है जिस वज़े से अंदर का तापमान पहार से लगबग छे डिगरी कम रहता है दिवार और खंबो
03:40पर उकेरी गई यह जो देवी देवताओं और नव ग्रहों की मूर्तिया है इस जगे को इतिहासिक नहीं बलकि अथ्यात्मिक
03:49भी बनाती है आज भी गा
04:00चाओं और सुकून का ठिकाना बन जाती है लेकिन इस बावडी की सबसे गहरी बात इसकी कहानी है जी हां
04:07कहा जाता है कि जब राजा रणवीर सिंग इस बावडी का निर्मान करवा रहे थे तभी एक मुस्लिम शाश्रिक सुल्तान
04:14बेगारा ने उनके राजय पर हमला कर दि
04:28रानी ने एक कंडिशन रखी पहले इस बावडी का निर्मान पूरा करवा हूँ सुल्तान ने शर्त मान ली और त्या
04:35समय में इस अदभुत बावडी को पूरा भी करवा दिया है लेकिन रानी का इरादा कुछ और ही था जैसे
04:42ही बावडी पूरी हुई रानी उसे देखने �
04:44और बीना एक पर सोचे उस पांच मंजिला गहराई में छलांग लगा दी और बनता भी था उन्होंने अपनी जान
04:52दे दी लेकिन अपना वचन और सम्मान उन्होंने नहीं तोड़ा कहते हैं आज भी रानी रुदावाई की आत्मा इस बावडी
05:00में भटकती है और इसी के पा
05:14ऐसी खूब सूरत रचना दोबारा नहीं बना सके आज यह भावडी भारतिय पूराता तो सर्वेक्षन की देखरेक में हैं और
05:23हर साल हजारों प्रेटक की यहां आते हैं सिरफ इसे देखने नहीं बलकि इसकी गहराई खूब सूरती और कहानी को
05:32मैसूस करने अटलास के भा�
05:39पत्रों में भी जिन्दा रहती हैं और कुछ फैसले इंसान को अमर बना देते हैं इसके पात नंबर फिफ्ट पर
05:46गए हम त्री मंदेजी हां एमदापात के पास एक एसी जगह है जहां आस्था अलग अलग नहीं एक हो जाती
05:53है दूर से ही इसकी भवेता दिल को छू रही थ
05:58चड़ते चड़ते तेज थूप जलते हुए पाउं लेकिन दिल में सिर्फ एक ही जजबा था दर्शन भी करने हैं और
06:06वीडियो भी बनानी है जो आप सबको मुझे दिखाने हैं उपर पहुंसे देखा तो मंदिर का निर्मान कारिया अभी भी
06:12चल रहा था लेकिन इसकी अ�
06:28पर मिल सके इसका मारक दर्शन किया था ग्याने पूरुष दादा भगवान जी ने उनका सपना था धरम अलग अलग
06:35हो सकते हैं लेकिन भगवान एक ही है यह सोच इस मंदिर की हर दिवार में महसूस होती है जी
06:42हाँ यकिन मानिया मैंने महसूस किया है तभी ये विडियो में
06:45आप लोगों तक पूंचा पा रहे हूं यहां सिरफ मंदिर ही नहीं बलकि एक संग्रेले एक मिनी थियेटर और एक
06:52बड़ा ससंग होल भी है जहां लोग सिरफ दर्शन ही नहीं बलकि समच और शांती भी लेकर आते हैं यहां
06:59हमने दर्शन किये श्री नात जी योगेश्वर �
07:02श्री कृष्ण भगवान जी और त्रिवपुती बैला जी के वर्तमान तिर्थंकर श्री सीमांदर स्वामी जी सच कहूं जब मैंने श्री
07:11सीमांदर स्वामी जी को देखा तो ऐसा लगा जैसे यह पहले मुलाकात नहीं है जैसे कोई बहुत पुराना रिष्टा हो
07:18आखें ख
07:32अपर एक प्रदर्शनी लगी हुई थी उसकी जलक मुझे कुछ नया ही सिखा रही थी फिर हमने दर्शन किये गिनेश
07:38जी के शीव जी के और हनमान जी के मंदिर के हर जगह एक ऐसा एहसास शांती सुकून और अपना
07:45पन था तो यह मंदिर सिरफ एक मंदिर नहीं है यहाँ �
07:50एक सोच है जहाँ यह सिखाया जाता है धरम हमें बाटने के लिए नहीं जोडने के लिए होते हैं इस
07:56मंदिर ने मुझे सिर्फ दश्य नहीं दिये इसने मुझे यह सिखाया कि भगवान अलग अलग रूपों में हो सकते हैं
08:04लेकिन रास्ता हमेशा एक ही होता है शांती और �
08:09प्रेम का इसके बात नमबर शिक्स पर देखा हमने तिरुपति बाला जे मंदे जिसकी इमारत की भविता देखते ही बन
08:17रहे थी बाहर पुझा सामगरी के दुकानों से लेकर अंदर की शांत वातावरं तक हर चीज में एक अलग ही
08:25अधात्मिक होर्जा महसूस हो रहे थी
08:27नमबर सैवन पर हमने मा वैशनु माता की दर्शन किये जहां जाकर मन को अलग ही शांती मिली नमबर आट
08:35पर शाम होते होते हम पहुझे अटल ब्रिस जहांसे रिवर फ्रंट का नजारा दिल छू लेने वाला था धलती शाम,
08:43ठंडी हवा और चमकती लाइट मानों पूरा श
08:56चीब सी शांती ने हमें घेड़ लिया ऐसा लगा जैसो यहां आज भी मात्मा गांधी जी की मौजूद्गी हमें महसूस
09:04हो रही हो आश्रम अंदर से बड़ा विशाल था हर कोना हर दिवार एक कहानी कह रही थी सादगी की
09:12संघर्ष की और सच्चाय की सबसे पहले हमने दे�
09:25कर विदेशी लोगों के साथ चर्चा किया करते थे और उस पल ऐसा लगा कि इतनी सधारन जगह से इतने
09:33बड़े फैसले लिए गए होंगे यह सोच कर ही दिल भर राया वहां हमने उनके हाथों से बने हुए रंग
09:40बिरंगे धागों के गुच्छे देखे वह सारी पूराणी
09:43मशीने जो आज भी उनकी महीनत और सोच को जिंदा रखे हुए हैं इसके बाद मैं और मेरी माता जी
09:51आश्रम के और अंदर तक गए जहां एक खूब सूरत नीले पानी का पुल था चारों तरफ रंग बिरंगे फूल
09:59और सुकून भरा माहोल ऐसा लग रहा था जैसे कुछ सम
10:13गांदीजी सच में यहीं बैठे हो बिल्कुल शान्त घंभीर और विचारों में खोए हुए नमबर टैन जगरनात मंदी और फिर
10:22हम पहुँचे उस जगह पर जिसका इंतजार शायद मुझे बच्पन से खा जगरनाजी का मंदी सच कहूं तो अब तक
10:30मैंने सिरफ इनके किस
10:31से सुने थे कहानियों में देखा था और स्रोशल मेडिया पर भगवान जगरनात जी के नोटंकी भरे दर्शन की थे
10:38लेकिन हर बातosphा दिल में एक ही सवाल होड़ता था क्या मुझे कभी इस जनम में अपने सामने साक्षाथ भगवान
10:47jagarnath jik ke darshan hoongi
10:48aur us din us sual ka jwaab
10:51khud jagarnath bhagwan ji nye mujhe
10:53diya, jiasse hi mein
10:54mandir ke anndar gai, dil ke
10:57dharkanin tej hoogay, aur
10:58aankheng khud ba khud
11:00nam hoonne laggi, ji haan ye
11:02joh meinne anubhav kiya hai, woho
11:04mein aapko bata raha raha ho, aur
11:06fir fuo pal aya, mein
11:08bhagwan jagarnath jik ke bilkul
11:10saamne khadhi thi, puri bheer
11:12ko cheertte huoye, bhagwan ji ke
11:14bilkul saamne khadhi hooggi, mujhe
11:15aarti mei shamil hoonne ka asr
11:17mila
11:28us time aarti chal rahi thi, ghanthi
11:31ki aawaz, bhakti ki shradha
11:33aur us mahaul ki jo energy
11:35sab kuch mila kar
11:37aisa lag ra tha, jiasse
11:38samih vahin thum gaya ho, aur
11:41bus us pal mei
11:43kho gaya ho, us pal ko
11:45meinne siref camera mei hi nahi, bhlkhi
11:47aapni aankho, aur dil dhimag
11:49mei bhi kiad kiya, aur job bhagwan ji
11:51ka prasad hath mein aya, to
11:53aisa laga, jiasse mujhe
11:55siref prasad nahi, bhlkhi
11:56eek aashirwaad mila hai, ek sukun, jo shabdho mei kabhi
12:01bayan ho hii nahi saakta, saath hi, paas mei bhagwan shri narayan ji ka mandir bhi tha, jaanki shanti
12:07aur dhivita nye, us anibhav ko, aur bhi, geharah bina diya, mandir ki sajavaat, woh, satrangi light, ur, woh, bhwya
12:16bhawan, aisa lag ra ha, jiasse, dharti par kha'da, ya mandir, sachum, mei, aasman, se bati kar raha ho, aur,
12:23us pal, dil ne, bas, eek hi baat kahi, kuch, kuch, khoaishe, vakt lieti hai, lekin, job, pooli hooti hai,
12:30toh, jindgi bhar ke liye, yaad e, dilu, mei basi, raha jati hai, ant mei, min, itna hii khaungi, ki,
12:37kuch, kuch, kuch, kuch, kuch, kuch, kuch, kuch, k
12:37anbin, sunGG, kudi, jok, kutivita, dir tu wis marchi, yaad hii, si raf, sun sung, kia hua hai, apne bhi,
12:43inessä kumpir kao, galah, yaad ee was nice, sir jamu, yaadu, samol, liik, kari, salari, mainly chish, kuri, kare, ul
12:55kame, so that game.
12:58हसते रहे, मुस्कुराते रहे, राधे राधे
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