00:10दूबते हुए सूरी को अर्ग देने का समय 24 मार्श के दिन है।
00:30बजे से लेकर 6 बच कर 40 मिनट के बीच रहेगा और इसी दोरान अर्ग का भी शुब समय है।
01:00सूरी देव, संत्रा, सिंगाडा, अद्रक, हल्दी, सूप के कोने में रखें, दीपक और अगरबती, गन्ने को सूप के साथ या
01:06पीछे खड़ा रखें।
01:07सब कुछ संतुलित और साफ सुत्रे तरीके से ही सजाए।
01:10वरती इस दिन नई साड़ी पहने या नए कपड़ा धारन करें।
01:13आप चाहें तो पीला, हरा या फिर सफेद रंग की साड़ी पहन सकती हैं।
01:17माथे पर सिंदूर लगाएं।
01:19सूप को अपने सामने रखें।
01:20दीपक जलाएं।
01:21अप पाने में उतरें।
01:22सूरिदेव की और मू करके खड़े हो जाएं।
01:24हाथ जोड़कर सूरिदेव और छटी मैया का ध्यान करें।
01:27मनी मन, गीत गाई या प्रार्तना करें।
01:29एक लोटे में साफ जल और थोड़ा सा दूद में ला लें।
01:33दोनों हाथों से लोटा पकड़कर सूरिदेव की और जल गिराएं।
01:36ध्यान रखे कि जल एक धार में गिरें।
01:38अर्ग देते समय ओम सूरियाय नमा बोल सकते हैं।
01:41या छट के पारंपरी गीद भी गाय जा सकते हैं।
01:44ये प्रक्रिय आपको तीन बार दोहरानी है।
01:46आपके सूप से छूते हुए उस जल की धारा को प्रवाहित करना है।
01:50इसके बाद सूप को ठाकर सूरिदेव को दिखाएं।
01:53प्रसाद अर्पित करें। हाथ जोड़कर प्रातना करें।
01:55परिवार के सुख समर्दी, बच्चों की लंबे उम्र और स्वास्त की कामना करें।
01:59घाट पर ही व्रती को आशरवात दिया जाता है।
02:02परिवार लोगों के पैर चुएं।
02:04एक दूसरे को नाक से लेकर सिंदूर पहनाएं।
02:06पूजा में प्लास्टिक का अस्तमाल ना करें।
02:08पूरिशृदता और साफसफाई से करें।
02:10दीपक बुजने ना दें। मन शान्त और श्रद्धा से भरा रखें।
02:14वहीं अगले दिन सूर्योदय को अर्ग देने के बाद ही व्रती अपने व्रत का पारण करें।
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