00:00अभी एक डेटिंग एप एक फीचर ले के आया है जिसमें राशी के थ्रूँ आप अपना पार्टनर चुन सकते हैं
00:05तो फिर ये कुंडली वगेरा मिलाना इसके पीछे क्या मनोविज्यान है
00:09आपका कुछ नाम है आशना उसका नाम है राहुल ये बीच में राशी कौन आई क्या आशना राशी को बरदाश्ट
00:15करेगी क्या करना चाहिए नहीं ये दो के बीच में तीसरा कौन आ गया और राशी तो आई आई अपनी
00:23फूफी कुंडली को भी साथ लई
00:26अब कोई मुझे बता है ये कुंडली को है हम क्या कर रहे हैं हम जिन्दा है या बस बेहोशी
00:32में चल रहे हैं ये क्या चला रखा है हमने सूर्य नक्षत्र चांद तारे आकाश गंगाएं सारी वो एक निश्चित
00:42नियम पर चलते हैं वो नियम आपको विज्ञान पता देता
00:46है अब उसके आगे ये कहां से आ गया कि जब ब्रहस्पत यहां होगा और शुक्र यहां होगा तो आपका
00:53भाग्य फिर यहां होगा कोई लेना देना नहीं उटपठांग बिलकुल नसर नपैर एक इनसान की जिन्दगी पर चांद का क्या
01:01असर पढ़ जाएगा और वहां शन
01:16को मानने के पीछे आपके पास बस मनोवैज्यानिक कारण है और मनोवैज्यानिक कारण है डर आप डरे हुए हो और
01:25जहां डर होगा वहां प्रेम हो सकते हैं क्या डर और प्रेम साथ चल सकते हैं तो जहां कुंडली मिला
01:30करके काम हो रहा है वहां तो पहले ही पता है कि इस रि
01:45इंदेन हो सकता है प्रेम नहीं हो सकता क्योंकि जिस रिष्टे की शुरुवात ही अज्ञान और डर से हुई है
01:50उसमें प्रेम तो कभी भी नहीं होगा होगा ही नहीं
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