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Transcript
00:00शिव और शक्ति दोनों को साथ दिखाया जाता है पति-पत्नी के रूप में
00:03और शिव पशुपति भी कहलाते हैं
00:05पशुपति इस अर्थ में कि पशुओं के स्वामी
00:08तो आप पशुओं को मारेंगे तो शक्ति को या शिव को ये बात सुहाएगी क्या?
00:23और इन दिनों में तो जलवा विखरता है
00:26जो आम आदमी कम मचली खाता होगा ज्यादा खाएगा
00:29जो कम बकरा खाता होगा ज्यादा खाएगा
00:31दंदना के बली दी जाती है
00:33इतनी बली इतनी बली की कोई हद नहीं
00:36और वो भी ऐसी देवी के त्योहार में तुम जानवर काट रहे हो जो स्वयम सब पश्वों की रक्षक हैं
00:44वो प्रकृति की देवी हैं वो देवी के सजीव रूप हैं देवी के सजीव रूप को देवी की प्रतमा के
00:50सामने काट रहे हो ये कहां की हुश्यारी है
00:54मैं भी उन्हीं देवी की दिशा से आ रहा हूँ जिन देवी की आराधना आप करते हैं
00:59मैं दुर्गा सब्षती को आधार बना कर आपसे बात कर रहा हूँ
01:02दुर्गा को आप पूझते हैं न तो मैं दुर्गा के ग्रंथ की बात कर रहा हूँ
01:06ये आप क्या कर रहे हो
01:07दुर्गा सब्तशती का केंद्रिय संदेश यही है
01:11प्रक्रत को भोगोगे
01:14कंजम्शन की चीज मानोगे
01:16तो देवी तुम्हारा वही हाल करेंगी
01:19जो चंड मुंड मधु कैटब शुम्ब निशुम्ब का किया था
01:23महिशासूर कौन है
01:25जो प्रक्रत को
01:27कंज्यूम करने निकलता है
01:29जो कहता है
01:30I'll have fun at the expense of प्रक्रती
01:34वही महिशासूर है
01:35देवी का तेवार इसलिए थोड़ी आता है
01:39कि हम खुद ही महिशासूर बन जाएं
01:40हम मौज मारते हैं
01:43हम कहते हमारा तेवार आया
01:45और सोचो ये
01:47करोणों
01:48बेजुबान छोटे प्राणी
01:50इनके लिए क्या आया
01:51हमारे लिए मौज आई
01:52इनके लिए मौत आई
01:54आप से निवेधन करता हूँ
01:56आपकी मौज किसी की मौत मा बने
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