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Transcript
00:00पेगंबर अबराहिन थे, उनको सपना आया और उनको कहा गया कि अपने बेटे की स्माइल की कुर्बानी दे तो अपने
00:07बेटे के लेकर गए कुर्बानी देने, बस कुर्बानी देने वाले थे कि तभी फरिष्टा आ गया, फरिष्टे ने कहा कि
00:12तुमने जो ये भाव और ये
00:35सींग थे वो कहीं जाड़ी में फस गए थे तो फिर बच्चे की जागे उस भेड़ की कुरवानी दे दी
00:43गई
00:43जो बस खाने पीने भोगने सेक्स करने सोने में अपना मस्त रहता है आप बहतर हो सकें उसके रास्ते में
00:51सबसे बड़ी बाधा आपके भीतर का जानवर है यह जो भीतर का जानवर है इसकी कुरवानी देनी होती है बाहर
00:58वाले जानवर की कुरवानी दे कर कि क्या मिल जाएगा
01:01पागलपन है बाहर जानवर को मार देना, पागलपन है कुरूरता है, अमानवी है
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