00:02यमुना नदी के किनारे एक गाउँ था रतनपूर। उस गाउँ में एक चुडैल का साया था। वो चुडैल बहुत ही
00:10अजीब थी। एक दिन।
00:30मुन्या क्या हुआ बेटा। उससे क्या पूश रहे हैं। बेचारी तब इससे डरी सही भी हुई है। लेकिन ये तो
00:40कोई गंबेर बिमारी लगती है।
00:42हाँ, देखो तो बेचारी की चुटिया ही काट ले किसी ने। राम राम। लेकिन एक भी बाला असपास नहीं दिख
00:54रहा।
00:56हाँ, ये हुआ क्या समझ में ही नहीं आ रहा। ऐसे ही दो-चार दिन मुन्या को देखने और सांत्वना
01:05देने वाले भी आये। अब कुछ शांती हुई ही थी कि एक दिन।
01:14क्या हुआ रामू, तो हस क्यों रहा है। अरे गागा, वो के बच्चे कुछ बता भी। रूपा गागी की चुटिया
01:30गट गई।
01:31है, हाँ, और मुन्य भी। अच्छा, पर का है, आप भी पुझला। चल कर देखता हूँ, का हुआ मुन्य, ये
01:49का हला मचा हुआ है।
01:51तबी मुन्य बाहर आती है। ये का, का सुन रहा हूँ, कैसे हुआ सब।
02:00अरे का, बताएं चच्छा, रात में रोज की तरह खापी के सोए, और सुबर देखे तो।
02:10अरे राम राम, पहले तो मुझे लगा कोई बिमारी है, लेकिन ये तो लगता है, पक्का किसी डायन या चुडैल
02:21का काम है।
02:23अब तो रतनपूर में ये औरतों के चूटी काटे जाने वाली खबरें आम होगे। अगले ही दिन।
02:32सरिता, आज बहुत गर्मी है, मेरा बिस्तर बाहर लगा देना।
02:37जी, ठीक है।
02:40सरिता ने रमेश का बिस्तर बाहर और अपना और चुनिया का आंगन में लगा लिया।
02:46रात में रमेश को प्यास लगती है।
02:49बड़ी प्यास लगी है, लगता है सरीता ने पानी नहीं रखा
02:56कोई नहीं, खुद ही ले लेता हूँ
02:59अंदर जाने पर वो देखता है कि सरीता के बिस्तर के सिरहाने चुडेहल खड़ी है
03:05वो एक हाथ से सरीता की चोटी पकड़े हुए है
03:08और चाको से उसकी चोटी काट रही है, वो सोर से चिलाया
03:15चुडेहल, बचाओ, बचाओ, चुडेहल
03:20सरीता और चुन्या उठ गए, गाम वाली भी फौनन आ गए
03:24देखते हैं, चुडेहल हाथ में सरीता की चोटी लिए खड़ी है
03:28भीड देखकर वो हस्ते हुए बुली
03:49सरीता तो डर के मारे बेहोश हो गए
03:53पर बाल तो जाही चुके थे
03:56अरे आखिर चाहती क्या हो
03:58पर चुडेहल उनकी बात अनसुनी करके
04:02सरीता की चोटी घुमाते हुए
04:04सबकी आगों के सामने गायब हो गई
04:07चोटी वाली चुडेहल की ख़बर
04:09जंगल की आग की तरब पूरे गाउं में फैल गई
04:12और गाउं में बाते चलने लगी
04:17मुनवा सुना है कल तेरी भाबी की भी चोटी चुडेहल ले गई
04:22हाँ हाँ उन्ही के घर मिलने जा रहा हूँ
04:26वैसे तो ठीकी रहा
04:27कम से कम अब सर पर पल्लू तो ठीकेगा
04:32ये बात सही गई आपने
04:35इतना कहके दोनों वहाँ से चले गए
04:37इसी तरह चुडेहल का डर सारे गाउं में बढ़ता गया
04:42और लोग घर छोड़कर वहाँ से जाने लगे
04:46तभी कुछ गाउं की लोग आपस में बात करने लगे
04:49क्यों ना सर्पंची के बात चले
04:52हाँ सर्पंची ने दुनिया देखी है
04:56कोई ना कोई उपाई ढूंडी निकालेंगे
04:58हाँ चलो
05:00और सभी गाउं वाली सर्पंची के घर पहुँच गए
05:04समस्या सुनकर सर्पंच ने कहा
05:09समस्या तो सच में गंभीर है
05:11मेरी अम्मा की भी
05:14हैं आपके यहां भी
05:17हाँ अब क्या करें चुडैल पर किसी का वश है क्या
05:22कोई तो उपाई होगा सर्पंची
05:26इसके लिए किसी उजहा से मिलकर बात करनी होगी
05:32तभी मदन बोलता है
05:36अगर हमें अपने गाउ से इस चुडैल का साया हटारा है
05:39तो हमें उसकी चोटी काटनी पड़ेगी
05:42मेरी नानी ने मुझे बताया था कि हर चुडैल की शक्ती उसकी चोटी में होती है
05:47अगर हम किसी तरह उसकी चोटी काटने में सफल हो गए
05:51तो उससे अपना गाउ छुटकारा पा जाएगा
05:54बताओ कौन जाएगा चुडैल के पास
05:57मैं उसे बताओंगा कि क्या करना है
06:00अरे मदन भाईया हम मुख्याजी के पास आएँ हैं मदन मागने
06:05कोई ही जाएंगे
06:08अरे ऐसे कैसे मैं गया तो गाउं कौन समालेगा
06:12इस रामु को भेज देते हैं
06:14अरे ओ मुख्या पगला गया है क्या
06:17भरी जवानी में मौत के मुँ में चला जाओं
06:20तुम सब छोड़ो
06:21मैं चला जाओंगा
06:23देखो वो चुडैल अपना काम तभी करती है
06:26जब कोई सो रहा हो
06:27आज तक कोई जगा हुआ इंसान
06:29उसका शिकार नहीं हुआ
06:31है ना
06:31हाँ सो तो है
06:33तो आज रात सभी को जागते रहना है
06:36सिर्फ मैं सोने का नाटक करूँगा
06:39हाँ हाँ ठीक है
06:41फिर मदन नकली चोटी लगा कर
06:44और साड़ी पहन कर
06:46पंचायत की चबुत्रे पर ही सो गया
06:48रात की बारा बजे चुडैल वहाँ आई
06:52हाँ हाँ
06:54आज पुरे गाह में घुमाई
06:57कोई सोया ही नहीं
07:01तभी उसकी नजर चौक पर सोय मदन पर पड़ी
07:04ये औरत यहाँ क्यों सोई है
07:07लगता है घर में जगडा हुआ होगा
07:10खैर मुझे क्या
07:12मुझे तो बाल चाहिए
07:16चुडैल ने चोटी काटने के लिए
07:18जैसे ही चोटी पकड़ी
07:19वो निकल कर उसके हाथ में आ गई
07:22इसके लिए वो तयार नहीं थी
07:24इसलिए दो पल के लिए
07:26वो कभी चोटी तो कभी चाको को देखने लगी
07:29इसी समय का फाइदा उठा कर
07:31मदन ने उसकी चोटी काट ली
07:33पहले तो वो डर गई
07:34फिर भी हिम्मत करके बोली
07:36कौन है तू
07:42बता कौन है तू
07:43मैं तो मैं तुझे खा जाओंगी
07:46तेरी चोटी मेरे पास है
07:48तू मेरा कुछ नहीं बगाड सकती
07:52मदन उसकी चोटी दिखाती हुए हसता है
07:55मेरी चोटी देदे
07:56दे मेरी चोटी
07:58इसे मेरे चोटी दे दे
08:00जीकते हुए मदन की तरफ बढ़ी
08:04अहां
08:04अगर एक कदम ये आगे बढ़ाया
08:07तो मैं अभी इसे जला दूँगा
08:08नहीं नहीं ऐसा बत करना
08:12नहीं करूँगा
08:14पर एक शर्फ पर
08:16मुझे तुवारे सब शर्फे बशुर है
08:19बस ये चोटी दे दो
08:21अभी नहीं, पहले ये बताओ
08:24तुम इन बालों का क्या करती हो
08:26मैं इने, एक कुवे में डाल रही हूँ
08:29उसे भरने के लिए
08:30वो क्यों?
08:33जब वो कुवा भर जाएगा
08:34तुम्हें सबसे शक्तिशाली हो जाऊंगी
08:37चलो, वो कुवा मुझे दिखाओ
08:40वहीं तुम्हें तुम्हारी चोटी दे दूगा
08:43चलो, ये चोटी मुझे दे दो
08:45इसकी मदद से हम चल्दी पाचेंगे
08:48नहीं, नहीं, मुझे जल्दी नहीं
08:50पैदल ही चलते हैं
08:53वो मदद को लेकर चलने लगी
08:55और गाउंवाली भी
08:57जल्दी हुई मशाले लेकर
08:58उसके पीछे पीछे आ गए
09:00सब उसकी गुफा तक पहुँच गए
09:02जहां कुवे के अंदर
09:04उसने बाल जमा कर रखे थे
09:07हम्म्ह, आधा कुवा तो भर गया है
09:10देखो, देखा दिया ना
09:12अब चल्दी से मेरी चोटी दे दो
09:15हाँ, क्यों नहीं
09:16ये लो
09:18कहते हुए मदन ने
09:19उसकी चोटी भी कुवे में फेक दी
09:23अरे बेवकूफ
09:24ये क्या किया
09:25अब मैं इतने बालों में से अपनी चोटी कैसे डूढ़नूंगी
09:29वो देखो, बीच में पड़ी है
09:31चुडेल कुवे में जाकर अपनी चोटी डूढ़ने लगी
09:35उसके कुवे में उतरते ही
09:37गाउवालों ने अपनी अपनी मशाले कुवे में फेक दी
09:40वो दूदू करके जलने लगा
09:42अरे बचाओ रे कुई
09:44मैं सब के बाल वापस कर दूँगी बचाओ
09:49साथ ही वो चुडेल भी जल कर भस्म हो गई
09:52शिक्षा अगर मिल जुल कर किसी समस्या का हल ढूंडा जाए
09:56तो समस्या अवश्यदूर हो जाती है
09:59दोस्तों हमें उमीद है कि आपको हमारी ये कहानी पसंद आयोगी
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10:09और हाँ वीडियो लाइक और शेर करना मत भूलेगा
10:13बाई बाई
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