00:03दोस्तों जैसे जैसे एत करीब आती है एक सवाल हर घर में पूछा जाता है जगात क्यों दी जाती है
00:08क्या इसे एत से पहले देना जरूरी है और किन लोगों पर जगात फर्ज होती है आज हम इस पूरे
00:13मसले को डीटेल में समझेंगे ताकि कोई कन्फियूज ना हो
00:15जगात इसलाम के पांच बुनियादी फर्जों में से एक है नमाज, रोजा, हज और कलिमा कितना ही ये भी बहुत
00:22जरूरी अबादत है जगात का मतलब होता है पाक करना या साफ करना या अपने माल को पाक करना और
00:28उसमें से गरीबों का हक अदा करना याद रखें जो माल हम कम
00:32आते हैं उसमें गरीबों का भी हिस्सा होता है एद से पहले जगात क्यों दी जाती है असल में जगात
00:38देने का कोई फिक्स एद डेट नहीं है लेकिन फिर भी लोग इसे एद से पहले क्यों देते हैं ताकि
00:43गरीब और जरूरत बन लोग भी नए कपड़े, खाना और खुश
01:01चलिए उप सबसे जरूरी सवाल कि जगात कब देने चाहिए जगात साल में एक बार फर्ज होती है जब आपका
01:07माल एक पूरा इसलामिक साल यानि हाल पूरा कर ले ये ज़रूरी नहीं कि आप सिर्फ रमजान में ही दें
01:12लेकिन रमजान में देना बेहतर माना जाता है आप �
01:15तो थोड़ा थोड़ा करके भी दे सकते हैं, या एक साथ पूरा भी दे सकते हैं, زकात हर इनसान पर
01:20फर्ज नहीं होती हैं, जिनके पास निसाप से जादा माल हो, निसाप क्या हैं? दरसल यह एक तैसीमा होती है,
01:27लगबग 87.5 ग्राम सोना, या लगबग 612 ग्राम चांदी, य
01:34अगर आपके पास इस से जाधा माल है और वो एक साल तक आपके पास रहता हैं तो आप पर
01:39जखात फर्द हो जाती हैं।
01:41जखात आपको 0,5% देनी होती है।
01:56अब सवाल आता है जकात किन लोगों पर फर्ज है जकात उन मुसल्मानों पर फर्ज है जिनके पास निसाब से
02:01ज़्यादा माल हो जो बालिक और समझधार हो जिनका माल एक साल तक उनके पास रहे जो कर्ज में पूरी
02:06तरह डूबे ना हो
02:07अब सवाल है जकात किसको दी जा सकती है खरीब और जरुटमंद अनात विद्वा कर्ज में फसे लोग मुसाफिर यानी
02:16जरुरुतमंद यातरी धियान रखें जकात अपने माता पिता बच्चों या पत्नी पती को नहीं दी जाती अमीर लोगों को भी
02:23नहीं दी जाती आम गलत
02:37है ये समाज में बराबरी लहने का तरीका है ये अमीर और गरीब के बीच दूरे ये दिल को नरम
02:42और इनसान को बहतर बनाती है
02:44आगर हर इनसान हैं मांदारी से लखात दे तो समाज में कोई भूपा नहीं रहेगा
02:48इसलिए इस एद सिर्फ अपने लिए नहीं दूसरों की खुशियों के लिए भी सोचिए
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