00:03रम्जान का महीना मुसल्मानों के लिए रह्मत बरकत और माफी का महीना माना जाता है लेकिन इसी रम्जान में एक
00:08ऐसी रात भी आती है जिसे इसलाम में साल की सबसे पाक और सबसे एहम रात कहा गया है
00:13इस मुबारक रात को ललतुलकद्र यानी शब अकद्र कहा जाता है
00:16कुरान में बताया गया है कि ये रात हजार महीनों से बहतर है
00:19यानी अगर कोई इनसान इस रात में सचे दिल से अबादत करता है
00:23तो उसे लगभग 83 साल से ज़्यादा की अबादत के बराबर सवाब मिल सकता है
00:27इसी वज़े से मुसल्मान इस रात को जाकर नमास पढ़ते हैं
00:30कुरान की तिलावत करते हैं और अल्ला से दुआ मांगते हैं
00:33लेकिन बहुत से लोगों के मन में ये सवाल होता है कि
00:35शब कदर की रात क्या पढ़ना चाहिए
00:37और 27 वी रात को इतना खास क्यों माना जाता है
00:40चलिए इस वीडियो में हम आपको बताते है
00:42शब कदर की रात में सबसे ज़्यादा अबादत करने की सलह दी जाती है
00:45इस रात इनसان को زیادہ से ज़ inspections को याद करना चाहिए
01:03इसलिए मुसलिये इस रात ज्याद से ज्यादा कुरान पढ़ने की कोशिश करते हैं
01:07अगर पूरा कुरान पढ़ना संभव न हो तो चोटी चोटी सुरह भी पढ़ी जा सकती है
01:11जिसने सुर एकलास सुरह फलक सुरह नास
01:13इन सूरह को बार बार पढ़ना भी बहुत सवाब का काम माना जाता है
01:17शब खदुर की सबसे मशूर दूआ ये है
01:23इसका मतलब है एल्ला तु माफ करने वाला है और माफी को पसंद करता है
01:27इसलिए मुझे माफ कर दे
01:29इसलिए इस राद बार बार ये दूआ पढ़ना बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत
01:37बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बह
01:58नेक काम माना जाता है
01:59अगर कोई इन्सान इस रात जरूरत मन्दों को खाना किला है
02:02दान करे या किसी की मदद करे
02:04तो उसका सबाब बहुत जादा माना जाता है
02:06अब सवाल ये है कि शब खदर की 27 वी रात
02:08को इतना खास क्यों माना जाता है
02:10असल में इसलाम में शब कदर की सही तारीख तै नहीं बताई गई है।
02:14हदीथों के मताबिक ये रमजान के आखरे दस दिनों की ताक यानी और रातों में होती है।
02:1920-23-25-27-29 इनमें से किसी भी रात शब कदर हो सकती है।
02:25कई इसलामी विद्वानों और परमप्राओं में ये माना जाता है कि 27 मी रात में शब कदर होने की संभावना
02:30ज्यादा है।
02:31इसी वज़े से दुनिया भर में बहुत से मुसल्मान इस रात को खास तोर पर अबादत करते हैं।
02:35इस रात मजजिदों में भीर जादा होती है और लोग पूरी रात नमास, दिलावत और दुआ में बिताते हैं।
02:40तो शब कदर की रात का असली मकसद यही है कि इनसान अपने गुनाहों से तौबा करे, अल्ला से माफी
02:45मांगे और अपनी जिन्दगी को बहतर बनाने की कोशिश करे क्योंकि इस रात की इबादत को इसलाम में हजार महीनों
02:50से बहतर बताया गया है।
02:51फिलाल इस वीडियो में इतना है, अगर आपको यह जानकार यह पसंदा आई हो तो इसे लाइक करें, शेयर करें
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