00:06अखिल भारति आयरोवेग्ञान संस्थान यानिकी एम्स के एक नई स्टडी में सामने आया है कि एक साल से कम उम्र
00:13के बच्चों में जादा स्क्रीन टाइम से तीन साल की उम्र तक आटिजम स्पेक्ट्रूम डिसॉडर का खत्रा तेजी से बढ़
00:19रहा है
00:19डॉक्टर्स की माने तो बच्चों की कम उम्र में स्क्रीन के अधिक संपर्क में आने से बच्चों के दमाग के
00:25विकास और सामाजिक व्यवहार पर नेगेटिव इंपक्ट पड़ रहा है
00:29स्वास्त मंत्राले भी बच्चों के स्क्रीन टाइम को कम करने को लेकर गाइडलाइन जारी कर चुका है
00:34एम्स के बालरोग विभाक की प्रोफेसर डॉक्टर शेफाली गुलाटी ने बताया कि कई रिसर्च और मेटा एनलेसिस में देखा गया
00:41जो बच्चों में जो पूरवन स्टडीज है एक साल की उमर में जिनका स्क्रीन टाइम जादा था उनको तीन साल
00:48की एज में लड़कों में आउटिजम जादा प्रेविलेंट पाये गया है और लड़कियों में भी आउटिजम के सिम्टम जादा बाये
00:55गया है
00:55जिन बच्चों का स्क्रीन टाइम जल्दी शुरू होता है और स्क्रीन टाइम जादा होता है उनमें आॉटिजम के लक्षन जादा
01:01देखे जाते हैं
01:02बच्चे जिनकी उमर एक साल है और उनका स्क्रीन टाइम ज्यादा है ऐसे में बच्चों में खासतोर से तीन साल
01:08तक के लड़के में आॉटिजम के मामले ज्यादा पाए गए
01:11लड़कें में भी आॉटिजम के कुछ लखशन देखे जाते हैं
01:14स्टेडी से पता चलता है कि जितनी जल्दी और जितनी जादा देर के लिए आपके बच्चे को स्क्रीन टाइम दिया
01:20गया, उन बच्चों में आटिजम के साथ कनेक्शन जादा पाये गया।
01:23इसलिए खास है कि स्क्रीन टाइम बिल्कुल कम कर दे।
01:26एक्सपर्ट की माने तो 18 महीने से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से पूरी तरह से दूर रखना जरूरी
01:31है।
01:3218 महीने से 6 साल के बच्चों के लिए सीमित और एक्टिव स्क्रीन टाइम की सला दी जाती है।
01:37वहीं जब बच्चा साथ साल से जादा हो जाए तो स्क्रीन टाइम को बढ़ा कर दो घंटे तक सीमित किया
01:43जा सकता है
01:43इसके साथ ही माता पिता को बच्चों की एक्टिविटी पर भी नजर रखना होगा
01:48बच्चे क्या देख रहे हैं ये आपको पता होना चाहिए
01:50बच्चों को वही दिखाएं जो उनके लिए सही है
01:53बहतर होगा हम बच्चे से बाते करें जतना जादा आप बच्चे से बात करेंगे बच्चे का विकास बहतर होगा
01:59कमिनिकेशन बच्चों के डेवलपमेंट के लिए बहुत जादा जरूरी है
02:03आपको बता दें कि बच्चों के विवहार, कमिनिकेशन और सामाजिक संपर्क में अंतर देखा जा रहा है
02:09कई बार 12-18 महीने में भी बच्चों में इसके संके देखे जाते हैं
02:14अब सवाल ही उड़ता है कि आप कैसे समझें कि आपका बच्चा भी ऑटिजम का शकार हो रहा है
02:19इसके कई लक्षन आपको अपने बच्चे में देखने को मलेंगे
02:22हास करके डेर साल से लेकर तीन साल की उम्र में
02:25बच्चा नाम सुन कर जब जवाब न देख लोगों से कम घुले मिले या फिर चड़चड़ा हो जाए
02:30आई कॉन्टैक्ट नहीं करना एक ही शब्द को बार बार बोलना या फिर बोलना देरी से शुरू करना
02:36कई बार इन्हें अकेला रहना पसंद आता है, हाथ फ्लैप करते हैं, एक ही चीज को बार बार करते हैं,
02:41रुटीन बदलने पर बहुत परशान हो जाते हैं
02:44तेज आवाज से डरते हैं, कुछ टेक्स्चिर्स या खाने से परशानी होती है, लाइट या साउंड पर अन्यूज्वल रियाक्शन देते
02:50हैं
02:50कैसे पता चले कि डॉक्टर को दिखाना कब है, अगर बच्चा 12 महीने तक पॉइंटिंग या जेश्चर ना करें, 18
02:56महीने तक मीनिंग्फुल वर्ड्स ना बोलें, 2 साल तक सिंपल सेंटेंसे ना बोल पाई, हाई कॉन्टाक्ट बहुत कम करें, तो
03:03पेडियाट्रीशन या �
03:04चाइल साइकलोजिस्ट या डेवलपमेंटल स्पेशलिस्स से मिलना ज़रूरी है, क्या ओटिजम ठीक हो सकता है? ओटिजम कोई बीमारी नहीं है,
03:12जसे एक गोली से पूरी तरह खत्म कर दिया जाए, लेकिन अरली थेरपी और ट्रेनिंग से बच्चे में बहुत इंप्रू
03:34एक्टिविटी, एंग्जाइटी, स्लीप रॉबलम के लिए भी डॉक्टर्स दवाई देते हैं, ध्यान रहे, अगर आपका बच्चा एक से छे साल
03:41तक की उम्र का है, तो उसका स्क्रीन टाइम हास करके मोबाईल टाबलेट्स का इस्तमाल बिलकुल बंद कर दें, अगर
03:48वो
03:48इस्तमाल कर भी रहा है, स्क्रोल कर रहा है, पूरे दिन बैटकर रील देखता रहता है, या फिर फोन छीनने
03:54पर वो रोना, चड़चड़ापन और परिशान नजर आता है, तो उसका अडिक्शन बढ़ रहा है, इसे आज ही कंट्रोल करना
04:01जरूरी है, वरना आपके बच्च
04:18खेलें, अपने और बच्चे के साथ प्लेटाइम को बढ़ाएं, स्क्रीन से दूरी और सुरक्षा बहुत जरूरी
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