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Shab E Qadr 2026: रमज़ान का महीना मुसलमानों के लिए इबादत, सब्र और रहमतों का महीना माना जाता है।
लेकिन इसी रमज़ान में एक ऐसी रात भी आती है जिसे इस्लाम में पूरी साल की सबसे पवित्र और सबसे अहम रात कहा गया है।

इस मुबारक रात को Laylat al-Qadr, यानी शबे क़द्र कहा जाता है।




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~PR.115~HT.408~ED.464~

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00:03रमजान का महीना मुसल्मानों के लिए अबादत, सब्र और रहमतों का महीना माना जाता है लेकिन इसी रमजान में एक
00:08ऐसी रात भी आती है जिसे इसलाम में पूरी साल की सबसे पाक और सबसे एहम रात कहा गया है
00:14इस मुबारक रात को ललत अलकदर यानि शब कदर कहा जाता है कुरान में बताया गया है कि ये रात
00:19हजार महीनों से भी बहतर है यानि अगर कोई इनसान इस एक रात में दिल से अबादत करता है तो
00:24उसे लगभग 83 साल की अबादत के बराबर सबाब मिल सकता है लेकिन आखिर �
00:29शब कदर क्या है और साल 2026 में ये कब मनाई जाएगी आईए इस वीडियो में जानते हैं शब कदर
00:34का मतलब क्या होता है शब कदर दो शब्दों से मिलकर बना है शब यानी रात गदर यानि इस तकदर
00:41का मतलब होता है महनता और
00:44तकदीर की रात इसलामी मानिता के मुताबिक इस रात में इनसानों की तकदीर के कई फैसले लिखे जाते हैं इसी
00:51वज़ा से इसे फैसलों और रहमतों की रात भी कहा जाता है इस रात का सबसे बड़ा महत्व इस बात
00:56से जुड़ा है कि इसी रात इसलाम की पाक किताब कुरान
00:59का पहला हिस्सा नाजिल हुआ था
01:01इसलामी इतिहास के मताबिक पेगंबर
01:03प्रॉफिट मुहम्मद अक्सर मक्का
01:05के पास मौजूद हीरा केव में जाकर
01:07इबादत किया करते थे एक रात जब वो
01:09इबादत में थे तब अल्ला के फरिष्ट
01:11जिबरील उनके पास आए
01:13फरिष्ट जिबरील ने अल्ला का पहला
01:15पेगाम सुनाया और कुरान की पहली
01:17आयते नाजल हुए ये वही इतिहासिक पल था
01:19जिससे इसलाम में पेगंबरी का
01:21सलसला शुरू हुआ इसलिए ये रात पूरी
01:41तरह अबादत में बिताने की कोशिश करते हैं
01:43शब अकदर की कोई एक तारीख तै नहीं होती
01:45इसलामिक मानिताओं के मताबिक
01:47ये रमजान के आखरी दस दिनों की
01:49ताक रातों में आती है
01:50जैसे 21, 23, 25, 27 और 29 रात
01:55इनमें से 27 रात को सबसे एहम माना जाता है
01:57और दुनिया भर के बहुत से मुसल्मान
01:59इसी रात को शब अकदर के तोर पर मनाते हैं
02:01साल 2026 में शब अकदर 16 मार्च को उपड़ रही है
02:04इस रात को इसलाम में रहमत और माफी की रात माना जाता है
02:07मानिता है कि अल्हा बंदों की दुआएं को बूल करता है
02:10गुनाहों को माफ किया जाता है
02:11इनसानों के तकदीर के फैसले लिखे जाते हैं
02:14फरिष्टे जमीन पर उतरते हैं
02:15इस वज़ा से मुसल्मान पूरी रात जाकर अबादत करते हैं
02:18इस रात मुसल्मान कई तरह की अबादत करते हैं
02:21जैसे नफल नमास पढ़ना
02:22कुरान की तिलावत करना, तौबा और अस्तखफार करना, अल्ला से दूआ मंगना, गरीबों और जरुवतमंदों को दान देना, रमजान के
02:28आखरी दस दिनों में बहुत से लोग इतिकाव भी करते हैं, इसमें लोग मस्जिद में रहकर पूरी तरह अबादत में
02:34लग जाते है
02:35शब्यकदर का सबसे बड़ा संदेश यही है कि इनसान अपने गुनाहों से तौबा करे और अपनी जिन्देगी को बहतर बनाने
02:40की कोशिश करे
02:41फिलाल इस वीडियो में इतना ही, अगर आपको यह जानकारी पसंदाई हो तो इस वीडियो को लाइक करें और चैनल
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