00:03रमजान का महीना मुसल्मानों के लिए अबादत, सब्र और रहमतों का महीना माना जाता है लेकिन इसी रमजान में एक
00:08ऐसी रात भी आती है जिसे इसलाम में पूरी साल की सबसे पाक और सबसे एहम रात कहा गया है
00:14इस मुबारक रात को ललत अलकदर यानि शब कदर कहा जाता है कुरान में बताया गया है कि ये रात
00:19हजार महीनों से भी बहतर है यानि अगर कोई इनसान इस एक रात में दिल से अबादत करता है तो
00:24उसे लगभग 83 साल की अबादत के बराबर सबाब मिल सकता है लेकिन आखिर �
00:29शब कदर क्या है और साल 2026 में ये कब मनाई जाएगी आईए इस वीडियो में जानते हैं शब कदर
00:34का मतलब क्या होता है शब कदर दो शब्दों से मिलकर बना है शब यानी रात गदर यानि इस तकदर
00:41का मतलब होता है महनता और
00:44तकदीर की रात इसलामी मानिता के मुताबिक इस रात में इनसानों की तकदीर के कई फैसले लिखे जाते हैं इसी
00:51वज़ा से इसे फैसलों और रहमतों की रात भी कहा जाता है इस रात का सबसे बड़ा महत्व इस बात
00:56से जुड़ा है कि इसी रात इसलाम की पाक किताब कुरान
00:59का पहला हिस्सा नाजिल हुआ था
01:01इसलामी इतिहास के मताबिक पेगंबर
01:03प्रॉफिट मुहम्मद अक्सर मक्का
01:05के पास मौजूद हीरा केव में जाकर
01:07इबादत किया करते थे एक रात जब वो
01:09इबादत में थे तब अल्ला के फरिष्ट
01:11जिबरील उनके पास आए
01:13फरिष्ट जिबरील ने अल्ला का पहला
01:15पेगाम सुनाया और कुरान की पहली
01:17आयते नाजल हुए ये वही इतिहासिक पल था
01:19जिससे इसलाम में पेगंबरी का
01:21सलसला शुरू हुआ इसलिए ये रात पूरी
01:41तरह अबादत में बिताने की कोशिश करते हैं
01:43शब अकदर की कोई एक तारीख तै नहीं होती
01:45इसलामिक मानिताओं के मताबिक
01:47ये रमजान के आखरी दस दिनों की
01:49ताक रातों में आती है
01:50जैसे 21, 23, 25, 27 और 29 रात
01:55इनमें से 27 रात को सबसे एहम माना जाता है
01:57और दुनिया भर के बहुत से मुसल्मान
01:59इसी रात को शब अकदर के तोर पर मनाते हैं
02:01साल 2026 में शब अकदर 16 मार्च को उपड़ रही है
02:04इस रात को इसलाम में रहमत और माफी की रात माना जाता है
02:07मानिता है कि अल्हा बंदों की दुआएं को बूल करता है
02:10गुनाहों को माफ किया जाता है
02:11इनसानों के तकदीर के फैसले लिखे जाते हैं
02:14फरिष्टे जमीन पर उतरते हैं
02:15इस वज़ा से मुसल्मान पूरी रात जाकर अबादत करते हैं
02:18इस रात मुसल्मान कई तरह की अबादत करते हैं
02:21जैसे नफल नमास पढ़ना
02:22कुरान की तिलावत करना, तौबा और अस्तखफार करना, अल्ला से दूआ मंगना, गरीबों और जरुवतमंदों को दान देना, रमजान के
02:28आखरी दस दिनों में बहुत से लोग इतिकाव भी करते हैं, इसमें लोग मस्जिद में रहकर पूरी तरह अबादत में
02:34लग जाते है
02:35शब्यकदर का सबसे बड़ा संदेश यही है कि इनसान अपने गुनाहों से तौबा करे और अपनी जिन्देगी को बहतर बनाने
02:40की कोशिश करे
02:41फिलाल इस वीडियो में इतना ही, अगर आपको यह जानकारी पसंदाई हो तो इस वीडियो को लाइक करें और चैनल
02:46को सब्सक्राइब करना बिलकुल न भूलें
Comments