00:04जब से इसरयाइल और एरान के बीच वार शुरू हुआ है तब से काफी लोगों के मन में सवाल होगा
00:09कि आखिर यहूदी कौन होते हैं और ये किस खुदा को मानते हैं
00:13और इनका अबादत करने का तरीका क्या है, क्या ये भी नमाते हैं और अगर परते हैं तो किस तरह
00:18से
00:19चलिए आपको सब कुछ इस वीडियो में बताते हैं
00:21दरसल पूरी दुनिया में यहुदी सिर्फ 0.2% हैं
00:25और ज्यादतर यहुदी इसराइल में ही बसते हैं
00:27यहुदी और मुसल्मानों के बीच इसराइल को लेकर सदियों से कॉंट्रोवर्सी होती आई है
00:32यहुदी मुसल्मानों की तरह एक खुदा में यकीन रखते हैं
00:35इसाई और यहुदी दोनों की ही जड़ें इसलाम से जुड़ी हुई हैं
00:38यहुदी धर्म को जानने के लिए आपको इसलामे के तिहास में पीछे जाना होगा
00:42इसलाम में मानेता है कि चार किताबे अलग-अलग पेगंबरों यानि मैसेंजर्स पर उतारी गई थी
00:48ताकि वो समाच को जोड़ सके और भटके हुए लोगों को सही रह पर चला सके
00:52इन तीन किताबों के नाम इंजील, तौरा, जुबूर और पुरान है
00:57यहुदी धर्म को मानने वाले तौरा किताब को मानते है और उसी के मताबिक अपने जिन्दगी बिताते हैं
01:03उनका मानना है कि ये किताब मोंसे सियनी हजरत मूसा अले सलाम पर उतारी गई थी
01:08वहीं मुसल्मान कुरान को आखरी और सबसे सही किताब का दर्जा देते हैं
01:12उनका मानना है कि पैगंबर मुहम्मद साहब के आने के बाद
01:15इंजील, तौरा और जुबूर को रद कर दिया गया था
01:19क्योंकि उन किताबों में लोगों के जरीए फिर बदल किया गया था
01:22दोनों धर्मों के बारे में जाने के लिए आपको अबरहीम यानि इबरहीम आले स्लाम के फैमली ट्री को जानना होगा
01:29इबरहीम आले स्लाम को इसलाम में प्रिखंबर माना गया और यही इसराईलियों और अर्बों के पूरवज माने जाते हैं
01:35यहुदी इबरहीम को खुदा और यहुदियों के बीच खास रिष्टा कायम करने वाला फाउंडिंग फादर बताते हैं।
02:05जिसे यहुदी अपना सक्से बड़ा टेंपल मानते हैं। इस जगा को मुसल्मान भी पवितर दर्जा देते हैं।
02:35और तलमत को मानते हैं। यह किताबें हिबरु में लिखी गई हैं।
02:47यहुदीयों का मानना है कि इस शहर को तीन हजार साल पहले किंग डेविड ने बसाया था।
03:08किंग डेविड को मुसल्मान परगंबर मानते हैं। अब चलिए आपको बताते हैं कि आखिर यहुदी कैसे अबादत करते हैं।
03:14इसलाम से जुड़ी मानताओं के मताबिक एक वक्त पर यहुदी कौम अल्लह की सबसे पसंदीदा कौमों में से एक हुआ
03:20करती थी।
03:21इस कौम के हिदायत के लिए अल्लह ने 48 अंबिया किराम को इनके बीच बेजा था।
03:25लेकिन यहुदी धर्म की निजबत यानि तालुक खास तोर पर प्रगंबर हजरत मूसा अलह से माना जाता है।
03:31क्योंकि इनका नसली तालुक हजरत याकूब अलह से था।
03:35जिनका लकब इसराईल था।
03:36इसी वज़ा से इन्हें यहुदी धर्म के लोगों को बनी इसराईल भी कहा जाता है।
03:40यहुदी धर्म में इबादत कैसे की जाती है आईए जानते हैं।
03:44जहां इसलाम धर्में दिन में पांच वक्त नमाज अदा की जाती है।
03:47जब कोई यहुदी धर्म में रोज की तीन अबादत मुकरर की गई हैं।
03:50जब कोई यहुदी अबादत करने के नियत कर लेता है तो उस नियत के बाद में तमाम इबादते उस पर
04:11वाजिब हो जाती हैं।
04:12जिस तरह मुसल्मान मस्जद में नमास परते हैं उसी तरह यहुदी धर्म के लोगों के लिए खबाद हाउज बेहद खास
04:18होता है।
04:18इसी जगा यहुदी अपनी प्राथना करते हैं।
04:21इसके लाबा यहुदी धर्म में तमाम इबादत अपने तौर पर यानि अकेले भी अधा की जा सकती हैं।
04:29यहुदी धर्म का मानना है कि सबी लोगों के साथ इबादत करने की ज्यादा फजीलत है।
04:33यहुदी धर्म की जमात को पूरा होने के लिए इन्हें कम से कम दस लोगों की जरूत होती हैं।
04:38अगर कम से कम दस लोग एक साथ नहीं इखटा होते तो फिर ये लोग अपनी अलग-अलग अबादत करते
04:43हैं।
04:44यहुदी अपनी प्रात्ना करते हैं यरुशलम की और मुह करते हैं जो यहुदी धर्म में सबसे पवितर जगा है।
04:50यहुदी लोग प्रात्ना करते वक्त अपने सिर पर किप्पा जरूर पहनते हैं।
04:54किपपा उस खास टोपी को कहते हैं जो हर यहूदी खास मौके पर पहनता है।
04:58दरसल यहूदी धर्म में माना जाता है कि अबादत करते वक्त या कोई भी धार में काम करते वक्त अपना
05:03सिर किपपा से जरूर ढखना चाहिए।
05:05अलागि ऐसा इसलाम में भी देखा जाता है
05:08इसलाम धर्म में भी नमास परते वक्त टोपी पहनना जरूरी है
05:11ये तो आप जानते होंगे कि मुसल्मान नमास पढ़ने से पहले वजू करते हैं
05:16ऐसे ही यहुदी लोग भी मुसल्मानों की तरह जब अपनी प्रात्ना शुरू करते हैं और अपनी अबादत गाह में जाते
05:22हैं
05:22तो ये भी पहले पानी से अपने हाथ दोते हैं
05:25यहुदीयों का ये तरीका मुसल्मानों की वजू से अलग होता है
05:28यहुदी धर्म के लोग इबादत करने से पहले एक लोटे में पानी भरते हैं लेकिन वो मुसल्मानों की तरह ना
05:33ही अपना मूद होते हैं और ना ही अपने पैरों को धोते हैं
05:36बलकि यहुदी लोग अपने लोटे से पानी लेकर अपने हाथ को तीन बार दोते हैं और फिर दूसरे हाथ को
05:41भी तीन बार दोते हैं
05:43यहुदी अबादत के दौरान बुलंद आवाज में अपनी पवित्र किताब तौरात को पढ़ते हैं
05:48साथ ही इस धर्म के लोग अपनी इबादत के दोरान कभी खड़े खड़े जूमने लग जाते हैं, कभी जोर जोर
05:53से तौरात की तिलावत करने लगते हैं, फिर कभी जुखते हैं, तो कभी सजदा करते हैं, इस तरह वो अपनी
05:58प्रातना को पूरा करते हैं
05:59फिलाल इस वीडियो में इतना ही आप क्या कहेंगे
06:01कॉमेंट सेक्शन में में लिख कर जरूर बताएं
06:03वीडियो को लाइक करें शेयर करें
06:04और चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल न भूरें
Comments