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Sheetala Ashtami Kahani 2026: बसोड़ा पूजा का पावन पर्व हर साल चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। इस दिन शीतला माता की पूजा होती है इसलिए इसे शीतला अष्टमी भी कहा जाता है। यहां आप जानेंगे बसौड़ा पर्व क्यों मनाया जाता है इसकी कथा क्या है।
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00:03बसोड़ा पूजा की पूजा होती है धार्मिक पानेताओं के अनुसा बसोड़ा पूजा के दिन मुड़त रखने और विदिविधान से माता
00:16शीतला की पूजा करने से चेचक खस्रा जैसे विमारियों से मुक्ति मिल जाती है
00:20ये तिवहर विशेश रूप से उत्तर भारत में मनाय जाता है
00:24इस सल बसोडा पूचा का ये पर्व 11 मार्च 2026 को मनाय जाएगा
00:29तो वहीं शीतला सब्तमी आज यानी की 10 मार्च को है
00:33ऐसे में चलिए आपको बताते हैं इसे वीडियो में की आखिर बसोडा क्यों मनाय जाता है
00:38बसोडा पर्व की कहानी के अनुसार एक बार शीतला माता ने सोचा की चलो आज देखती हूँ कि धर्ती पर
00:44मेरी पूजा कौन करता है
00:45ये सोचकर शीतला माता राजस्थान के डुगरी गाउं में बहुची और देखा कि इस गाउं में उनका कोई मंदिर नहीं
00:53है और ना ही यहां कोई उनकी पूजा करता है
00:56माता शीतला गाउं की गलियों में घूमी रही थी तब ही किसी ने गलती से उन पर शावल का उबला
01:01पानी फेक दिया
01:02इस तर शीतला माता के शरीर में फफोले पड़ गये और माता का पूरा शरीर जलने लगा
01:07शीतला माता गाउं में इधर उधर भागते हुए चिलाने लगी
01:11अरे मैं जल गई कोई मेरी सहायता करो
01:14लेकिन उस गाउं में शीतला माता की सहायता किसी ने नहीं की
01:18लेकिन महीं पर अपने घर के बाहर एक कुमार महिला बैठी हुई थी
01:23लेकिन जब उस कुमारन के नजर बुड़ी माई पर पड़ी तो उसे ने कहा कि हे मा तु यहां आकर
01:30बैट जा मैं तेरे शरीर के उपर ठंडा पानी डालती हूँ जिससे तुझे आराब मिल जाएगा
01:36कुमारन ने उस बुड़ी माई पर खूप सारा ठंडा पानी डाला और बोली हे मा मेरे घर में रात की
01:43बरी हुई रबड़ी और थोड़ा दही रखा है तु रबड़ी दही खाले इससे भी तुझे आराब मिलेगा
01:49जब बुड़ी माई यानि माता शीदला ने ठंडी जवार के आटे की रबड़ी और दही खाया तो उनके शरीर को
01:57बहुत ठंड़क मिली फिर उस कुमारन ने कहा मा बैट जा तेरे सिर के बाल बहुत बिखरे हैं मैं तेरी
02:04चोटी गूत देती हूँ
02:05कुमारन माई जैसी चोटी गूतने हे तू बालों में कंगा करने लगी तो उसकी नजर बुड़ी माई के सिर के
02:13पीछे पड़ी तो वो आश्यरे में पड़ गई कुमारन ने देखा कि एक आख बालों के अंदर छुपी है ये
02:20देखकर कुमारन डर से घबरा कर भागने लगी
02:22तब ही उस बुड़ी माई ने कहा बेटी तू डर मत मैं कोई भूत परेत नहीं हूँ मैं शीतला माता
02:29हूँ मैं तो इस धर्ती पर ये देखने आई थी कि कौन मुझे पूस्ता है इतना कहकर माता अपने असली
02:35रूप में आ गई
02:36माता के दर्शन पाकर कुमारन सोचने लगी कि अब मैं गरीब इन माता को कहा बिठाओं दी तब माता बोली
02:43हे बेटी तू किस सोच में पढ़ गई है कुमारन ने हाद जोड कर कहा हे मा मेरे घर में
02:49तो चारो तरफ दालिद्रता बिखरी हुई है मुझे समझी नहीं आ रहा क
02:54कि आपको कहां बिठाओं मेरे घर में ना तो चोकी है और ना ही बैठने का कोई आसार तब शीतला
03:00माता ने उस कुमारन के घर पर खड़े गधे पर बैठ कर और एक हाथ में जाडू और दूसरे हाथ
03:07में डलिया लेकर उस कुमारन के घर से दारिद्रता को जाड कर डलिया में
03:12भर कर बाहर फेक दिया
03:13फिर कुमारा ने कहा
03:15हे बेटी मैं तेरी भक्ती भाव से प्रसन हो
03:18अब तुझे जो भी वर्दान चाहिए
03:20तुम मांग ले
03:21कुमारा ने हाथ जोड कर कहा
03:23हे माता मेरी इच्छा है कि अब आप इसी
03:26डुंगरी गाउंग में
03:27इस थापित होकर यही निवास करें
03:29और जिस प्रकार
03:31मेरे घर के दारी दृता को
03:33अपने जाडू से साफ कर दिया है
03:35वैसे ही आपके जो भी भक्ती चैतर कृष्ण पक्ष के
03:38सब्तमी पूजा करें
03:39और अस्टमी के दिन आपको ठंडा जल
03:41दही या बासी ठंडा भोजन खिलाए
03:44उसके घर में भी दारी दृता कभी वापस ना आपाए
03:48और आपके पूजा करने वाली का अखंड स्वाग बना रहे
03:51और उसकी गोध हमेशा भरी रहे
03:53साथी जो पूरुशीतला स्टमी को बाल ना कटवाए
03:57धोबी को कपड़े ना धुलने दे
03:59और आप पर ठंडा जल चड़ाए
04:00और परिवार सहीत बासी भोजन करे
04:03उसके काम धंदे वेपार में कभी दारी दृता ना आए
04:07माता तथास्तू बोलते हुए बोली
04:09हे बेटी जो तुने वर्दान मांगे है
04:12मैं सब तुझे देती हूँ
04:13तुझे अशिरवात देती हूँ कि मेरी पूजा का
04:16मुख्य अधिकार इस धर्ती पर सिर्फ कुमारिन जाती को ही होगा
04:20कहते हैं कि तभी से डुंगरी गाउं में
04:22शीतला माता इस्थापित हो गए
04:24और उस गाउं का नाम हो गया
04:25शील की डुगरी
04:26उमीद करती हूँ
04:27शीतला माता कि ये कहानी आपको पसंद आई होगी
04:30फिलाल अमारे इस वीडियो में इतना ही
04:32वीडियो को लाइक शेर और चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूले
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