00:03हिंदू धर्म में शीतला अश्टमी का पर्व विशेश महत्व रखता है।
00:34मार्श दोहजार अश्टमी का पर्व ग्यारह मार्श को बनाय जा रहा है।
01:01मार्श इतला की पूजा करने से चेचक और अन्य संक्रामक रोगों से रक्षा होती है।
01:06इस दिन सुबह जल्दी उटकर स्नानादी से निवरित्त होकर पूजा की तयारी करें।
01:10पूजा की थाली में पूआ, रोटी, दही, बाजरा और मीठे चावल जैसे विंजिन रखें।
01:16इसके साथ ही रोली, हल्दी, अक्षत, महंदी और कुछ सिक्के भी पूजा सामगरी में शामल करें।
01:21माता शीतला की पूजा करते समय उन्हें ठंडे जल का अर्ग दें, बासी भोजन का भोग लगाएं, उन्हें आठे के
01:28दिये बनाकर बिना जलाए ही अर्पित करें।
01:31पूजा के बाद परिवार के साथ माता की आर्थी गाएं, सदस्यों के माते पर हल्दी का तिलक लगाएं और घर
01:37में शांती और स्वास्त की कामना करें।
01:39मानिता है कि शीतला अश्टमी के दिन बच्चों के अच्छे स्वास्त के लिए विशेश उपाय भी किये जाते हैं।
01:45इस दिन मा शीतला को चांदी का छोटा चौकोर टुकड़ा अर्पित करना शुब होता है।
01:50पूजा के बाद उस चांदी के टुकड़े को लाल धागे में बांध कर बच्चों को पहनाने की परंपरा कई स्थानों
01:55पर देखने को मिलती है।
01:56मानने ता है ऐसा करने से बच्चों को रोगों सरक्षा होगी और परिवार में सुक समरुद्धी बनी रहेगी।
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