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Ramadan 2026: रमज़ान का महीना बहुत ही बरकत और रहमत वाला महीना होता है। इस महीने में मुसलमान ज्यादा से ज्यादा इबादत करने की कोशिश करते हैं। इसी रमज़ान में एक खास इबादत होती है जिसे इतिकाफ कहा जाता है। बहुत से लोगों के मन में सवाल होता है कि इतिकाफ क्या होता है, कितने दिन का होता है, और इसे सही तरीके से कैसे किया जाता है। आज इस वीडियो में हम आपको इतिकाफ के बारे में पूरी जानकारी आसान और सरल भाषा में बताएंगे।


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~HT.504~PR.115~ED.118~

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Transcript
00:00रम्दान का महीना बहुती बरकत और रहमत वाला महीना होता है
00:04इस महीने में मुसल्मान ज्यादत से ज्यादत करने की कोशिश करते हैं
00:07इसी रम्दान में खास अबादत होती है जिसे इतिकाफ कहा जाता है
00:11बहुत से लोगों के मन में सवाल होता है कि इतिकाफ क्या होता है
00:15कितने दिन का होता है और इसे सही तरीके से कैसे किया जाता है
00:18आज हम इस वीडियो में आपको इतिकाफ के बारे में पूरी जानकारी आसान भाशा में बताएंगे
00:23सबसे पहले ये जान लें कि इतिकाफ कब से है
00:26आपको बता दें कि आप इतिकाफ रमजान के आखरी दस दिनों में कर सकते है
00:30यानि जिस दिन रमजान का बीसमा रोजा होता है
00:33उसी दिन मगर्ब के बाद, इफ़तार के बाद, मस्जिद में इतिकाफ की नियत से बैट जाते हैं
00:38उस समय से 21 रमजान की रात शुरू हो जाती है और आखरी दस राते शुरू होती है
00:43इतिकाफ का मतलब होता है कुछ दिनों के लिए खुद को अल्लह की अबादत के लिए समर्पित कर देना
00:48यानि इनसान दुनिया के कामों और मसूफियात से अलग होकर मस्जिद में रहकर ज़्यादा से ज़्यादा वक्त अल्लह की अबादत
00:55में बिताता है
00:56इसमें नमास पढ़ना, कुरान की तिलावत करना, तजबी पढ़ना, दूआ करना और अल्ला को याद करना शामिल होता है
01:02अब बात करते हैं कि इतिकाफ में कब बैठना चाहिए
01:04रमजान के आखरी तस दिनों में इतिकाफ में बैठना सुन्नत मौफदा माना जाता है
01:08इसका मतलब ये है कि नभी हजरत मौफद चल्लाव लबसल्म की पकी सुन्नत है
01:13आम तोर पर लोग 20 रमजान का रोजा रखते हैं
01:16और उसी दिन मगरिब की नमास के बाद मजजित में इतिकाफ की नियत कर लेते हैं
01:20मगरिब के बाद 21 में रमजान की रात शुरू हो जाती है
01:23और उसी से आखरी 10 रातों की शुरुवात होती है
01:26फिर इतिकाफ करने वाला इनसान ईद का चांद दिखाई देने तक मजजित में ही रहता है
01:30अब बात करते हैं कि इतिकाफ की नियत कैसे करें
01:33नियत दिल से की जाती है
01:34आप दिल में ये रादा करें कि मैं आल्ला की रिज़ा के लिए रमजान के आखरी 10 दिनों का इतिकाफ
01:39कर रहा हूँ
01:39बस यही नियत काफी होती है
01:41अब जानते हैं कि इतिकाफ में क्या क्या करना चाहिए
01:44इतिकाफ के दुरान कोशिश करना चाहिए कि ज्यादत से ज्यादा समय अबादत में गुजारें
01:48जैसे कि पांच वक्त की नमाज, जमात के साथ पढ़ना, कुरान शरीफ की तिलावत करना, तजबी और इस्तखफार पढ़ना, दूआ
01:55करना और इसलामी किताबे पढ़ना
01:57इन दिनों में खास तोर पर रात की अबादत यानि तहजद की नमाज पढ़ना बहुत फाइदमन होता है
02:01रमजान की आखरी दस रातों में लैलत अलकद्र की रात भी होती है, जिसे हजार महीनों से बहतर बताया गया
02:06है
02:06इसलिए जो लोग इतिकाफ में बैठते हैं उन्हें इस मुबारक रात की अबादत का भी ज्यादा मौका मिलता है
02:12इतिकाफ में बैठने वाला इनसान मजजिस से बिना जरूरत बाहर नहीं जाता
02:31अब सवाल आता है कि इतिकाफ कितनी तरह का होता है
02:34पहला है सुन्नत इतिकाफ जो रमजान के आखरी दस दिनों में किया जाता है
02:37दूसरा है नफल इतिकाफ जो साल के किसी भी दिन कुछ समय के लिए किया जा सकता है
02:42अगर कोई इनसान कुछ घंटों के निये भी मज़ित में बैटकर इबादत की नियत कर ले तो वो भी नफल
02:47इतिकाफ में शामिल हो जाता है
02:48दोस्तो इतिकाफ का मतलब यह है कि इनसान अल्ला के करीब हो जाए अपने गुनाहों की माफी मांगे और अपने
02:54दिल को साफ करे
02:55इसलिए अगर आपको मौका मिले तो जरूर कोशिश करें कि रमजान के आखरी दस दिनों में एतिकाफ बैठें
03:00फिलाल अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे लाइक करें श्यर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल
03:04नभूले
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