00:00रम्दान का महीना बहुती बरकत और रहमत वाला महीना होता है
00:04इस महीने में मुसल्मान ज्यादत से ज्यादत करने की कोशिश करते हैं
00:07इसी रम्दान में खास अबादत होती है जिसे इतिकाफ कहा जाता है
00:11बहुत से लोगों के मन में सवाल होता है कि इतिकाफ क्या होता है
00:15कितने दिन का होता है और इसे सही तरीके से कैसे किया जाता है
00:18आज हम इस वीडियो में आपको इतिकाफ के बारे में पूरी जानकारी आसान भाशा में बताएंगे
00:23सबसे पहले ये जान लें कि इतिकाफ कब से है
00:26आपको बता दें कि आप इतिकाफ रमजान के आखरी दस दिनों में कर सकते है
00:30यानि जिस दिन रमजान का बीसमा रोजा होता है
00:33उसी दिन मगर्ब के बाद, इफ़तार के बाद, मस्जिद में इतिकाफ की नियत से बैट जाते हैं
00:38उस समय से 21 रमजान की रात शुरू हो जाती है और आखरी दस राते शुरू होती है
00:43इतिकाफ का मतलब होता है कुछ दिनों के लिए खुद को अल्लह की अबादत के लिए समर्पित कर देना
00:48यानि इनसान दुनिया के कामों और मसूफियात से अलग होकर मस्जिद में रहकर ज़्यादा से ज़्यादा वक्त अल्लह की अबादत
00:55में बिताता है
00:56इसमें नमास पढ़ना, कुरान की तिलावत करना, तजबी पढ़ना, दूआ करना और अल्ला को याद करना शामिल होता है
01:02अब बात करते हैं कि इतिकाफ में कब बैठना चाहिए
01:04रमजान के आखरी तस दिनों में इतिकाफ में बैठना सुन्नत मौफदा माना जाता है
01:08इसका मतलब ये है कि नभी हजरत मौफद चल्लाव लबसल्म की पकी सुन्नत है
01:13आम तोर पर लोग 20 रमजान का रोजा रखते हैं
01:16और उसी दिन मगरिब की नमास के बाद मजजित में इतिकाफ की नियत कर लेते हैं
01:20मगरिब के बाद 21 में रमजान की रात शुरू हो जाती है
01:23और उसी से आखरी 10 रातों की शुरुवात होती है
01:26फिर इतिकाफ करने वाला इनसान ईद का चांद दिखाई देने तक मजजित में ही रहता है
01:30अब बात करते हैं कि इतिकाफ की नियत कैसे करें
01:33नियत दिल से की जाती है
01:34आप दिल में ये रादा करें कि मैं आल्ला की रिज़ा के लिए रमजान के आखरी 10 दिनों का इतिकाफ
01:39कर रहा हूँ
01:39बस यही नियत काफी होती है
01:41अब जानते हैं कि इतिकाफ में क्या क्या करना चाहिए
01:44इतिकाफ के दुरान कोशिश करना चाहिए कि ज्यादत से ज्यादा समय अबादत में गुजारें
01:48जैसे कि पांच वक्त की नमाज, जमात के साथ पढ़ना, कुरान शरीफ की तिलावत करना, तजबी और इस्तखफार पढ़ना, दूआ
01:55करना और इसलामी किताबे पढ़ना
01:57इन दिनों में खास तोर पर रात की अबादत यानि तहजद की नमाज पढ़ना बहुत फाइदमन होता है
02:01रमजान की आखरी दस रातों में लैलत अलकद्र की रात भी होती है, जिसे हजार महीनों से बहतर बताया गया
02:06है
02:06इसलिए जो लोग इतिकाफ में बैठते हैं उन्हें इस मुबारक रात की अबादत का भी ज्यादा मौका मिलता है
02:12इतिकाफ में बैठने वाला इनसान मजजिस से बिना जरूरत बाहर नहीं जाता
02:31अब सवाल आता है कि इतिकाफ कितनी तरह का होता है
02:34पहला है सुन्नत इतिकाफ जो रमजान के आखरी दस दिनों में किया जाता है
02:37दूसरा है नफल इतिकाफ जो साल के किसी भी दिन कुछ समय के लिए किया जा सकता है
02:42अगर कोई इनसान कुछ घंटों के निये भी मज़ित में बैटकर इबादत की नियत कर ले तो वो भी नफल
02:47इतिकाफ में शामिल हो जाता है
02:48दोस्तो इतिकाफ का मतलब यह है कि इनसान अल्ला के करीब हो जाए अपने गुनाहों की माफी मांगे और अपने
02:54दिल को साफ करे
02:55इसलिए अगर आपको मौका मिले तो जरूर कोशिश करें कि रमजान के आखरी दस दिनों में एतिकाफ बैठें
03:00फिलाल अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे लाइक करें श्यर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल
03:04नभूले
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