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Transcript
00:00भाई होलिका साफ हो गई, उसके बाद अंधुरी संग आए और फिर अने कशिप को भी साफ कर दिया, तो
00:06होली हर साल कीओ आ रही है फिर, जिनकी सफाई हो निती हो तो हो गई, तो हर साल होली
00:10क्यों जला रहे है उसके पीछे भी कारण है, पर उसको कारण हम समझते नहीं, क्या
00:14कारण हर साल क्यों मनानी है अब हो लिकहा के जाने के बाद की कहानी तो पता ही है फिर
00:18ऊवह बोले कि तु ऐसे नहीं मरेगा तो एक
00:21खंभा का क्यों जाकर गजय कि तो इसको पकड़ के खड़ा हो जांकि अब इसमें चल और दिया अभी सिक
00:40मरघ आ दो इस आग मिनी और तो
00:44बीच की सांज गोधूली बेला में मारूंगा तुझको कि दिन के बाद रात आती है यही द्वैत का चक्र चलता
00:49है ना स्त्र चाहिए ना शस्त्र चाहिए ना खून से फाड़ दूगा न धरती ना आस्मान या जांग पर रखके
00:54फाड़ दूगा बीच में मतलब समझ रहे हो �
00:57अद्वैत अद्वैत है जो द्वैत को काट देता है यह होली का संदेश है सिखा रही है होली कि जाओ
01:06अद्वैत की शरण में पर तुम तो उसे और द्वैत का ही भोंडा करिकरम बना देते हो और तुमारे भीतरी
01:12भावना आ जाती है कि मैं पुरुशू मैं स्त्री की और जा
01:25कर लेते हैं होली इसलिए है कि जिस नशे में तुम साल भर रहे हो वो नशा आज कम हो
01:30जाए पर हम होली के दिन और नशा कर लेते हैं विदेशी महिलाओं का तो हर साल आता है अच्छा
01:36हो इस साल ना आए कि गई थी उनको पकड़ करके रंग लगाने के बहाने छेड छाड दिय
01:41या चुमा चाटी भी कर लिए सब क्यों क्योंकि कथा जो समझाना चाहती है वो तो हमने समझा ही नहीं
01:47कथा के प्रतीकों को हम जानते ही नहीं
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