00:00भारत में एक व्यक्टी की सोतंतरता दब गई है, और मुद्दे जैसे की करियर पीवा, इनका फैसला भी हम सोतंतर
00:07रूप से खुद नहीं ले पा रहे हैं
00:08अब यह कह रहे हैं कि सब दबा देते हैं, सुतंदरता व्यक्तिगी छीन ली जाती है, केरियर हो, कोई फैसला
00:15हो, शादी बया हो, प्यार हो, दुनिया हम पर चढ़ी रहती है, हम बड़े मजबूर हैं
00:19हम जब जीवन में होते हैं तब परिवार को ले के चलना
00:27कैसे ले के चलते हो, हमारे डिसिशन्स में उनकी भी सामत ही हो, प्यारे पर डर दिख रहा है, पुत्र
00:34का माबाप के प्रते हार्दिक प्रेम है, व्रिधाश्रम भरे पड़े हैं, जब माबाप से कोई स्वार्थ नहीं रह जाता तो
00:41माबाप वहां नजर आते हैं, हटाओ कि य
00:46तरिक जाइजाद कितनी है, बस यह है, और कुछ नहीं है, बाबाप अति गरीब हों, अनपड हों, कुछ ना करते
00:58हों, और तो मोटा पैसा कमाते हो, तब कहोगे कि घरवालों को भी तो लेके चलना पड़ता है, तब कहोगे,
01:05यह प्यार नहीं है, ज्यानियों ने कहा है, कि �
01:08जो मुक्त होता है, सोतंत्रता की बात कर रहेते हैं, जो मुक्त होता है, वो अकेला नहीं मुक्त होता, जब
01:15वो मुक्त होता है, तो उसके पीछे पीछे उसका कुल कुटुम सब मुक्त हो जाता है, यह है असली प्रेम.
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