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00:00:04मेरा नाम सबनम है
00:00:08और मैं आपको सुन रही हूँ आपके सिख्षाओं नहीं मुझे संबाला है
00:00:11ना मेरे पास पिक्चार है ज्यादा और ना ही मैं मजबूत थी लेकिन यहां आकर आपको सुनते-सुनते मजबूत ही
00:00:17आ रही है मुझे
00:00:45पिन्ड जिसकी जगह रसोई और बिस्तर के बीच में रहती है
00:00:49सुसाइटी का जो दबाब है उससे मुझे बहुत परेशन देती थी लेकिन अचारी जी को सुनने के बाद मुझे उन
00:00:55लोगों को जबाब देने का मुझे अताकत मिल गया है और मैं बोल पा रहे हूँ
00:00:59समाज ने इनके खोपड़े में डाल दिया है तुम्हारा मुल्यांकन सामर्थ पर नहीं सौंदर्रे पर होगा
00:01:05यह समस्या उस मॉडल की है जिसने इस्त्री को धर्म में, समाज में, परिवार में और रिष्टे में एक बंधा
00:01:15-बंधाया रोल दे दिया और वो रोल सदियों तक सुईकार किया जाता रहा बिना पर्खे
00:01:33यह बाद, यह बाद, यह बाद, यह खानक सुन रहे हैं? यह आत्मग्यान की खानक है? कोई ग्यान नहीं, कोई
00:01:42अनुभाव नहीं, लेकिन उसके बाद भी एक पेश्चता, एक अकड का भाव रहता है
00:01:48हम कुछ हैं, अपनी रोटी भी खुद कमा कर नहीं खा रहा है, उसके लिए कौन सी सुतंतरता और फिर
00:01:55कौन सी मुक्ति
00:01:56पटक्यों भूल्यों डर अब, दरवज्य पर दस्तक नहीं देतों, मौज है गई, प्रेमी मेरों, गलबहियां ही रहतों
00:02:05पकड़ा पकड़ी घेरा घेरी, को नाहीं यो खेलो, भैजीव जगत एक हैं
00:02:12अब ही रहा में बिल्कुई, अंदर को वैटे हैं सार आप रही रहा मेरे अंदर, अंदर मेरों आप कोई दिखते
00:02:19हैं
00:02:19अगर वो दर्ती पे आये हैं तो आप भी रूप में हैं, आपने काहता है कानकर में कोई मरता नहीं
00:02:23है, तो सब में समाज आता है
00:02:24गुरु मंत्र यो दीप जेलायो, अलू सोमाज, वह बहिंग यो, और उल्लव तो नहीं है, जो कुछ नहीं जानते न,
00:02:43वह फजाते हैं ट्रैप में
00:02:46बहार निकलने के लिए साहस चाहिए, सणकों की धूल फांगनी बढ़ती है, यह होता है, घर में हो तो कुछ
00:02:52काम ढूंडते हो फिर, अपने आपको प्रासंगिक, रेलेवेंट बनाये, रखने का भाना ढूंडते हो
00:02:58यह पॉसिबल ही नहीं था, कि मैं उत्राखन से एक गाहों से निकली हुई और आज बैंगलोर जैसी सिटी में
00:03:07खुद आ सकती हूँ, यह सिर्फ आचारे जी की वज़े से हुआ
00:03:35आचारे जी ने में नीडरता सिखाया है, मेरे भीतर का जो डर था वो बिल्कूल ही गायाब हो गया
00:03:42एक है जो गहनी है और एक है जो बाहर जाकर कमा रही है तो जो गहनी है जैसे मैंने,
00:03:49मैं अपनी माँ का ही एक्सम्दिकेजिते जो वह यह
00:03:52कहती है कि हमने जिन्दगी भर काम किया है और वह इसमें बहुत प्राइड भी लेती है, मताब है confidence
00:03:59होटा है
00:04:00तो मैं यह जानना चाहती हूँ कि वो ऐसी किंग चीजों को मिस आउट कर रही है जो वो औरते
00:04:06जो बाहर जाकर कमा रही है तो ऐसा उनके जीवन में ऐसा क्या है जो मिस हो रहा है
00:04:14आप करती है काम हाँ जी आप बताई है
00:04:21फ्रीडम कह सकते हैं फैनेंशल फ्रीडम है खुलापन है जिन्दगी में अपना पैसा अपने खाते में अपनी मर्जी ठीक है
00:04:32और और उसे फिर किस हिसाब से कहां लगाना है उसके लिए जो एक समझ चाहिए अपना खाता अपने खर्चे
00:04:41अपना विवेक
00:04:43Communication, Public Dealing बाहर जाते हैं तो दुनिया में तरह तरह के लोग होते हैं उनसे अपना आप देखते हो
00:04:54कि कैसे बाल बोची व्योहार रखना है जो लोग घर में ही रह जाते हैं वही घर के चार लोग
00:05:00और चार लोग पडोसके और चार लोग नातिश्टिदर उनसे ही बात होती है प�
00:05:09कोई नया संदर्व नहीं और आप ही सब चानती है और बताइए डिसीजन मेंग बहुत स्ट्रॉंग हो जाती है अपने
00:05:20लाइप क्या सब्सक्राइब करने होते हैं वह एक सीमेत दाइरे के अंदर होते हैं उसके बाहर की कोई आपके सामने
00:05:31स्थिति आती ही नहीं तो आप फैस
00:05:37करने कि कंपनी नए इन्वेस्टमेंट्स कहां करेए G1 मार्केट्स कौन से तलाशेए कि सीग्मेंट में क्या भात होनी चाहिए क्या
00:05:46सेर्वेस क्या प्रोडक्ट होना चाहिए क्या से किसी भी माल की सप्लाई चें लोजिस्टिक्स तैयार करना है यह सब घर
00:05:55में बैठ कर गयstone
00:05:55आपको कहा करना है
00:05:59तो
00:06:00दुनिया
00:06:01भर में जो
00:06:06नसीहते होती है
00:06:08जो चुनोतियां आती है
00:06:10सिखा कर जाती है
00:06:11उनसे आप वंचित रह जाते हो
00:06:15जब उन चुनोतियों से
00:06:16वंचित रह जाते हो तो फिर अपना विकास
00:06:18भी नहीं होता
00:06:19बिना चुरौती के विकास तो होगा नहीं
00:06:24और वता ही है
00:06:26देश विदेश की यात्रा कर सकते हैं
00:06:28यात्रा ही नहीं करते हैं
00:06:29बहुत सारी ग्रणिया तो
00:06:31घर से थोड़ी दूर भी जाना हो
00:06:33तो चाहती हैंगे कोई साथ में चले तब निकलेंगे
00:06:38जो लोग काम कर रहे हैं वो
00:06:40घर क्या जो शेहर से बाहर की यात्रा करते हैं
00:06:43दूसरे प्रांतों में जाते हैं
00:06:45कई बर उन्हें विदेशों की यात्रा हैं करनी बढ़ती है
00:06:48दुनिया देखते हैं
00:06:50दुनिया देखने से अपने भीतर के ढाचों को चुनौती मिलती है
00:06:56आप और ताजा और परिपक्पो हो पाते हो
00:06:59और
00:07:03बाकी और लोग बताए
00:07:06अंदर विश्वास में टूबना पड़ दूबने में सहूलियत होती है
00:07:10घर में घर में बैठे रहा करके
00:07:12आप हो और चार दिवारे हैं
00:07:14और आप जो भी कह रहे हो
00:07:16वो उन्हीं चार दिवारों के मद्धे गूँज रहा है
00:07:18तो कोई आपके अंदर विश्वासों को चनौती देने वाला नहीं है
00:07:22आप हो आपका मॉबाइल फोन है
00:07:24उस पे आपके कुछ दोस्त रिष्टेदार है
00:07:27टीवी है टीवी पर बाबाजी है
00:07:29इस पूरे महौल में कुछ ऐसा नहीं है
00:07:32जो आपकी धारणाओं को चनौती देने के लिए आएगा
00:07:34तो आपके पुराने माननेता या अंदर विश्वास
00:07:37सब साबत रह जाते है
00:07:40और
00:07:43साहस
00:07:44साहस की तो कमी रही जाएगी
00:07:46जब घर में हो तो आप हर तरीके से
00:07:48सुरक्षित भी हो और आश्रित भी हो
00:07:52घर में हो तो सुरक्षित भी हो और आश्रित भी हो
00:07:55भले ही वो पेड़े की सुरक्षा हो
00:07:56लेकिन सुरक्षा तो एक तरह की है
00:07:59बाहर निकलने के लिए साहस चाहिए
00:08:02सबकों की धूल फांगनी पड़ती है
00:08:03धूल गर्द
00:08:05धूप
00:08:08अंजान अपरिचित लोग
00:08:10और स्थितियां
00:08:11इनका मुकाबला करना बढ़ता है
00:08:13इससे भीतर लोहा तैयार होता है
00:08:21ममता इसलिए भी बढ़ती है
00:08:23घर में बैठे बैठे ही
00:08:23क्योंकि वही चीजें जिनसे ममत तो है
00:08:25वही दिख रही है लगातार
00:08:27तुमसे आपकी ममता और प्रगाड होती जाती है
00:08:30वो ममता आधी तो मश्बूरी है
00:08:32क्योंकि करने को और कुछ है ही नहीं
00:08:34तो घर में बच्चे हैं
00:08:36उन्ही को पकड़ कर बैठो
00:08:37जहां जरूरत नहीं है
00:08:39वहां भी दखल करो हस्तक शेप करो
00:08:41बच्चे बड़े हो गए हैं
00:08:42तो भी उनको नहलाओ
00:08:44जबकि वो खुद नहाद हो सकते हैं
00:08:46कपड़े बदल सकते हैं
00:08:47तब भी काओ नहीं मैं नहलाओंगी तुझको
00:08:49जो कामकाजी महिला है
00:08:51वो बच्चें की सिर्फ उन्ही मागों को पूरी करेगी
00:08:54जो जायज है और आवश्यक है
00:08:57आपने ऐसी माएं देखी होंगी
00:09:00बच्चा साथवी आठवी में पहुंच गया
00:09:02तो भी उसको दसवी में पहुंच गया
00:09:03तो नहला रही है देखा है
00:09:05आप मेंसे कितनी ऐसी कुदी है
00:09:07बठाईएगा
00:09:09वो लो
00:09:11और देखी कितनों नहीं
00:09:15इतने बड़ बड़े बच्चे हो गए
00:09:16उनको भी कहा रही है
00:09:17मैं खिलाओंगी नहीं तो खाएगा नहीं
00:09:18मैं नहलाओंगी नहीं तो नहाएगा नहीं
00:09:20सुलाओंगी नहीं तो सोएगा नहीं
00:09:22जगाओंगी जगेगा नहीं
00:09:25जहां आपकी धरूरत नहीं है आप वहां भी ममता का वास्ता दे करके घुसे हुए हो
00:09:33बच्चे का स्कूल बैग बना रही है
00:09:37यह काम पाथ छे साल के बच्चे तक तो समझ में आता है कि वो नहीं अपनी
00:09:44नोट बुक्स और चीजें रखेगा अपने बैग में और आप और बड़े बच्चे का बैग तयार कर रहे हो यह
00:09:53कहां कहां होता है कौन कौन कर रहा है भाई
00:09:55अले कर दो हाथ प्यार से पिता भी करते हैं आप लोग क्या मुस्कुरा रहे हो ऐसे
00:10:02कि ऑफिस जाने ते पहले इसका बैग दो तयार कर दू और उसके वार रही है मूचे धीरे धीरे और
00:10:09बाप बैठके उसका बैग तयार कर रहे हैं
00:10:13कहां कहां होता है चलो कुछ इमानदार हाथ उठे
00:10:24यह होता है घर में हो तो कुछ काम ढूँडते हो फिर अपने आपको प्रासंगिक रेलेवंट रखने का बहाना ढूँडते
00:10:32हो और फिर दोहाई देते हो देखो मैं इतनी जरूरी हूँ मैं यह सब काम करती हूँ
00:10:36मैं ये सब काम नहीं करूँगी तो ये काम कौन करेगा
00:10:39तुम जो काम कर रही हो तुम जो काम कर रही हो उसमें से 70% काम वो है
00:10:45जिन्हें करने की कोई जरूरत ही नहीं
00:10:47या वो काम ऐसे हैं जिन्हें तुम नहीं करोगे
00:10:49तो कोई और कर लेगा किसी तरह से होई जाएंगे
00:10:51पर उन कामों का नाम लेकर
00:10:53उन कामों का बहाना बनाकर
00:10:55आप
00:10:57घर में घुसे रहोगे बाहर निकलोगे नहीं
00:10:59बाहर कोई संघर्ष नहीं करोगे
00:11:01कोई चनोती नहीं उठाऊगे
00:11:03और कहानी सुना दोगे कि
00:11:05नर और नारी जीवन की गाड़ी
00:11:07दो पहिये होते हैं
00:11:10एक पहिया बाहर की तरफ जाता है
00:11:11एक पहिया घर में रहता है
00:11:13मैं भी तो दिम्मेदारी का काम कर रही हूँ
00:11:15यह कहानी किसने सुनाई
00:11:17यह कहानी किसने सुनाई तुमको
00:11:20यह जीवन की गाड़ी
00:11:21दो पहिये, अरे थोड़ी तरक्की करो
00:11:25अब तक साइकल पही चलोगे
00:11:29कहानी को भी तो आगे बढ़ाओ, चार पहिये आए
00:11:33फिर दो पंक आए
00:11:34और दोनों पंक आकाश में
00:11:36उड़के दिखाए
00:11:39अब तक बाइसेकल का ही पहिया बनी रहोगी
00:11:42और उसमें भी गंधिकाहनी की एक पहिया बाहर जाएगा
00:11:44एक पहिया गहर में रहेगा
00:11:46ये कौन सी
00:11:48cycle है भाई
00:11:56और क्या होता है घर में रहकर के
00:11:59बच्चा बीमार होता है
00:12:08क्योंकि डर लगता है कि डok्टर भी लूट ले गया
00:12:12बहुत सारी महिलाओं के लिए अस्पताल भी बड़ी कॉंप्लेक्स जगह होती है
00:12:18वो अस्पताल जाने में भी डरती है कि जटिल जगह है कैसे बड़े बड़े शब्द लिखे होते है
00:12:23हमारी मेडिकल विवस्था भी ऐसी कि उसमें सब ग्रीक ही लिखा होता है
00:12:29वहाँ पर बड़े बड़े शब्द नेफ्रोलोजी इतनी अंग्रीदी तो उसने जिंदगी में नहीं पड़ी
00:12:39ये क्या हो गया तो घर में बैठी रहेगी क्योंकि वहाँ अस्पताल में जाएगी
00:12:43वहाँ पर अलग अलग तरह के विभाग हैं, काउंटर्स हैं, यहाँ परची कटानी हैं, वहाँ पहले जा करके जाओ, एक्सरे
00:12:51कराओ, MRI के लिए एक दूसरा सेक्शन है, उधर चले जाओ, बड़े ऑस्पिटल्स में तो काफी दौडधूप होती है
00:12:58उनको दौड़धूप करनी ही नहीं आएगी, आप किसी बड़े हस्पताल में जा करके देखिए, जो ग्रहस्त महिल आए हैं, आपको
00:13:07वो ज्यादातर अलग ही दिखाई दे जाएंगी
00:13:10या तो किसी के पीछे पीछे चल रही होंगी, या उचुप चाप किसी कुरसी और बैठकर किसी का इंतजार कर
00:13:16रही होंगी, कोई और आए और हमें राह दिखाए
00:13:23अब ये कैसी इस्थितिय है, बताओ
00:13:31और
00:13:41ये बिलकुल एकदम पॉल खुल दी, ये काम क्या हंकार हर तरीके से नहीं करता है, या एक ही लिंग
00:13:52की बात है, हर वेक्ति अपनी कमफर्ट जोन में रहता है, हर तरीके से, क्यों, बहुत सारे लोगों दारण के
00:14:01लिए सत्रों में नहीं आते, क्योंकि यहां आगर क्या होगा
00:14:06पॉल खुल जाती है, मैं कुछ नभी कहूं कि उठिये बात करिये, बैठने बैठने में पॉल खुल जाती है, धर
00:14:16में हो तो कुछ भी बोल लो अपने आपको वो ग्रह मंतरी बोलती हैं अपने आपको, आलतु में अपने आपको
00:14:24नवाजे पड़ी हैं, मेरे वो प्राइम मिन
00:14:30मिनिस्टर हैं और मैं उनकी होम मिनिस्टर हूँ वो देखो वो भी वो होम में रहता है तो हो मिनिस्टर
00:14:39सारी पोल जानता है शावाज बेटा इसके साथ हो मम्मी के पापा के
00:14:57और इसलिए कई बार ग्रहनियों में एक विचित्र किसम का अहंकार पाया जाता है कोई ग्यान नहीं कोई अनुभाव नहीं
00:15:06लेकिन उसके बाद भी प्रेश्चता एक अकड का भाव रहता है हम कुछ हैं हम कुछ हैं
00:15:19आप उनके सामने जा करके खड़े हो जाईए बड़े से बड़े वैग्यानिक हो करके वो तो भी आप से चड़करी
00:15:28बात करेंगी सारी नहीं कई वो गता है हम कुछ हैं क्योंकि उनको आईना कभी दिखाया ही नहीं गया
00:15:37क्योंकि घर से बाहर निकल करके उन्होंने अपनी हैसियत का परीक्षण कभी करा ही नहीं
00:15:45कि वो घर में रही है और घर में यह होता था की जो भी आता था तो जैसे मामा
00:15:52जी के पाऊं चूथा था वैसे इसे होतायए न कि
00:16:01में क empowered यह बता चुका हूं कई बारर की मैं चोटा था 26 जनवर्य एकल उसकी परैड का आता
00:16:14था तो विदेशियति थी थे
00:16:44आते थे खड़े होते थे तो मैं पूछता था ये दो-तीन
00:16:45मैं भी कुछ हूँ पर्स लेडी कहां से हो गई है उस लेडी कहां से हो गई है यह अन
00:16:59अर्ण्ड रिस्पेक्ट है जो घर बैठे बैठे मिल जाती है लोकधर्म भी इस तरह की इज़त दे देता है कोई
00:17:08धार में कार रहे होगा उसमें पति-पत्नी दोनों एक साथ एक बराबर �
00:17:13पत्नी पूरे तरीके से आश्रिता हो लेकिन फिर भी उसको स्थान ऐसे दिखाए जाएगा जैसे बराबरी का हो बराबरी का
00:17:22है नहीं
00:17:23कि यह कि फिर भी हम स्वांग ऐसा करेंगे जैसे दोनों बराबरी क्या
00:17:41कुछ तो उसको गाजर दिखानी पड़ेगी ना ताकि वो घर के भीतर बंद रहना स्विकार कर ले तो उसको ये
00:17:47गाजर दिखाई जाती है कि तुम घर की देवी हो तुम घर की देवी हो तुम पूजया हो तुम भी
00:17:53सम्मानिय हो
00:18:01वो मान भी जाती है क्योंकि अब सुख सुविधा तो मिली रहे हैं और बाहर संघर्ष तो है ही आप
00:18:09कामकाजी महिला का चेहरा देखेंगे
00:18:12और अगर संपन घर से है महिला हाउस वाइफ उसका चेहरा तो आप ततकाल बता देंगे कि अंतर है
00:18:26कामकाजी महिला आम तोरबे आपको सीधी सादी दिखेगी उसको सजने सवरने का बहुत वक्त भी नहीं होगा और जगा भी
00:18:32नहीं है
00:18:32आप ऑफिस में बहुत सच सवर के नहीं जा सकते जाना चाहिए भी नहीं
00:18:39आफिस में जो लोग अच्छे पदों पर भी काम करती हैं वो भी आप देखेंगे साधारन पुशाकों में जाती हैं
00:18:48वो नहीं बहुत सच्टी सवर्ती क्योंकि वो अपने काम पर ध्यान देना चाहती हैं वो यह नहीं चाहते कि कोई
00:18:55उनकी और आये उनका चेहरा और उनका रू
00:19:06हो सकते हैं को यह ना कहें कि नहीं ऐसतों मेरे बगल में रहती हैं वो ठो बहुत काम करती
00:19:12हो तो बिल्कल नहीं संच्टी सवर्ती अप्वाद मत गिनाईँगा मैं एक सांवान में गोर्ण हो सकते हैं
00:19:22जो घर में उसको अक्सर बच्चे स्कूल चले गई पती दफ्तर चला गया उसको समय होता है
00:19:29खीरा गाजर मेथी मूली हींग सतर चीजे लेके मूँ पे लगड़ो आंख पे लगाओ
00:19:39और तुचा बनाओ
00:19:41रीठे
00:19:42को बाल में लगाओ
00:19:44और क्या क्या पता नहीं सब क्या था होता है
00:19:48अननास का रस आंख में डाल लो
00:19:54इससे आंखें बिलकुल हिरनी जैसी हो जाती है
00:20:03अरवन क्लैप भी होने लगा
00:20:04उसमें क्या होता है
00:20:07अरवन क्लैप से ये अच्छा
00:20:11वो घर में आते हैं और सब ये कीरा वीरा करके चले जाते हैं
00:20:19मूपर वो पकोड़े वाला क्या आता है
00:20:21बेसन मल लिया है
00:20:33आदमी ड़ जाए दोपर के समय
00:20:36गंटी मत बजाईएगा
00:20:39पता नहीं कैसा चहरा भीतर से निकले
00:20:47ये सब अरवन क्लैप आ रहा है वो ये कर रहा है वो वहां पर उसी समय दोपर में वो
00:20:52क्या कर रही है ऑफिस में
00:20:53वो काम कर रही है जूज रही है बास का प्रेशर है जितने मातात है उनको समालना है काम देखना
00:21:01है वो अपने लैपटॉप से जूज रही है उधर क्लाइंट फोन कर रहा है बहुत सारी बाते हो सकती है
00:21:08और ये घर में बैठके क्या कर रही है चाए बनाने के बाद चाए की पत्ती बेकार नहीं जानी चाहिए
00:21:19उसको कान में डालो उससे कान साफ होता है
00:21:28और और जादा साफ करना कान तो चाए की पत्ती डालने के बाद एक लो अधरक की गांट उससे उसको
00:21:36अंदर ठूसो
00:21:42कुछ गलत मैंने नुस्खा बताया ना कमा इसको पत्ती गर्दना आने का टाइम होता है
00:21:50कह रही है कि जब पती घर आने का टाइम होता है तब यह सब अपना खींग अधरक खीरा सब
00:21:56हटा हुटू के सद सवर्गे तयार हो जाती है
00:22:00मेरे तो मेरे तो देखे इस सब चीज के लिए बड़ा गंदा नाम है अब बोलूं क्या
00:22:12और पहले का समय था जब इतना पैसा नहीं था मध्यमवर्ग का मतलब होता था आज का निम्न मध्यमवर्ग
00:22:22तब तो फिर भी होता था कि घर में चक्की चल रही है डाल क्या ना जुसमें से आटा बना
00:22:30रहे हैं बहुत काम होता था
00:22:33खाना बनाना भी खुद है बरतन भी खुद साफ करने सौ काम होते थे घर के जिसमें महनत वाले काम
00:22:38भी शामिल होते थे
00:22:40गाओं में खासकर सब्जी कौन खरीदने आता था सब्जी भी अपने ही आसपास आदमी उगाता था और वहां पर अपने
00:22:46जाता सब्जियां भी फिर देख रही है तीक उधर होगा खेत पर जो घर के पीछे पूरी छोटी सी उसके
00:22:53वो खुदी काम कर रही है क्यारी में पानी भ
00:23:08जाता है घर में और भी कंपनीज है यस मैडम नाम से उसका नामी है यस मैडम यस मैडम अब
00:23:23तो क्या है मैं बात कर रहा हूं जो अपर मिडिल क्लास हो गया वो क्या है
00:23:29कि आप दोपहर के समय किसी भी शॉपिंग मॉल में चले जाहिए
00:23:34किसी भी शॉपिंग मॉल में वहां असी प्रतिशत महिलाएं मिलेंगी आप किसी रेस्टराउ में चले जाएए वहां पर बड़े बड़े
00:23:43टेबल ऐसे जुड़े हुए होंगे और उस पर दस दस बीस बीस बैठी होंगे और वो कुछ खेल रही होती
00:23:47है
00:23:51क्या है यह
00:23:55और फिर आप कहोगे मैं तो लिबरल हूँ मैं इंटेलेक्चुल हूँ दूसरे के पैसे पे आश करके
00:24:02मैंने तो इंग्लिष उनर्स करा हुआ है मैं पति ज्यादा आची इंग्लिश बोल लेती हूँ
00:24:10मैं इंग्लिश बोल बोलकी उसको दबा देती हूँ
00:24:13कमा धमागे बोलाता है और मैं इंग्लिश में पड़पड़ा करके उसको त्यों नीचे ही रह
00:24:25अपनी रोटी भी खुद कमा कर नहीं खा रहा है उसके लिए कौन सी सुतंतरता और फिर कौन सी मुक्ति
00:24:37उसके लिए सब अध्यात्म वगेरा फिजूल की बात है उमारा तो निवाला भी उधार का है
00:24:55विशेश स्थितियों की बात दूसरी है चलो अभी प्रसूती हुई है बच्चा छोटा है समझ में आता है कोई नहीं
00:25:02कहेगा कि बच्चा तीन महीने का है तो तुम बाहर निकल करके काम करो
00:25:07लेकिन बच्चा अब चार-पात साल का हो गया उसके बाद भी बहाने बना रहे हो तो यह क्या है
00:25:13और अब तो वर्क फ्रॉम होता है
00:25:17कोविड ने एक काम यह अच्छा करा है महिलाओं के लिए वर्क फ्रॉम होम खूब फैल गया है नजाने कितनी
00:25:23नौकरियां होती है जिसमें आप ठीक है घर पे रहिए बच्चा छोटा है और घर से काम करिए
00:25:30यह छोटी मोटी समस्या नहीं है काफी बड़ी समस्या है क्योंकि घर में इस तरह का अगर एक व्यक्ति है
00:25:36तो वो पूरे घर की विवस्ता खराब कर देगा
00:25:40और अगर पूरे समाज में ऐसे ही ऐसे घर घर है तो पूरे समाज खराब हो जा रहा है
00:25:55जो मुक्त नहीं हो प्रेम भी क्या करेगा फिर ऐसे घर में प्रेम भी नहीं हो सकता
00:26:00पर निर्भरता हो सकती है बस प्रेम थोड़ी हो सकता है
00:26:14किसी ने मुझे पर निर्भरता में क्या होता है किसी ने मुझे बड़ा बढ़िया एक भीजा अभी सुनाता हूँ मेरा
00:26:23फोन है किसी के पास
00:26:32अरे वदीब जी आप अपने ही दे दीजिए आपके पास भी है
00:26:36इस तरह की बाते मैं घरास्तों को भेज़ता रहता हूँ
00:26:57इसमें सर्च करो टीना
00:27:16तुनियेगा
00:27:19क्या होता है जब आप आशरित होते हो किसी पर प्रेम फिर कैसे गायव होता है
00:27:26और प्रेम की जगे कौन थी चीज ले लेती है
00:27:28अ हस्बेंड टेक्स्ट इस वाइफ
00:27:32हनी अगॉट हिट बाए कार आउटसाइड दे ओफिस
00:27:35यह मुझे आफिस के बाहर एक गाड़ी ने टक्कर मार दी है
00:27:41टीना ब्राट मी तो दे हॉस्पिटल
00:27:44दे हैव बीन टेकिंग टेस्ट एंड डूइंग एक्सरेइज
00:27:48टीना है कोई टीना ने मुझे हॉस्पिटल में डाल दिया
00:27:51और अब मेरा टेस्ट हो रहा है एक्सरेइज हो रहे हैं
00:27:53दा ब्लोट माई हैट इस वेरी स्ट्रॉंग में भी सीरियस सर में चोट लगी है
00:27:58बहुत जोर की और हो सकता है सर की चोट एकदम गंभीर हो
00:28:10इतना ही नहीं है सर में तो चोट लगी लगी है पीन पसलियां टूट गई है एक हाथ तूट गया
00:28:17है
00:28:17यह जो बाई टांग है इसमें कंपाउंट फ्रेक्चर है और यह जो दाहिनी टांग है यह तो शायद काटनी ही
00:28:26पड़ेगी है
00:28:26एंपुटेशन होगा हस्बेंट ने अपनी यह इस्थिति बताई वाइफ को यह मैसेज करके तो वाइफ का रिस्पॉंस आता है तीन
00:28:34शब्दों में हूँ इस टीना
00:28:41हूँ इस टीना कहा है प्रेम कहा है तुम मर जाओ भले
00:28:57लेकिन मेरी मुठी में रहना क्यों क्योंकि तुम अगर मुठी में नहीं हो तो मेरे तो खाने पीने के लाले
00:29:06पड़ने वाले हैं
00:29:08यह नहीं कि मेरे दूसरे स्वार्थ कोई छिनेंगे
00:29:14मैं दाने दाने को महताज हो जाओंगी क्योंकि मेरी अपनी कोई सामर्थ है ही नहीं
00:29:20जिसको हम कहते हैं ना feminine jealousy वो ऐसा कुछ नहीं है कि DNA से आती है वो culture और
00:29:28society से आती है
00:29:30हम कहते हैं ना कि औरतों में डाह बहुत होती ही इर्शा बहुत होती है और cat fight होती है
00:29:36फिर
00:29:38आम तोर पर वो आप कार्टूंस भी देखते हूँ है कि लड़का लड़की साथ जा रहे है एक दूसरी लड़की
00:29:43है लड़का उसको ऐसे मुड़के देख रहा है तो इधर वाली उसको थपड मार रही है तू क्यों देख रहा
00:29:47है उसको
00:29:49यह दोनों लिंगों में होती है फुरुशों में भी इस्त्रियों में भी पर इस्त्रियों में ज्यादा चित्रित इसलिए की जाती
00:29:57है क्योंकि आपने उनको पराशृत बना रखा है इसको पराशृत बना दोगे उसको फिर इस बात का ख्याल रखना पड़ता
00:30:05है कि मेरा पती
00:30:24मरता हो तो तू मर जाए
00:30:27पीना नहीं होनी चाहिए
00:30:28भले तू मर जा
00:30:30पीना नहीं
00:30:41अब अगली बारों क्या करेगा
00:30:43वो टीना की ज़िए क्या लेख देगा
00:30:45जॉन
00:30:47वो जाउन लिख देगा तो पकड़ा जाएगा
00:30:50जब पकड़ा जाएगा
00:30:51तो सिर्फ बेवफ़ई नहीं
00:30:53जूटा भी कहलाएगा
00:30:56और टीना की ज़िए जाउन उसको लिखना क्यों पड़ेगा
00:30:59क्योंकि अगर टीना बता दिया
00:31:02तो वो खा जाएगी घर से
00:31:04तो फिर वो टीना की ज़िए जाउन बताएगा
00:31:06जब जाउन बताएगा तो जूटा कहलाएगा
00:31:13मैं एक तरफ की बात कर रहा हूँ
00:31:14दूसरी तरफ से भी ऐसा ही होता है
00:31:17पुरुष कोई
00:31:19बत्तमीजियों में पीछे नहीं है
00:31:21पर अभी बात
00:31:23ग्रहस्त महिलाओं की हो रही है
00:31:25तो इसलिए
00:31:28और क्या विशिष्टाएं पाई जाती है
00:31:30आप लोग बताईए ये तो
00:31:32आपके अधिकार शेतर की बात है
00:31:34इसलिए माईक आपके पास है बताईए
00:31:38अपने ही जैसी सहेलियां बना लेंगी
00:31:39पूरा जंगट बन जाएगा उनी का
00:31:42इको चेंबर
00:31:44वाट्सएप ग्रुप भी बना लेंगी
00:31:46अपने ही जैसी सब इकठा कर लेंगी
00:31:48आठ दस
00:31:49और निंदा खूब करेंगी
00:31:51किसकी निंदा खासता और पर करेंगी
00:31:52काम करने वाली महिलाओं की निंदा करेंगी
00:31:55खूब
00:31:56यह बेकार
00:31:59काम थोड़ी करने जाती
00:32:01नैन मटक्का करने जाते चिनार
00:32:08बच्चे घर में सड़ रहे हैं
00:32:11उनको छोड़के सजबद के गई हैं वहाँ पर
00:32:19घर में थोड़ी मिलेंगे सब पराई मरद
00:32:21इसलिए जाती है
00:32:38बहुत मुश्किल है
00:32:39बहुत मुश्किल है कि कोई ग्रहिणी
00:32:43रेस्टराओं के खाने की तारीफ कर दे
00:32:46क्योंकि अगर वो भी उसको नहीं करना आता
00:32:49यह प्रमानित हो गया
00:32:52तो फिर तो
00:32:54existential vacuum है
00:32:57कुल एक तू काम करती है
00:32:59खाना और वहाँ भी दिख गया कि वो काम भी
00:33:02एक शेफ और एक पुरुष तुझसे बहतर कर रहा है
00:33:04तो तू है किसलिए
00:33:06तेरी हस्ती की
00:33:08कीमत क्या उदेश है क्या
00:33:10तो पहुँशते ही
00:33:14बड़ा स्वाद आ रहा है
00:33:15300 रुपए की दाल है ना इसलिए
00:33:18भर में हम यूँ मुफ्त बना कर दे देते हैं
00:33:21तो फेकी फेकी जाती है
00:33:24अब ये इन्होंने
00:33:25300 रुपए में दी है
00:33:27तो बड़ा स्वाद लग रहा है
00:33:28हम तो छुए ना गिनटी
00:33:34दीदी
00:33:37पहुडा, लौकी, तुरई, आलू
00:33:42और पालक
00:33:43इनके अलावा 40 साल में तुमने क्या बनाना सीखा है
00:33:4740 साल से तुम इनी को घुमा घुमा के
00:33:50वही वही बना रही हो
00:33:51जो एक काम करती हो
00:33:52तुम उसमें भी कोई विविधता
00:33:54या विशेशक्यता नहीं ला पाई हो
00:33:57वही रोटी बना देती हो, वही पराठा बना देती हो
00:34:00वही पोहा बना देती हो, वही पांच कुल सबजी है
00:34:02उनी को भुमाती रहती हो
00:34:03तुम शेफ से मुकाबला करोगी
00:34:11तुम तो कलिनरी एक्सपर्ट भी नहीं बन पाई
00:34:14खाना ही बनाती हो तो कम से कम तुमने आठ दस तरह का खाना बनाना सीखा हो ताभी तुमसे बोलते
00:34:19हैं बना दो मेक्सिकन तुरही की रस्दार खिलाएंगे
00:34:29मुझे तुरही से कोई समस्या नहीं
00:34:33एक्चुली है
00:34:41परवल और लॉक्की भी परवल आरे रे रे क्या याद दिला दिया
00:34:51आलू आलू आलू इस दिन बहुत कुछ होगा खास पराठी डाल दू
00:35:04आलू के प्राठे दई के साथ
00:35:08तो चो अभी ये वीडियो पुब्लिश होगे कितनी गाली आवे लेगी
00:35:13मुझे अभी से मज़ा आ रहा है
00:35:15मज़ा ही नहीं आर वे जुरुजुरी दौड रही है
00:35:19वो ऐसे बैठी होगी है स्क्रीन के
00:35:21और पानी पीपने के मुझे गाली दे रही है
00:35:46अगर ये बोलें कि तुम कमजोर रही हो तुम नाजुकूरी हो गर रहे करके
00:35:51तो उस पे नराज हो जाएंगी गुसा आएंगी बहुत जाएंगी
00:35:57कौन मेहनत करना चाहता है
00:35:59कौन संघर्ष करना चाहता है
00:36:01धूल और धूप का सामना कौन करे
00:36:07सडक पे एडिया कौन रगड़े
00:36:13पानी में इत्र डाल कर नहाना तो एक बात है
00:36:16बाहर निकलो पसीने में नहाना पड़ेगा कौन करें
00:36:29पर निर्भरता में प्राइड आने लगाएं उन्हें यह लगता ही नहीं कि इसमें कोई प्रॉब्लम है उन्हें लगता ही कि
00:36:36यहां आने से पहले मेरे घर में मेरी लडाई हुई है इसी बार में डिसकेशन कर गया आया हूं खूब
00:36:41और इसके दिम्मेदार आप हो आपने ही कुछ कोमल मधुर खुश्बुदार पलों में उनको यह एहसास बलकि वादा
00:36:58प्रिये यह सब तुम्हारा ही तो है हम कमाते तुम्हारे लिए ही तो है
00:37:09तुम मेरे दिल की रानी और घर की परियो उसने यकीन कर लिया तुम्हें
00:37:16चीट्टू क्यू लिटरली तुम्ही ने तो जा जाके करा था कि ना प्रिये ना आओ बस इधर आओ बिस्तर इधर
00:37:24है
00:37:25यह तुम्हारे लिए ही तो मैंने सब करा है सब बिल्कुल तुम्हारे ही है तुम्हारे ही है उसने मान लिया
00:37:32कि उसका है
00:37:32यह धोखा महिला को पुरुष नहीं तो दिया है कि यह सब तुम्हारा है और होता कुछ नहीं है उसका
00:37:39होता कुछ नहीं है
00:37:44और जब तक उसको इस समझ में आता है कि उसका कुछ नहीं है तब तक वो पूरे तरीके से
00:37:49पंगु अपाहिज आश्रेता हो चुकी होती है
00:37:57आप एक बार 35-40 पार कर गई हैं और पाती हैं कि आप आश्रेता हैं उसके बाद आप क्या
00:38:02कर लेंगी तो उसके बाद बस यही होता है कि अब एक नाटक में प्रवेश कर गए हैं उस नाटक
00:38:07को करें जाओ
00:38:16अगर आधा तीहा भी पतनी से मा से बहन से किसी भी महिला से कुछ स्नेह का रिष्टा है तो
00:38:24उसको सच्चाई बताओ ना कि तुम्हारा वही है जो तुम्हारा है
00:38:29किसी और का कमाया वो तुम्हारा नहीं हो जाता
00:38:33यहां तो भाई अपनी सगी बहनों से भी यह सच्चा ही छुपाते है
00:38:40आज भी ऐसा हो रहा है खूब
00:38:43यो पढ़ने को बोलेगी तो कहेंगे अरे तू पढ़ लिख के क्या करेगी
00:38:48ऐसी दाल से तेरी शादी हो रही है
00:38:51सरकारी बंगले पर राज करेगी
00:38:53पढ़ लिख करके तुझे क्या मेलेगा पढ़ लिख करके तू अभी पढ़ रही है उसके बाद तू बहुत परिक्षा जाएगी
00:38:58तो अभी तू कलरकी तो बनेगी अधिक से अधिक
00:39:01तेरी शादी सीधे बतातो रहे है
00:39:04पैसिलार नहीं तो कलेक्टर से करा देंगे उसके बाद बिना पढ़े लिखे रानी बन जाएगी
00:39:10क्यों जूट बोल रहे हैं अपनी बेहन से
00:39:18विशेशकर हमारे देश में महिलाएं बहुत साइकोसिस का शिकार है
00:39:26महिला को मैं कहता जरूर हूँ बार बार कि मनुष्य हो आप मनुष्य हो आप
00:39:30पर वो एक अजीब किस्म की मनुष्य बना दी गई है
00:39:36इसलिए आम तोर पे महिलाओं के लिए इनसान शब्द इस्तेमाल भी नहीं होता है
00:39:40मैं प्रमानित कर सकता हूँ मैं आपसे कहूँ एक इनसान की अच्छवी बनाईए
00:39:46तो असी प्रतिश्यत संभावना है कि आप उधी पुरुष्की बनाईगे
00:39:51मैं क्या दूँ यहां आगर एक इंसान का चितर बनाई है
00:39:53अस्सी प्रतिशत आप पुरुष का ही चितर बनाएंगे
00:39:57क्योंकि महिला अपने आप में एक विशिष्ट श्रेणी बन गई है
00:40:00special category
00:40:03वो इंसान नहीं है वो इंसान से कुछ हटकर बन गई है हमारी संस्कृत में
00:40:20है पर उस पर लागू होती ही नहीं है
00:40:26और जो कुछ महिला पर लागू होता हो पुरुष पर लागू कर दो तो गुसा जाएगा
00:40:30किजी पुरुष को बोलो कि तेरा बयाकर आ रहे हैं कमा धमा करके लड़की देदेगी
00:40:48आप लोग भोली होती है या बुद्धू या क्या है ठीक है एक विवस्था चल रही है आपके बाहर आपके
00:41:03बहुत पहले से चल रही है पर आप खुद को क्यों अनुमति देती है उस विवस्था का शिकार बननेगी
00:41:13आप के जो प्रतीक सौंदर के माने जाते हैं जिसमें आपकी शान और सम्मान होता है पुरुशों के लिए वो
00:41:20चीज गालिया होती है देखते नहीं हो बोलते तो क्या चूडियां पहन रखी है और आप चूडियां ऐसे खनकाते हो
00:41:26जैसे कितने गौरफ की बात हो और पुरु
00:41:37दिखाई नहीं देता सुनाई नहीं देता स्कूल में टीचर्स भी होंगी लड़कों के थोड़े बाल बढ़ जाए तो आगर ऐसे
00:41:51पकड़ीं केंगी कल बाल कटा गया ना शोटी शोटी बच्ची आए वो बाल बढ़ा के जा रही है क्यों क्या
00:41:56कर रहे हो तुम क्यों उनको �
00:41:58स्टीरियो टाइप में दीख्षित कर रहे हो और सबसे जो भयानक आश्यरे की बात होती है वो वही होता है
00:42:17रहणी का आत्म विश्वास
00:42:24आंटी आंटी से सब डरके रहते हैं आंटी से सब पीछे रहते हैं क्योंकि आंटी के पास भेले ही कुछ
00:42:29नहीं है पर great moral superiority है आंटी ऐसे आएगी और कहेंगी तुम ये तुम ये तुम ये तुम ये
00:42:39और भेले ही आंटी के पीछ पीछे सब पीछ पीछे हसते हों आंटी पर प
00:42:52और भीतर ये भीतर आंटी भी अपनी सीमाएं जानती हैं
00:42:55आंटी को पता है कि छोटे मोटे काम बोल दो
00:43:00दूसरे लोग कर भी देंगे
00:43:02कुमारी छोटी मोटी बाते दूसरे लोग मान भी लेंगे
00:43:05तो आंटी बड़ी बात खुदी कभी नहीं बोलती क्योंगी पता है मानी नहीं जाएगी
00:43:10आंटी भी दूसरों से छोटी मोटी बाते बोल बोल कर अपने को ये एहसास ये गलत फहमी दिलाए रहती है
00:43:15कि हम कुछ है
00:43:34और आंटी के बच्चों को बड़ा मज़ा आता है आंटी को आंटी बनाए रखने में
00:43:37आजकर एक कर्म चल रही है मम्मी समाज कि मम्मिया तो ऐसी होती ही है मम्मिया तो ऐसी होती ही
00:43:47है
00:43:48मम्मिया ऐसी होती है तुमने बना डाला उनको
00:43:54इनोसेंस ही नहीं कई तरीके की सम्मान जनक पदवियां उसको दी जाती है कि मा का प्यार, मा की महानता,
00:44:00मा का बलिदान
00:44:04मा की जिन्दगी बरबाद करके
00:44:05इसको तुम मा की महानता बोल रहे हो
00:44:08मा की कुर्वानी बोल रहे हो
00:44:10मा की जिन्दगी तुम खुद खा गए
00:44:15और
00:44:17स्वांग ऐसे करते हो जैसे
00:44:19मा की न कोई अपनी जिन्दगी है
00:44:22न मा की कामनाएं है
00:44:28अभी जाड़े चल रहे हैं
00:44:30मा, मा, तेरे हाथ का गाजर का हल्वा
00:44:35इसके को मा के हाथ का हल्वा बहुत पसंद है
00:44:40हाँ
00:44:41यही मा की कुल कौलिफिकेशन है
00:44:43मा के हाथ का हल्वा
00:44:44यह मा के हाथ का हल्वा क्या चीज़ होती है
00:44:47मा के हाथ बड़े-बड़ी मारते बना सकते थे
00:44:49मा के हाथ बड़े-बड़े ग्रंथ लिख सकते थे
00:44:54मा के हाथ बेला नी नहीं कलम भी उठा सकते थे
00:45:01मा के हाथों में बंधनी नहीं
00:45:05बल भी हो सकता था
00:45:08पर तुमने मा के हाथों से ये सब छीन लिया
00:45:11और अब कह रहे हो मा के हाथ का गाजर का हलुआ
00:45:17और इस बात को बहुत क्यूटनेस के साथ
00:45:20मिठास के साथ परोसा जाता है
00:45:21मेरी माँ तो इतनी क्यूट है
00:45:25और माँ भी बिलकुल इठलाती हुई है है है
00:45:28मेरा राहुल अपने चार लफंगे लेके आ गया
00:45:31अब मैं जा रही हूँ इनके लिए गाजर का हलुआ बनाने
00:45:37माँ को भी लगता है कि जिन्दगी कुछ सार्थक्ता मिली
00:45:40राहुल और उसके चार लफंगों के लिए हलुआ बनाऊंगी अब
00:45:55बिलकुल बिलकुल
00:45:58लोगधर्म कर्वकांड नहीं इस्तरी होने के नाते आपको जानना चाहिए
00:46:01पैट्रियार्की भी 80 प्रतिशत इन्ही महिलाओं ने चला रखी है
00:46:06पित्रु सत्ता भी कोई पुरुषों ने नहीं चला रखी
00:46:09वो भी महिलाओं नहीं चला रखी है और ज्यादा तर वही यह जो घर में बैठी होई महिलाओं है
00:46:14यही चला रही है, अंदर विश्वास भी इन्हों नहीं चला रखा है
00:46:19गलत तरीके से वोट भी यही देती है
00:46:22चुकि यह दुनिया जहान जानती नहीं, इसलिए नेता लोग भी आसानी से बेवकूफ इन्हीं को बना लेते हैं
00:46:30तो ले दे करके सामाजिक, राष्ट्री, राजनैतिक हर तरह की बरबादी की यह जिम्मेदार होती हैं
00:46:39धार्मिक भी बरबादी है
00:46:44और सर्थ खुद नहीं करती है काम तो अगली जनरेशन को भी सपोर्ट नहीं करती है
00:46:48जैसे मैं
00:46:50काम करने निकलो तो वो ऐसे होगा कि उपेक्चा की द्रिष्टे से या ये द्रिष्टे से देखेंगी
00:46:56काम करेंगी बडि आई काम करने वाली
00:47:00कितना कमा लेती हो
00:47:03چालीस हजार
00:47:06हमारे ये तो लाफ पाते हैं और दो-तीन लाफ नीचे से
00:47:13तुम क्या पाती ओ दीदी
00:47:21और जो काम करने आए लड़की है उसको ताना मार रही होगी तू 20-40 जार ही कमाती है तुम
00:47:27क्या कमाती हो
00:47:30पर समाज ने इनकी खोपड़े में डाल दिया है कि तुम्हारा मुल्यांकन सामर्थे पर नहीं सौंदर्रे पर होगा
00:47:41तो सामर्थे को तो कोई वेटेजी नहीं है सुन्दर दिखती रहूं उपयोगी बनी रहूं जो मुझे परंपरागत करतवे बता दिये
00:47:51गए हैं उनका पालन करती रहूं बस यही उनका काम है
00:48:03और भुगत्ती भी खूब है बड़ी दुर्दशा होती है भीतर ही भीतर बड़ा बुरा लगता है उनको देख करके
00:48:12क्योंकि जिन्दगी तो किसी के पक्ष में नहीं खड़ी है जिन्दगी तो बेरहमी से तुम्हें तुम्हारी असलियत और अवकाद दिखाई
00:48:24देती है जिन्दगी जब दिखाती है असलियत बड़ी गहरी चोट देती है और फिर उस समय पर जो दीदी की
00:48:35हालत होती है देख क
00:48:41कि अभी आपने कहा गाजर का हलवा तो मा को बड़ी प्राइड होती है कि देखो मैंने अपने बच्चे के
00:48:45लिए गाजर का हलवा बनाया लेकिन जब वो मा बिमार होती है और वो कहते है मुझे कहीं छोड़ा हो
00:48:51दॉक्टर के पास और फिर वो वही बच्चा जिसने गाजर का हल
00:48:53बनाया बनवाया होता है वो कहते है ममी मेरे पास समय नहीं है तब वो जो मार रोती है लेकिन
00:48:59उसमें भी वो यह नहीं समझते कि मैंने ही इनको संसकार ऐसे दिये परवरी शैसी दी दिखो दुनिया सामर्थ की
00:49:08पूजा करती है मैं सम्मान भी उसको दूंगा जिससे कुछ सी�
00:49:23कि बाप ने कभी ठीक से पढ़ाया नहीं था वो यूहीं कहीं गाओं कस्वे से इधर उदर चोटी मोटी जगह
00:49:29से कुछ बीए बीए सी करके किसी तरह से ब्या दी गई थी बहुत सारे तो कॉलेज अभी भी ऐसी
00:49:36चल रहे हैं जिसमें कॉलेज जाना भी नहीं पढ़ता है ऐस
00:49:42उसे पहले ही उसका ब्या हो गया वो क्या जानती है कुछ नहीं पांचवी तक तो किसी तरह फिर भी
00:49:46उसने अपने बच्चे को पढ़ा दिया छटी से तो उसे अपने बच्चे की किताबे भी समझ में आनी बंद हो
00:49:51जाती है बच्चा भी ये बात देख रहा है बताओ बच्�
00:49:58बच्चे को भी ये दिख रहा है कि मेरी छटी की साथवी की आठवी की किताबे भी ये मा को
00:50:02नहीं समझ में आती है अभी मैं मा से साइंस का गणित का कोई सवाल पूछ लू मा को नहीं
00:50:07पता मा से इतिहास का कोई तथ्य पूछ लू मा को नहीं पता बाप को हो सकता है फिर भी
00:50:12पता हो, मा को नहीं पता, बच्चा क्या सम्मान करेगा मा का?
00:50:19वो भी तब तक मा से जुड़ा रहता है, जब तक मा उसको नहला रही है, धुला रही है, मा
00:50:26गाजर का हलुआ खेला रही है, जब दाड़ी मूच आ जाती है, कॉलिज पहुच जाता है,
00:50:33तो उसके लिए भी मा डिस्पोजिबल वस्तु हो जाती है, वो काहे के लिए, मा को देख रहा है, मा
00:50:39नहीं कुछ नहीं जानती, मा को मुबाइल चलान तक नहीं आता ठीक से, वो क्या इज़त करेगा मा की?
00:50:51कोई बाजार में चीज खरीद नहीं हो, इलेक्ट्रोनिक्स आइटम हो, मा नहीं जानती,
00:50:57AI दूर की बात है, बहुत सारी ग्रहड़ियां गूगल ना कर पाएं ठीक से,
00:51:06कौन उज़त करेगा अब? कौन करेगा? और जो शुरुवाती रूपरंग होता है,
00:51:15शारिरिक साज सज्जा होती है, वो पाथ साथ साल में ढ़ल जाती है,
00:51:19एक दो बच्चे पैदा होते हैं, शरीर पूरा ढ़ल जाता है,
00:51:21उसके बाद अब कौन तुम्हें शरीर के नाते भी इज़त देगा?
00:51:26ले दे कर कि क्या बन जाते हो? मास का एक पिंड,
00:51:29जिसकी जगह रसोई और बिस्तर के बीच में रहती है लगातार,
00:51:35जिसकी कोई इज़त नहीं दुनिया में जवाने में,
00:51:41लेकिन संसकार वश्ट लोग आकर के क्या बोले जाते हैं?
00:51:46जी आंटी जी, तो आंटी जी कोई गुमान बना रहे जाता है कि हम भी कुछ हैं,
00:51:57अपने बेटे को सिखाएंगी कि तेरे लिए भी ऐसी ही ढूनके देंगे,
00:52:02अपने बेटे में भी उमीद जगाएंगी तेरे लिए भी ऐसी ही ढूनके देंगे,
00:52:06अगर बेटा उन पर छोड़ दे,
00:52:08तो उनका जुकाव, उनकी प्रेफरेंस अपनी ही जैसी किसी की रहती है
00:52:13क्योंकि उनसे उंची अगर घर में बहू आ गई
00:52:15तो बहू के सामने तुछ हो जाएंगी
00:52:19तो बहू भी खोशती है जो उन्हीं के जैसी हो बलकि और निरक्षर हो
00:52:25अपनी लड़की के बच्पन से ही पर काटेगी और उसको सिखाएगी
00:52:29कि ये तेरा घर नहीं है ये तरे भाई का घर है
00:52:33मैंने एक मा को उसकी बेटी को बोलते देखा है
00:52:37बेटी छोटी है पांचवी शटी में है थोड़ी मोटी हो रही है बेटी
00:52:42जानते किन शब्दों में बेटी को डाट रही है
00:52:45कौन भैंस बांदेगा अपने घर
00:52:50सिर्फ यही नहीं कहा कि तुम भैंस हो
00:52:53समस्या यह है कि अगर तु भैंस हो गई
00:52:56तो कौन तुझे अपने घर बांदेगा
00:52:59कौन भैंस बांदेगा अपने घर
00:53:07अब ये जो बेटी है ये mental disorder का शिकार नहीं होगी क्या बचपन से ही
00:53:12तभी तो बोल रहा हूँ हमारी जो महिलाओं की आवादी है
00:53:15वो बड़े neurosis का शिकार है
00:53:20मानसिक तोर पर महिला का बीमार होना ज्यादा संभावित होता है
00:53:26क्योंकि हमारा समाज ये संस्कृति ऐसे है
00:53:30महिला बहुत आसानी से मानसिक रूप से अस्वस्थ हो जाती है
00:53:35उसको कर दिया जाता है यहां से बीमार
00:53:43एक हमारे प्रोफेसर थे तो वो जैसे किसी फीमेल को देखते थे दूर से
00:53:49वो बहुत घबराई वीसी लगती थी तो सीधा बोलते थे एंग्जाइटी नियॉरोसिस डिसॉर्डर लैक एंटर करती ही बिल्कुल होता है
00:53:57शुरू शुरू में जब महिला वर्क प्लेस पर जाती है जो कभी घर से बाहर निकली हो बाहर जाती है
00:54:02या शुरू में जब वो गाड़ी चलाती है तो वो एक आम पुरुष की अपेक्शा ज्यादा एंग्शियस रहती है
00:54:08बिल्कुल होता है
00:54:10बिल्कुल होता है
00:54:11और जब वो जादा anxious रहती है तो पुरुशों को
00:54:13बहाना मिल जाता ही कहने का कि
00:54:15ये देखो
00:54:16ये दीदी गाड़ी चलाएंगी अभी एक्सिडेंट करेगी
00:54:20ये देखो ये चली आई हैं आफिस में काम करने
00:54:22देदी एक काम करो ये हलका फुलका काम है कर लो
00:54:24बाकी जो महत्वपूर्ण और भारी काम है वो जड़ा हम मर्दों को करने दो
00:54:29और बहुत सारी महिलाएं इस तरह का संग्रक्षन
00:54:35सुईकार भी कर लेती है
00:54:38जब उन्हें कहा जाए
00:54:39कि अच्छा वहतिक काम करी न आप 6 बज़ रहें आप घर निकल लिए बाकी काम हम लोग निप्टा लेंगे
00:54:43आपको बच्चे समाल लोगे आप घर जाईए दी आप घर जाईए
00:54:46वो थैंक यू थैंक यू करके घर चली भी जाती है
00:54:49पगली को समझें भी नहीं आता है कि तूने अपनी आजादी बेच दी
00:54:53तू अगर वहां गई है पुरुष के बराबर तनखा ले रही है
00:54:57तो बराबर काम भी कर
00:55:06एक और अच्छा जी आता है कि
00:55:08हाथ उठा के बोला करीब हुआ
00:55:12बुक्स में जब मैं पढ़ाती हूँ बच्चों को तो मैं देखती हूँ
00:55:15वहां पर महिलाओं को एक किचिन के उसमें दिखाया जाता है
00:55:18और कोई भी सेंटेंस होता है कि महिलाएं घर में काम कर दी है
00:55:22तो फिर वो दिखा जाता है कि वो फुटबॉल खेल रहा है
00:55:25तो फिर वो फिर लड़का होगा और डॉल से खेल रही है तो फिर वो एक लड़की होगी
00:55:29ये तो हर जगे होता है हालां कि ये बदलने लगा है
00:55:32बड़े शहरों में नहीं होता कहीं मैं अभी देख रहा था
00:55:34कि किसी हॉस्पिटल का ऐसे बड़ा होल्डिंग लगा हुआ था तो उसमें दिखा रहा है था कि पेशेंट लेटा हुआ
00:55:43है और एक डॉक्टर बात कर रही है और दूसरी डॉक्टर उसा कुछ हो दोनों जो महिलाई थी डॉक्टर वो
00:55:48बदल रहा है तो वो जो
00:55:57कुल्चरल विजुलिज्म है वो बदल रहा है यह दिरे धीरे वो भी सरस्रिफ में बदल रहा है जैसे पहले मैंने
00:56:08जहां से किया था वहां अगर फीमेल है तो नर्स मानना चाथ था दोक्टर बोलते ही
00:56:18ही तो है
00:56:24अजनको बोलते हैं अगर हम ऐसे लगए थोड़ा अब को बोरा
00:56:36विछ थोड़ा आप बूरा लगेगा पर में बता दूहें आप बह्तर होती हैं
00:56:47आपको गलक सहमी है कि आपने हमारी प्रगति मात्र में योगदान दिया है, आपने हमारी प्रगति में योगदान दिया होगा,
00:56:58पर हमारे बंधनों में भी आपका बहुत बड़ा योगदान है, आप बहतर होती तो हमारे पस बंधन कम होते, हमें
00:57:05आगे बढ़ाने में आपका क�
00:57:07पर हमें रोके रहने में और हमें पीछे ढखेलने में भी आपका बहुत बड़ा योगदान है, क्यों? क्योंकि आप खुद
00:57:13बंधी हुई हैं, क्योंकि आप खुद पिछडी हुई हैं, आप बंधी ना होती हैं, तो हम बहतर होते.
00:57:26अचारे जी मैं एक होस्पिटल में हूँ
00:57:28एज नर्स काम कर रही हूँ
00:57:30और और जगे पे भी मैंने देखा है
00:57:34एक महिलाओं का एक वर्ग ऐसा बन गया है
00:57:36जो ये बोलता है कि पहले ही ठीक था
00:57:39जब महिलाओं घर का ही काम करती थी
00:57:41अब जब नोकरी भी कर रही है
00:57:43और घर पर जाके सेम काम कर रही है
00:57:45तो हमारे उपर तो डबल
00:57:46responsibility आ गई है
00:57:47तो अपना कोर पकड़े पकड़े बाहर बाहर बदलोगे
00:57:50तो यह होगा
00:57:52क्याब
00:57:52पकड़ रखा है कि घर में
00:57:54जो मेरा रोल है
00:57:56और घर में जो मेरा स्थान है
00:58:00वो तो पारंपरी की रहे
00:58:01उसके साथ साथ
00:58:03additionally अतरिक्त तौर पर
00:58:05मैं बाहर आफिस में भी जॉब कर लूँगी
00:58:07तो फिर तो यह होगा हंकार
00:58:10ऐसे ही तो काम करता है
00:58:11कि भीतर से अपने आपको नहीं बदलना चाहता
00:58:14बाहर अपने आप में कोछ जोड लेना चाहता है
00:58:16वही काम ग्रहनी कर रही है
00:58:18कि घर के भीतर जो चल रहा था
00:58:20वो तो वैसे ही रहेगा
00:58:21उसमें बाहर से ओफिस और जोड लिया
00:58:25भाई प्रगति का मतलब होता है
00:58:27घर के अंदर भी जो चल रहा है
00:58:28वो ऐसे नहीं चल सकता जैसे चला है
00:58:31और अगर वैसे ही चला होगे
00:58:32तो फिर तो अब बाहर का भी काम करो
00:58:35और फिर घर आ करके बरतन भी साफ करो
00:58:37और कपड़े भी करो और ये सब भी करो
00:58:41और पती भले ही तुमसे आधा कमाता हो
00:58:43ओपर जा करके उसको चाय पिला हो
00:58:57ये समस्या उस मॉडल की है
00:59:01जिसने इस्त्री को धर्म में, समाज में, परिवार में
00:59:06और रिष्टे में एक बंधा-बंधाया रोल दे दिया
00:59:11और वो रोल सदियों तक सुईकार किया जाता रहा
00:59:15बिना पर्खे
00:59:17आपने कोई पूछा भी नहीं कि ये रोल कहां से आ गया
00:59:20आपको कहा गया इस रोल को मानना धर्म है
00:59:22इसको मानना संस्कृत है
00:59:24आपने पूछा भी नहीं कि धर्म तो हमारा वैदिक है
00:59:27और हमारा वेदान तो कहीं कहता नहीं कि
00:59:29ऐसी च्छवी में बंधना चाहिए इस्त्रीयों को
00:59:33तो ये सब ये जो चला रहे हो
00:59:34ये नाटक कहां से आ गया
00:59:36आपने कभी इतिहास में आके देखा भी नहीं कि
00:59:39ये जो नाटक है ये एक तरह की साजिश है
00:59:40जो करी गई थी और वो साजिश
00:59:42जब करी गई तो करी गई हजार साल
00:59:44बीत गई आज भी वो यथावत है
00:59:46ये तो घजब बात
00:59:51अजारे जी ये भी बोला जाता है कि
00:59:53अगर हम नहीं होते तो सब भी खर जाता
00:59:55हमने तुम लोगों को बांध के रखा है
00:59:58मत बांधो
01:00:03एक बार छोड़ के देखो दुबारा दिखा ही नहीं देंगे बस
01:00:07हाथ जोड़ रहे हैं तुम्हारे मत बांधो
01:00:10ये कौन सा प्रेम है जो बांध कर रखता है
01:00:14ये क्यों जबरदस्ती अपने आप को श्रे दिया जा रहा है कि
01:00:18मैं घर में गोंद की तरह हूँ
01:00:20मैंने सब को चिपकागर रखा है
01:00:24इनसान गोंद बन जाए
01:00:27ये कोई गौरव की बात है
01:00:30अपर यही सब बोल बोल के इस तरीको महिमा मंदित किया गया है
01:00:34वो घर के पहिये की धुरी होती है
01:00:38वो फिविकॉल का जोड होती है
01:00:42वो इनसान होती है
01:00:43उत्वे जीने दो
01:00:47गोंद नहीं है वो
01:00:53तरक ये देती हैं कि सीता महिया तब रक्षमर लेका पार करके गई थी तो उनका भी अपरन हो गया
01:00:58था ना तो हम तो अपनी रक्षमर देखा के अंदर ही से गया है
01:01:04उनके पती का नाम राम था
01:01:13बीबी तुम सीता महिया नहीं हो
01:01:18उचलना छोड़ दो
01:01:20तुम जो हो वो रहकर बात करो
01:01:24उतनी उची बात करना कि सीता जी ने जो करा था वो मैं भी
01:01:28सीता जी ने अगनी पर इक्षा भी दी थी
01:01:31दोगी
01:01:33देनी है और देने के बाद साबुत निकलाओगी
01:01:40निकलाओगी देदी
01:01:42फिर
01:01:43तो क्यों बस अपनी कन्वीनियंस के हिसाब से सीता जी का नाम ले रही हो
01:01:49कि जहां अपने स्वार्थ की सिद्धी हुई
01:01:52तहां देवियों का नाम लेना शुरू कर दो
01:01:54कभी सीता जी का नाम, कभी किसी का नाम
01:01:57क्यों अपने स्वार्थ के लिए उनका नाम घसीट रही हो बीच में?
01:02:09सीता तो
01:02:10मालू मैंने कहा क्या जाता है
01:02:12पैदा कैसे हुई थी
01:02:14सीता शब्द कार्थ पता है
01:02:17क्या होता है
01:02:18हल
01:02:20उनको तो ये माना जाता है
01:02:22कि वो साधारण तरीके से
01:02:24मानविय तरीके से पैदा भी नहीं हुई थी
01:02:26मम्मी आप कैसे पैदा हुई थी
01:02:28आप भी खेत में मिली थी
01:02:37माननेताओं को बीच में ला करके
01:02:40अपनी दुर्दशा को वाजिब ठहराने की कोशिश मत करो
01:02:43ये बेमानी है
01:03:00सीता जी ने तो बोला था
01:03:01हे मा क्योंकि वो प्रथवी से ही आई थी
01:03:05तो अंत में तो उन्होंने बोला था
01:03:07हे मा तुझसे ही आई थी
01:03:11वापस अपनी गोद में ले ले
01:03:14तो कथा है कि
01:03:17प्रथवी में दरार खुलती है बड़ी और सीता जी उसमें समा जाती है
01:03:20मम्मी से बोलो मम्मी एक आध बार आप थोड़ा सा डेमो देना आप भी थोड़ा सा समाना भले नहीं बदरार
01:03:28लाके दिखा दो नाम ले रही हो इतना बड़ा सीधा जी का नाम ले रही हो
01:03:35रडामाचर जी मैं पहली बार आई हूँ कि इता सत्र से जुड़े हुए में को एक महीना ही हुआ है
01:03:39और मेरा सवाल यह है जैसे कि कुछ लड़कियों को आजकल बहार बेज देते हैं पड़े के लिए गाउं से
01:03:47या फिर छोटे सहर से लेकिन जब वो बहार पड़ने जा रही है
01:03:51और जैसे उनकी शादी की बात तो वो लोगी तेह करेंगे जैसे कोई बड़ा रिष्टा आता है तो सारी चीज
01:03:58भूल जाते है बिलकुल कि यह पड़ भी रही है एक अच्छी मतलब जॉब भी कर सकती है फिर वो
01:04:04सारी चीज भूल जाएंगे कि इसकी भी कुछ लाइफ है बत
01:04:11अपर कद बैज दिया
01:04:12अबहनी किसा हूं
01:04:14मतलब इनकी अक्वोज उनके अपरम ओस्लिएगा लड़का है अच्छी प्रॉपर्टी है
01:04:19तो क्या करेंगी वह उसमें दोडेंगी
01:04:30अच्छी पोस्ट पर लड़का है लड़के को उसके आफिश में कुरसी में लियोगी
01:04:34ये दीदी जा कि उसी गोद में थोड़ी बैट जाएगी
01:04:36वो कुरसी पे बैठा है कुरसी उसकी है
01:04:41इस लड़की को कौन उस कुरसी पे बैठने देगा
01:04:44कास्टिजम के बेस पर भी बहुत सारी चीज़ आ करते है
01:04:46देखो वो जो करते हैं जो इन चीज़ों को अपने साथ होने दे
01:04:50मेरी दरिश्टे में वो दोशी है
01:04:53पाथ साल के नहीं हो आठ साल के भी नहीं हो
01:04:55पढ़े लिखे हो जवान हो अपने साथ होने दे रहे हो तो जिम्हदार तुम हो
01:05:03अरेज जी जिसे आप अभी बता रहे थे कि मम्मी और जिसे बहुत जढ़ा दा चंडिशन होती है
01:05:11तो हम लोग जैसे मम्मी या बुआ या मॉसी को आप समझाते हैं कि आप बहुत दुनिया है बहुत कुछ
01:05:18शीखना है आप बाहर निकलिए दुनिया गूमिये
01:05:21सीखिए नहीं चीजें पढ़िए
01:05:24तो वो इतन
01:05:26कुछी जो में एगरी भी करते है
01:05:28पर उनमें एक डर सा होता है
01:05:29या अपनी जो
01:05:30अब हो गया
01:05:32हमारी बीत गई जिंदगी
01:05:34तुम लोग करो
01:05:36जो करना है
01:05:37हमको बहुत ना बताओ
01:05:41अरे अरे
01:05:42यह मुँआ गठिया
01:05:48अब यह मर के ही मानेगा
01:05:53लाना रे पानी लाना
01:05:56क्या वता है
01:05:59अज का है रे आज
01:06:01हींग के पराठे बनेंगे
01:06:09हमारा आप कुछ नहीं है बेटा
01:06:11तुम लोग अपना अपना देखो
01:06:14हमारा तो हाँ
01:06:15भगले जनम में होगा
01:06:22तो दीदी आपके
01:06:23मनो कामना शीगर पूरी हो
01:06:26जब इस जनम से
01:06:29आपने
01:06:32सब उम्मीदें त्याग ही दी हैं
01:06:35तो आप नई शुरुआत करें फिर
01:06:39हलू मैं जूट है
01:06:43यह सब पोस्चरिंग है
01:06:49भीतरी और बाहरी मेहनत और सचाई से
01:06:52बचने का नाटक है
01:07:00और फिर आप इसमें अगर
01:07:02कर दो कि
01:07:04अच्छा तर नहीं संती तो कोई बात नहीं
01:07:06थोड़ी उपेक्छा कर दो
01:07:08तो टप टप टप आंसू
01:07:11अब हो गया जब तुम लोग छोटे थे
01:07:13तब हम तुम्हारी टटीद होते थे
01:07:14अब हम तुम्हारे किस काम के है
01:07:16काय के लिए तो हमारी परवा करोगे
01:07:21अब क्या है ठीक है
01:07:23जाओ अपना अपना रास्ता देखो
01:07:24हमारा यह युद्देश है था तुम लोगों को
01:07:26खिला पिला के बढ़ा कर दिया तुम्हारी सेवा कर दी
01:07:29अब देखो तुम लोग अपना-पना हमारा जनम हुआ ऐसा ही, सार्थिक हो गया
01:07:39अरे जब यही होता है, पहले से पता है, यही होता है, तो पता है न, इसक्रिप्ट है
01:07:44आई के लिए उसमें फसे रहते हो
01:07:49आचारे जी, नमस्ते, एक और प्रश्ण है, आचारे जी मैंने वर्क प्लेस पे काफी बार देखा है
01:07:55मेरे कॉलीग्स हैं, तो they are very like intellectually sound, drive कर लेते हैं, अच्छा कमा रही है, financially independent
01:08:02है
01:08:02पर उसके बावजूत, एक चीज़ जो बहुत paradoxical लगती है, वो यह है कि वो करवाचौत के फास्ट रख रख
01:08:08रहे हैं, पूर्णिमा के फास्ट रख रहे हैं
01:08:09आफिस में आ रहे हैं, फॉर्मल पहन के, अपने ससुराल जा रहे हैं, वही साडियां पहन के, सर पे पल्लू
01:08:14लेके
01:08:14तो वो चीज़ मुझे बिल्कुल समझ में नहीं आते हैं, कि आप ये different identities कैसे इतने easily carry off
01:08:19कर लेते हो, and then you say कि
01:08:21tradition and work goes hand in hand, तो अचारे जी वो मुझे चीज सब नहीं समझ में आरी, जो हमारी
01:08:27age की लड़किया कि ये दोहरी जन्दे के क्यों चीह रहे हो आप, why can't you be just what you
01:08:32are in front of everyone, क्योंकि that's what they are, भीतर से वो वही हैं भी भी, भीतर उनके उनकी
01:08:40परदादी ही बैठी हुई है, उपर से उन्हों
01:08:50इसी हो गई हो, कुछ भी नहीं है, उनके सारे भीतरी ख्याल वैसे ही पुराने हैं, जो fundamental उनका center
01:09:01है, वो नहीं बदल गया है, उनको भी ले दे करके, चीजें चाहिए वही जो पुरानी महिलाओं को चाहिए होती
01:09:11थी, एक पती हो, बच्चे हो, security हो, आजकल की तो लड़किया
01:09:1715 साल, 17 साल वाली होगी, किस साल वाली होगी, वो यही तो होगा, मेरी शादी कब होगी, मेरी शादी
01:09:22कब होगी, अगर ये सवाल आया है, मेरी शादी कब होगी, तो 90 पतिशत संभावनाएं कि प्रश्न करता कोई लड़की
01:09:29है, इनमे sexual arj इतनी जादा होती है क्या, हर समय शा�
01:09:35क्यों कर रहे हैं लड़का नहीं करता बलगी जाहिर सी बात है यह मामला
01:09:41sexual urge का नहीं है यह cultural conditioning का है पंदरही 17 से चालू हो जाती है मेरी
01:09:51शादी कब होगी मेरी शादी कब होगी मेरी शादी कब होगी और उपर से वो चाहे
01:09:55मिनी स्कर्ट पहन ले, इंस्टाग्राम पे नाच ले, जीन्स पहन ले, कुछ कर ले
01:10:01भीतर से तो वैसी बैठी हुई है ना उसके देखे जिन्दगी यही है पती, शादी, बच्चे पस यही है जिन्दगी
01:10:16अचारी जी इसमें एक चीस और देखी है, कि जो हमसे थोड़ी सी बड़ी महिलाएं हैं, जो जो उन्होंने काम
01:10:20करना शुरू कर दिया, वो ये ताने मारती हैं कि हमने तो काम भी किया, घर भी संभाला, तुम लोगों
01:10:25में ऐसा क्या है कि तुम सिर्फ काम ही कर सकते हो, घर नह
01:10:27जिन्होंने काम भी किया, घर भी संभाला, उन्होंने कोई बहुत अच्छा उंचा काम नहीं किया होगा, कोई साधारन सी सरकारी
01:10:35नौकरी और हो सकती है, जिसमें बना-बनाया समय है, गए वापस आगए पांच बजे उतना कर दिया होगा, या
01:10:42स्कूल में कोई कर दिया होगी
01:10:57सारी और साथ में
01:10:59मैं एक कॉर्पोरेट परफॉर्मर
01:11:01भी हूँ, नहीं हो सकता
01:11:04नहीं हो सकता
01:11:06थैंक यू चारेट
01:11:12बहुत मामलों में
01:11:14तो महिलाएं ही होती है
01:11:17उन्हें
01:11:18खुद अपनी हस्ती पसंद नहीं होती
01:11:20वो खुद नहीं चाहती कि उनके
01:11:21घर लड़की पैदा हो
01:11:25वो खुद
01:11:26एक महिला के एक बेटा होगा
01:11:28एक बेटी होगी
01:11:29महिला खुद बेटे के पक्ष में
01:11:32भेद करेगी
01:11:35तो पित्र सत्ता भी
01:11:37महिलाओं नहीं चला रखी है
01:11:40भुरूण हत्या भी
01:11:42करने में महिलाएं
01:11:44कम से कम
01:11:45अपना समर्थन तो देई देती हैं बिना समर्थन के तो कोई आवर्शन नहीं करा देगा
01:11:54को चिल्ला पड़े भाग जाए कुछ करे पुरजोर विरोध करे तो कैसे कोई कर लेगा
01:12:03नहीं होता पहले फीमेल का गंसेंट देखिए भारत को बहुत
01:12:14आगे बढ़ाना तब तक संभव नहीं हो पाएगा जब तक हमारी ये आधी आबादी इसी तरह से नियूरॉटिक रहेगी
01:12:25आज महिला पर बाहरी बंधन नहीं है उसका बंधन भीतरी है बीमारी मानसिक हो चुकी है ऐसे में कहां से
01:12:32आप कहोगे कि राष्टर प्रगति कर जाएगा
01:12:35आप आकड़े ढूड़िएगा कि चाइना की वर्कफोर्स में महिलाएं कितनी है भारत की में कितनी है उसी से आपको एस्टिमेट
01:12:42ये भी निकल आएगा कि चाइना के जीडिपी में महिलाओं का कितना योगदान है भारत में कितना है फिर आप
01:12:49कहते हो कि हमें दुनिया के अ�
01:12:51काबला करना है कैसे कर लोगे
01:12:52वहाँ महिलाएं भी काम करती है
01:12:55वहाँ आधी आबादी घर में नहीं बैठी हुई है
01:12:58इसलिए उदेश आगे निकला है
01:13:00जो देश अपनी आधी आधी आबादी
01:13:01को घर पे बैठा देगा वो आगे कैसे निकलेगा
01:13:11इसराइल की सेना देखो इसराइल की एरफोर्स देखो
01:13:13और उसमें महिलाओं को देखो
01:13:16अमेरिका की ओलमपिक्स में मेडल टैली देखो
01:13:19और देखो कि उसमें से आधे से ज़्यादा मेडल महिलाओं के है
01:13:23जिस देश में महिलाओं कंधे से कंधा मिला करके
01:13:26बाहर निकल रही है वही देश है जो तरक्की कर पाएं है
01:13:29और दिश देश में महिलाओं की जितनी पिछड़ी हालत है
01:13:32वो देश भी उतने ही पिछड़े हुए है
01:13:36देखो ये सब जो थियोक्रेसीज हैं
01:13:38इनका क्या हाल है
01:13:40पाकिस्तान, इरान, अफगानिस्तान
01:13:42देखो इनको, यहां महिलाओं घर के अंदर कैद करी जाती है
01:13:46देखो इनका क्या हाल है
01:13:47जिस देश में महिला घर में बैठी हुई है
01:13:50वो देश निसंदे पिछड़ा हुआ ही होगा
01:13:56भारत के भीतर भी देख लो कि
01:13:58विकसित इलाके कौन से हैं और अविकसित कौन से
01:14:02भारत में भी जिनको आप विकसित जगहें बोलते हो
01:14:05वो सब वही है जहां महिला आजाद है
01:14:07बाहर निकल रही है, सड़क पे घूम रही है
01:14:09आफिस में काम कर रही है
01:14:11और जितनी पिछड़ी जगह होगी
01:14:13भारत में भी, वो वही होगी
01:14:15कि जहां कह रही है महिला कि मैं तो ग्रहणी हूँ मैं घर में बैठ करके दालभात बनाती हूँ
01:14:27अगर यह भी कहते हो कि देश से प्यार है तो देश से प्यार की ही खातेर
01:14:33महिला को उसकी पूरी संभावना हासिल करने दो
01:14:37गाजर का हलुआ कुछ नहीं होता
01:14:50आगे बढ़िये, कोई और सवाल लेते हैं, हो गया बस, हाँ, बताइए, अचारी जी, अभी आपने जो हमें बताया कि
01:14:57पित्री सत्ता को बनाय रखने में स्त्रियों का बराबर का योगदान है, इसी संदर्व में एक घटना याद आ रही
01:15:05है, मुझे जो अभी दो हपते तीन ह�
01:15:07पहले की है, हर्याना में जिंद शहर है, वहाँ पर एक वेक्ति के, दस बेटियों के बाद एक बेटा पैदा
01:15:14हुआ, और उसमें जो एक जो बहुत ही, मतलब घिनौनी सी बात आ रही थी, सामने वो यह थी कि
01:15:20एक वीडियो वाइरल हो रहा है, जिसमें एक रिपोर्टर है, जो
01:15:35बहुत है, वह भी कहर एक, मुझे तो भरोसा नहीं हो रहा था, अचारीज उसमें तीन किरदार है, एक तो
01:15:40रिपोर्टर है लेडियों को एक घुशि के मारे दिखा रही है, जो लड़का हुआ है, फिन मदर से उजा के
01:15:46बात कर रही है, तो मुझे तो भरोसा नही हुआ है, त
01:16:05यह overall एक अच्छी चीज नहीं है उस health के लिए भी और बच्चों के लिए भी बाकी बच्चों के
01:16:11लिए भी तो वह भी मौका उन्होंने चूक दिया उनका भी बस अपना personal जो गेन है उससे related बात
01:16:16कर दी और वह भी सब खुशी के मारे celebrate कर रहे हैं दस बेटी के बाद एक बेटे क
01:16:21तो यह भी बहुत ही बीच में उसे नाम भी याद नहीं कंद आ रहा था उस पिता को उसके
01:16:26और च्छटे के बाद नाम भी मिस्स कर रहा था
01:16:33क्या पुलूंँ मैं आवाक हूँ क्या पूल सकता हूँ
01:16:40मैं आपने जितने किरदार बताए इनके बारे में नहीं सोच रहा है क्योंकि ये तो जादातर परफॉर्मर्स हैं
01:16:47ये सब कुछ जिस टीवी आडियन्स के लिए किया जा रहा है मैं उसके बारे में सोच रहा हूँ
01:16:52उस ओडियन्स को भी यह सब देखने में मजा आ रहा है खुशी मिल रही है
01:16:57यह कहानी किसी एक घर के नहीं है
01:17:02इसकी ओडियन्स बड़ी लंबी चौड़ी है
01:17:05और यह तो इसलिए एक्सपोज हो रहा है क्योंकि ग्यारवा था अक्सर जो तीसरी चौती
01:17:10यह इसलिए एक्सपोज हो रहा है क्योंकि यह जो दस थी इनकी प्रूढ़त्या नहीं कर दी गई
01:17:18नहीं तो अक्सर आप जिसको घर का तीसरा या चौता बच्चा समझते हो साथवा या आठवा होता है
01:17:28आप अगर इस पर करेंगे बहुत पहले बीस साल पहले का सरवे आज का नहीं कि शायद तीन चौताई भारती
01:17:40ये घरों में जो सबसे छोटा बच्चा होता हो लड़का होता है
01:17:46तीन चौताई या शायद उससे भी ज्यादा जो घर का सबसे छोटा बच्चा होता हो लड़का होता है
01:17:53जो इस वो रिशारा करता है कि शायद लड़की तब तक मारी जाती है जब तक अंतता लड़का ना पैदा
01:17:59हो जाए
01:18:00और फिर जब वो पैदा हो जाता है तो फिर पैदा करने कारिकरम माबाप रोग देते हैं
01:18:06तो आप जिसको कहते भी हो ना कि चार बच्चे हैं तीन बहनों के बाद चौथा भाई पैदा हुआ
01:18:12वो शायद तीन बहनों के बाद नहीं च्छे बहनों के बाद पैदा हुआ है
01:18:16पर शोर इसने नहीं मच रहा क्योंकि वो तीन है वो दिखाई नहीं दे रही
01:18:21तीन भेने दिखाई दे रही है, तीन दिखाई नहीं दे रही है, तो इसले पता नहीं चल रहा है कि
01:18:24यह सात्वा बच्चा है
01:18:32भारत की आबादी में इसे पता है न कितनी महिलाएं गायव हैं, चार से पांच करोड़
01:18:38चार-पांच करोड गायव हैं और दो-चार लड़कियां इधर-उधर हो जाएं तो हम कहते हैं अरे-अरे-अरे
01:18:43-अरे लड़कियों की मौत हो गई, लड़कियों कोई उठा ले गया
01:18:47चार-पांच करोड लड़कियों की भूर्ण हत्या करिये हमारे देश ने
01:18:51इससे बड़ी जनोसाइड क्या होगी
01:18:582011 कि आप जनगणना देख लीजिए और अभी होगी
01:19:02शायद एक दो साल में फिर से होगी उसमें से भी आकड़े देख लीजिएगा
01:19:22बजसे खोगगशजद्ट
01:19:23कर देख लीजिए लीजिएक बगने का देख लीजिए
01:19:27झाल झाल
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