00:00सिकंदर युनान से चल करके, सब पार करके, तुर्की, अरब, इरान, अफगान, भारत के द्वार तक पहुँच गया
00:08राजा पुरू थे, पंजाब के पास के, पुरस बोलते हैं जिनको
00:13वो हार गये, क्योंकि बहुत थोटा सा उनका राजय था, और सिकंदर तो विश्य वजय था, सिकंदर महान
00:20और उतनी बड़ी सेना को, पुरस की छोटी सी सेना ने मस्त टक कर दी
00:24इनको बांध करके, खड़ा किया गया सिकंदर के सामने
00:28सिकंदर की उम्मीद थी कि ये भीख मांगेगा कि माफ कर दो, क्योंकि सिकंदर सीधे साफ कर देता था
00:34सिकंदर की अदाई नहीं थी कि कि किसी को पकड़ ले और छोड़ दे, कुछ नहीं
00:40सिकंदर की भी आदत थी देखने की कि लोग आते हैं गिलगडाते हैं पैरों में पढ़ते हैं
00:44माफ कर दो माफ कर दो सब ले लो हमें हमें छोड़ दो और उसको लाया गया
00:49सिकंदर ने मुस्कुरागर पूझा हाँ वही तेरे साथ क्या सुलूक किया जाए
00:53पूरस ने का वही जो एक राजा दूसरे राजा के साथ करता है उस जवाब ने सिकंदर को आपस लोटा
00:59दिया
01:01सिकंदर ने का दया का मतलब होता है कमजोरी और अभी तो मैं भारत की सीमा पर हूँ शुरुआत हुई
01:10है
01:13यहाँ लोग कमजोर नहीं है अगर पूरस ने भीख मांग ली होती तो सिकंदर सीधे मगधतर पहुँच जाता
01:26नहीं चाहिए दया दया की भीख अहंकारी ही मांग सकता है अहंकारी दया की भीख मांगता है कि कहीं मेरा
01:35कुछ छिन न जाए जो तन के खड़ा है उससी छिन जाने कोई डर नहीं कि अंदर कुछ बात समुझ
01:40में आई
01:43यहाँ उलजना ठीक नहीं है
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