00:00पाक में हलकी हलकी हुआ चल रही थी। बच्चे खेल रहे थे, प्रिंदे चहचहा रहे थे। मगर एक बेंच के
00:07पास माहौल कुछ और ही था। एक सास और बहु आपस में बहस कर रही थी। सास घुसे में बोले,
00:14तुम कभी मेरी बात नहीं समझती। दोनों की आवाज उंची
00:19होने लगी। लोग रुख कर देखने लगे। तभी दरख्त के पीछे से एक नर्म सा सायन मुदार हुआ। सुनो लिपर्ड
00:27आ गया। वो खामोशी से उनके पास आया। पहले इसने दोनों को गोर से देखा। फिर आसमान की तरफ इशारा
00:35किया। उपर प्रिंदे एक साथ
00:38थोड़ रहे थे। कोई आगे कोई पीछे। मगर सब साथ थे। सुनो लिपर्ड ने अपनी जेब से एक बोर्ड निकाला।
00:47बोर्ड पर लिखा घर महबबत से बनता है जिद से नहीं फिर इसने दिल पर हाथ रखा। और दोनों की
00:54तरफ मुसकरा कर देखा। सास और बहु �
00:57खामोश हो गई। उन्होंने एक दूसरे की आँखों में देखा। बहु ने आहिस्ता से कहा। उमी जी अगर मैं गलत
01:04हों तो मुआफ कर दी। उसास की आँखे नर्म हो गई। उन्होंने बहु का हाथ पकड़ा और कहा। सुनो लिपर्ड
01:11ने खुशी से तालियां बजाए
01:13और स्क्रीन पर अलफास चमकने लगे, मिल जल कर रहने में ही सुकून है, सुनो लिपर्ड आहिस्ता आहिस्ता मंजर से
01:20गाइब हो गया। मगर दिलों में पियार का पैगाम छोड़ गया।
Comments