00:00नूर के तूफान का दर्वाजा पूरी तरह खिल चुका था गार के अंदर सुनहरी रोशनी लहरों की तरह दिवारों पर
00:06फैल रही थी। हुआ में अजीब सी तवानाई महसूस हो रही थी।
00:11शबा ने आहिस्ता आवाज में कहा, साली, ये जगा आम नहीं, यहां कोई कदीम ताकत जाग रही है। अचानक जमीन
00:20पर बना एक पुरसरार निशान चमकने लगा। साली ने जैसे ही इस पर कदम रखा। पूरा गार लरज उठा। दिवारों
00:28पर कदीम जंग के मनाजिर जाह
00:40दी, साली, तुम सिर्फ रोशनी की महाफिज नहीं, तुम इस कदीम ताकत की वारिस हो। शबा हैरान रह गई। तो
00:50किया। तुम्हारी ताकत हमेशा से तुम्हारे अंदर थी, साली की आँखों में सफेद चमक दोड़ गई। इसके हाथों में बिजली
00:58की लकीरें तेज हो
01:10इसकी आवाज गरज की तरह गुंजी। मगर मुकमल ताकत अभी तुम्हारे काबू में नहीं, इसने सिया तुफान छोड़ा। चटाने तूटने
01:20लगे। जमीन हिलने लगी। शबा ने पूरी ताकत से हुआ का हिसार बनाया। साली ने सफेद बिजली को काबू करके
01:28एक स
01:40आँखों में पहली बार खौफ नजर आया। ये नामुम्किन है। वो धुंद बन कर गाइब हो गया। गार के मरकज
01:49में एक रोशन गोला आहस्ता आहस्ता नीचे उत्रा। साली ने मजबूत आवाज में कहा ये इखताम नहीं। ये लेवल फौर
01:57का आगाज है।
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