00:00एक दिन पिंक पैंथर पार्क में स्टैर कर रहा था। आस्मान साफ था लेकिन लोग कुछ उदास लग रहे थे।
00:06अचानक उसे एक छोटा सा चिराग मिला जिस पर खुबसूरत लिखा था। बिस्मिल्लाह। पैंथर ने इसे सम्मान से उठाया और
00:14तभी चिराग से एक नरम
00:16रोशनी फैली। जहां जहां रोशनी गई वहां लोगों के चहरे खिलने लगे। एक बच्चा हसने लगा, एक बुजूर्ग को शांती
00:24मिली। पैंथर ने आस्मान की ओर देखा और शुक्रिया अदा किया। अचानक एक शरारती साया आया और रोशनी को बुझाने
00:32की कोश
00:45थे। अधर ने कैमरे की ओर देखा और आस्मान में एक शब्द चमका। शुक्र।