00:07जियोतिशी द्रिश्टिकोंड से मार्च दोयारचपविस का पहला सप्ता खगोली और धार्मी घटनाओं के कारण बहग खास है
00:13एक और पुड़े देश में होली की तेयारिया और उत्साह चरम पर है तो दूसरी और इसी दोरान साल का
00:18पहला चंदरगढ़ान भी लग गया था
00:19खास बात यह रही कि 3 मार्च दोयारचपविस को लगा या चंदरगढ़ान फालगुन प्रणीमा यानि होली का दहन की तिथी
00:25पर ही हुआ था
00:26गरहन अब बीच चुका है लेकिन उस समय लोगों के मन में एक बड़ा सवाल था
00:29च्या होली पर गरहन का साया रहेगा क्या धार्मिक परमपराओं और उत्सव की विधियों पर इसका कोई परभाव पड़ेगा
00:35इनी सवालों को लेकर देश भर में चर्चा भी हुई और कई लोगों ने जोतीशी मार्ग दर्शन की और रुख
00:39भी किया
00:40नमस्कार आप देख रहे हैं One India Hindi और मैं हूँ आपके साथ शीवम
00:44जो तीशा चारियों के अनुसार इस वर्ष रंगों की होली आज यानी चार मार्च को मनाना अधिक शुब और लाबकाड़ी
00:53रहेगा
01:05लेकिन इस वर्ष गरहन के कारण तीथियों और शुब मुहरत में विश्य साउधानी बरतने की आवसेक्ता है
01:11शास्त्रिय परंपराओं के अनुसार होली का देहन के अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है
01:15लेकिन इस वर्ष इस्तिती सामाने नहीं रही
01:17तीन मार्च को दो पहर बाद चनरण लगा और उसका सूतक उसी दिन सुबह से ही प्रभावी हो गया था
01:22शास्त्रों में सूतक काल को शुब कारेओं के लिए वर्जित माना जाता है
01:25इसलिए इसे लेकर विश्य साउधानी बरतन की हिदायत दी गई थी
01:28इसी कारण बिद्वानों की राय थी कि हुली का देहन दो मार्च की शाम या फिर तीन मार्च की सुबह
01:33गरहन शुरू होने से पहले शुब महुरत में किया जा सकता है
01:36हलांकि तीन मार्च को रंग खेलने से बचनी की शलाह दी गई क्योंकि सूतक काल प्रारंब हो चुका था
01:41धार्मिक मानेताओं के अनुसार सूतक के दौरान उत्सव, हर्सुलास और मांगली कारेों से दूरी रखना ही उचित माना जाता है
01:47चार मार्च को किसी भी परकार का गरहन या सूतक प्रभाव नहीं रहेगा, इसलिए आज के दिन रंगों की होली
01:52मनाना पुर्णिता शुब है
01:53गरहन का प्रभाव तीन मार्च तक ही सिमित था और अब वतावरन किसी भी शुब कारे के लिए पूरी तरीके
01:59से समाने हो गया है
02:00परंपरा के अनुसार होली खेलने का सरवत्तम समय सुबह से दो पहर तक का होता है
02:04विशेश रूप से सुबह आठ बजे से लेकर दो पहर बारा या एक बजे तक का समय सकारात्मक उर्जा और
02:09शुबता से भरपूर माना जाता है
02:11वहीं दो पहर के बाद अध्यतिक उधम या देर शाम तक रंग खेलना शास्त सम्मत नहीं माना जाता है
02:16इसलिए चार मार्च को सुबह के समय ही मर्यादित और आनंदपुन तरीके से होली का उत्सव मनाना श्रेष्ट रहेगा
02:22धार्मिक मानिताओं के अनुसार सुतक काल में भोजन पकाना, किसी नए कारे की शुरुवात करना और उत्सव मनाना वर्जित माना
02:28जाता है
02:28रंगो की होली एक सेलिब्रेटिव टेडिशन है जिसमें हसी ठिठोली, संगीत और सामोहिग आनंद शामिल होता है
02:34इसलिए इसे सुतक के दवरान उचित नहीं माना जाता
02:37चुकि तीन मार्च की सुबह से सुतक काल परभावी हो गया था
02:40ऐसे में उस दिन रंग खेलना शास्तरों के अनुसार कहीं से भी ठीक नहीं था
02:43परंपरा के अनुसार गरहन समाप्त होने के बाद असनान और दान करने की विदी मनाई जाती है
02:48और उसके पश्चात ही सामान तथा मांगली कारे फिर से आरम किये जाते हैं
02:52जो तिशाचारेओं के अनुसार गरहन काल को आधात्मिक साधना, मंत्र जाप और ध्यान के लिए श्रेष्ट समय माना जाता है
02:58इस अवधी में व्यक्ति को सकारात्मक उढ़जा गरहन करने और नकारात्मक्ता से दूर रहने का प्रयास करना चाहिए
03:04कई विद्वानों की राय यही रही कि चार मार्च यानि आज के दिन होली मनाना अधिक सूब रहेगा
03:09ताकि गरहन के परभाव से बचते हुए परंपराओं का पालन भी किया जा सके
03:12धार्मिक मानेताओं के अनुडूप तिथी और महरुत का ध्यान रखना आवश्यक होता है
03:17इसी कारण मार्च दोजाटशबड़ों की होली खगोली इघटनाओं के चलते विशेश महत्यों की है
03:21यदि परंपराओं और जियोतिशिय निर्देशों का पालन किया जाए तो यह पर्व केवल उल्लास का उसर नहीं
03:26बलकि आध्यात्मिक संतुलन और सकारत्मक्ता का शंदेश भी देता है
03:30ऐसे ही तमाम बड़ी खबड़ों के लिए बने रही हमारे साथ
03:33और आपको और आपके परिवार को होली की धेड़ सारी शुब कामना है
03:36देखते रहिए One India Hindi
03:38नमस्कार
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