Skip to playerSkip to main content
मार्च 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लगा, और इसी दिन फाल्गुन पूर्णिमा भी थी। ऐसे में लोगों के मन में बड़ा सवाल उठा—क्या ग्रहण के कारण होली की तारीख या समय में बदलाव होगा? क्या सूतक काल में रंग खेलना उचित है?
इस वीडियो में हम आपको बताएंगे कि चंद्र ग्रहण का होली पर क्या प्रभाव पड़ा, 3 मार्च को रंग खेलना क्यों वर्जित माना गया, और 4 मार्च को होली मनाना क्यों अधिक शुभ बताया जा रहा है। साथ ही जानिए सही मुहूर्त, सूतक काल का महत्व और ज्योतिषाचार्यों की क्या है राय।
अगर आप भी जानना चाहते हैं कि ग्रहण के बाद होली कब और कैसे मनाएं, तो यह वीडियो अंत तक जरूर देखें।

#Holi2026 #ChandraGrahan #ChandraGrahan2026 #HoliDate2026 #GrahanEffect #HoliAfterGrahan #SutakKaal #HoliUpdate #HoliTiming #HoliMuhurat #JyotishNews #AstrologyHindi #FestivalUpdate #HoliSpecial

~HT.410~GR.506~GR.122~

Category

🗞
News
Transcript
00:07जियोतिशी द्रिश्टिकोंड से मार्च दोयारचपविस का पहला सप्ता खगोली और धार्मी घटनाओं के कारण बहग खास है
00:13एक और पुड़े देश में होली की तेयारिया और उत्साह चरम पर है तो दूसरी और इसी दोरान साल का
00:18पहला चंदरगढ़ान भी लग गया था
00:19खास बात यह रही कि 3 मार्च दोयारचपविस को लगा या चंदरगढ़ान फालगुन प्रणीमा यानि होली का दहन की तिथी
00:25पर ही हुआ था
00:26गरहन अब बीच चुका है लेकिन उस समय लोगों के मन में एक बड़ा सवाल था
00:29च्या होली पर गरहन का साया रहेगा क्या धार्मिक परमपराओं और उत्सव की विधियों पर इसका कोई परभाव पड़ेगा
00:35इनी सवालों को लेकर देश भर में चर्चा भी हुई और कई लोगों ने जोतीशी मार्ग दर्शन की और रुख
00:39भी किया
00:40नमस्कार आप देख रहे हैं One India Hindi और मैं हूँ आपके साथ शीवम
00:44जो तीशा चारियों के अनुसार इस वर्ष रंगों की होली आज यानी चार मार्च को मनाना अधिक शुब और लाबकाड़ी
00:53रहेगा
01:05लेकिन इस वर्ष गरहन के कारण तीथियों और शुब मुहरत में विश्य साउधानी बरतने की आवसेक्ता है
01:11शास्त्रिय परंपराओं के अनुसार होली का देहन के अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है
01:15लेकिन इस वर्ष इस्तिती सामाने नहीं रही
01:17तीन मार्च को दो पहर बाद चनरण लगा और उसका सूतक उसी दिन सुबह से ही प्रभावी हो गया था
01:22शास्त्रों में सूतक काल को शुब कारेओं के लिए वर्जित माना जाता है
01:25इसलिए इसे लेकर विश्य साउधानी बरतन की हिदायत दी गई थी
01:28इसी कारण बिद्वानों की राय थी कि हुली का देहन दो मार्च की शाम या फिर तीन मार्च की सुबह
01:33गरहन शुरू होने से पहले शुब महुरत में किया जा सकता है
01:36हलांकि तीन मार्च को रंग खेलने से बचनी की शलाह दी गई क्योंकि सूतक काल प्रारंब हो चुका था
01:41धार्मिक मानेताओं के अनुसार सूतक के दौरान उत्सव, हर्सुलास और मांगली कारेों से दूरी रखना ही उचित माना जाता है
01:47चार मार्च को किसी भी परकार का गरहन या सूतक प्रभाव नहीं रहेगा, इसलिए आज के दिन रंगों की होली
01:52मनाना पुर्णिता शुब है
01:53गरहन का प्रभाव तीन मार्च तक ही सिमित था और अब वतावरन किसी भी शुब कारे के लिए पूरी तरीके
01:59से समाने हो गया है
02:00परंपरा के अनुसार होली खेलने का सरवत्तम समय सुबह से दो पहर तक का होता है
02:04विशेश रूप से सुबह आठ बजे से लेकर दो पहर बारा या एक बजे तक का समय सकारात्मक उर्जा और
02:09शुबता से भरपूर माना जाता है
02:11वहीं दो पहर के बाद अध्यतिक उधम या देर शाम तक रंग खेलना शास्त सम्मत नहीं माना जाता है
02:16इसलिए चार मार्च को सुबह के समय ही मर्यादित और आनंदपुन तरीके से होली का उत्सव मनाना श्रेष्ट रहेगा
02:22धार्मिक मानिताओं के अनुसार सुतक काल में भोजन पकाना, किसी नए कारे की शुरुवात करना और उत्सव मनाना वर्जित माना
02:28जाता है
02:28रंगो की होली एक सेलिब्रेटिव टेडिशन है जिसमें हसी ठिठोली, संगीत और सामोहिग आनंद शामिल होता है
02:34इसलिए इसे सुतक के दवरान उचित नहीं माना जाता
02:37चुकि तीन मार्च की सुबह से सुतक काल परभावी हो गया था
02:40ऐसे में उस दिन रंग खेलना शास्तरों के अनुसार कहीं से भी ठीक नहीं था
02:43परंपरा के अनुसार गरहन समाप्त होने के बाद असनान और दान करने की विदी मनाई जाती है
02:48और उसके पश्चात ही सामान तथा मांगली कारे फिर से आरम किये जाते हैं
02:52जो तिशाचारेओं के अनुसार गरहन काल को आधात्मिक साधना, मंत्र जाप और ध्यान के लिए श्रेष्ट समय माना जाता है
02:58इस अवधी में व्यक्ति को सकारात्मक उढ़जा गरहन करने और नकारात्मक्ता से दूर रहने का प्रयास करना चाहिए
03:04कई विद्वानों की राय यही रही कि चार मार्च यानि आज के दिन होली मनाना अधिक सूब रहेगा
03:09ताकि गरहन के परभाव से बचते हुए परंपराओं का पालन भी किया जा सके
03:12धार्मिक मानेताओं के अनुडूप तिथी और महरुत का ध्यान रखना आवश्यक होता है
03:17इसी कारण मार्च दोजाटशबड़ों की होली खगोली इघटनाओं के चलते विशेश महत्यों की है
03:21यदि परंपराओं और जियोतिशिय निर्देशों का पालन किया जाए तो यह पर्व केवल उल्लास का उसर नहीं
03:26बलकि आध्यात्मिक संतुलन और सकारत्मक्ता का शंदेश भी देता है
03:30ऐसे ही तमाम बड़ी खबड़ों के लिए बने रही हमारे साथ
03:33और आपको और आपके परिवार को होली की धेड़ सारी शुब कामना है
03:36देखते रहिए One India Hindi
03:38नमस्कार
Comments

Recommended