00:09तीन मार्च दोहजार चब्विस यानि आज रात को आस्मान में एक अध्भुद और रहस्यमई नजारा देखने को मिलेगा
00:15साल का पहला पूर्ण चंदरगरहन इस दिन दिखाई देगा जो ना सिर्फ खगोलिये द्रिष्टी से खास है बलकि धार्मिक और
00:22आध्यात्मिक रूप से भी महत्तोपुन माना जाता है
00:24वैसे तो गरहन एक प्रक्रितिक खगोलिये घटना है जो प्रक्रितिकी शक्ती और उसकी अनोखी सुन्दरता को दर्शाती है
00:30जब प्रितिमी सूरी और चंदर्मा के बीच आकर अपनी छाया चंदर्मा पर डालती है तब चंदरगण होता है इस दोरान
00:36चंदर्मा लाल रंग में नजर आता है
00:38इसलिए इसे रेड मून भी कहा जाता है
00:40चंदर्गणहन के वल एक व्यज्यानि घटना भर ही नहीं है वलकि इस समय नाम जब पूजा और ध्यान का विशेस
00:45महत्तो बताया गया है
00:46लेकिन इस खास समय में खाने पीने को लेकर क्या नियम माने जाते हैं आईए जानते हैं
00:51नमस्कार आप देख रहे हैं वन इंडिया हिंदी और मैं हूँ आपके साथ शीवंग धार्मिक मानेताओं के अनुसार ग्रहन के
00:56दौरान भोजन पकाना और भोजन करना दोनों ही शूब नहीं माना जाता है
01:00मानेता है कि इस समय वातावरण में नकरात्मक प्रभाव बढ़ जाते हैं इसलिए लोग ग्रहन से पहले ही भोजन तयार
01:06कर लेते हैं और ग्रहन काल में उसका सेवन नहीं करते हैं
01:09आयरुवेदिक दिष्टिकोंड से भी कहा जाता है कि ग्रहन के समय शरीड की पाचन शक्ती कमजोर पड़ जाती है इसलिए
01:14उपवास रखना या भोजन से परहेज करना बेहतर माना गया है
01:18हलांकि जो लोग वरत नहीं रख सकते हैं उन्हें हलका और सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है ताकि
01:23स्वास्थ पर किसी भी परकाड का असर ना पड़े
01:26मानिता है कि गरहन के दोरान शरीड और मन दोनों अप एक छाक्रित सम्वेदन शील हो जाता है कहा जाता
01:32है कि इस समय पाचन क्रिया धीमी पड़ सकती है इसलिए प्याज, लहसुन, मांसाहार, शराब और भारी भोजन से परहेज
01:38करने की सलाह दी जाती है क्योंकि ये चीजे
01:40शारेडिक असहजता को बढ़ा सकती है, परमपराओं में यह भी माना जाता है कि गरहन से पहले तयार किये भोजन
01:45में तुलसी के पत्ते डाल देने चाहिए, तुलसी को पवित्र और ओशद ही गुरुन से भरपूर माना जाता है, मानिता
01:51है कि यह भोजन को सुरक्षित रख
02:10जाता है कि इस समय वातावरण का प्रभाव मा और गर्भ में पल रह शीशू दोनों पर पढ़ सकता है,
02:15इसलिए उन्हें गरहन काल में खाने पिने से परहेज करने की सलाह दी जाती है, हलांकि यह अधिक गरहन का
02:20समय लंबा हो तो स्वास्थे को ध्यान में रखते हुए गर
02:36करना अधिक उचित मना जाता है, तो कुल मिलाकर चंद्रगणहन को एक और जहां विज्ञान एक सामान खगोली घटना मानता
02:42है, वही धार्मिक परमपराव में इसे विशेश आध्यात्मिक समय के रूप में देखा जाता है, इसी वजह से ग्रहन के
02:48दोरान खाना, पीना, प
03:03ध्यान रखा जाए, तीन मार्च दोहजार चंद्रगणहन का या पूर्ण चंद्रगणहन नकेवल आसमान में एक अधभुत द्रिश्य प्रस्तूत करेगा, बलकि
03:09हमें अपनी परमपराव और वेग्यानिक सोच दोनों को समझने का औसर भी देगा, भारती समयानुसार चं�
03:18को 6 बज कर 40 बजे समाब्ध होगा, इस चंद्रगणहन की कुल अधी करीब 3 घंटे 27 मिनट की रहेगी,
03:24पीन मार्च को भारत में चंद्रगणहन का समय लगभग 6 बज कर 26 मिनट पताया गया है, चंद्रगणहन होते ही
03:30भारत के कई हिस्तों में चंद्रगणहन नजर आने लग
03:32देगा, ऐसी ही तमाम जानकारियों के लिए बने रही हमारे साथ, और देखते रही है, One India Hindi
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