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खाने-पीने को लेकर धार्मिक मान्यताएं, सूतक काल में नियमों का रखें ध्यान
ग्रहण काल में मंत्र जाप और ध्यान का विशेष महत्व, ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान और दान शुभ
ग्रहण से पहले बने भोजन में तुलसी पत्ते डालने की परंपरा,यह चंद्र ग्रहण शाम 3 :20 PM पर आरंभ और शाम को 6 : 46 PM पर समाप्त होगा.
चंद्र ग्रहण का सूतक आज सवेरे 6 बजकर 20 मिनट पर लग चुका है
भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में आज शाम को पूर्ण चंद्र ग्रहण का नजारा देखा जा सकता है

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~ED.542~HT.408~GR.506~

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00:09तीन मार्च दोहजार चब्विस यानि आज रात को आस्मान में एक अध्भुद और रहस्यमई नजारा देखने को मिलेगा
00:15साल का पहला पूर्ण चंदरगरहन इस दिन दिखाई देगा जो ना सिर्फ खगोलिये द्रिष्टी से खास है बलकि धार्मिक और
00:22आध्यात्मिक रूप से भी महत्तोपुन माना जाता है
00:24वैसे तो गरहन एक प्रक्रितिक खगोलिये घटना है जो प्रक्रितिकी शक्ती और उसकी अनोखी सुन्दरता को दर्शाती है
00:30जब प्रितिमी सूरी और चंदर्मा के बीच आकर अपनी छाया चंदर्मा पर डालती है तब चंदरगण होता है इस दोरान
00:36चंदर्मा लाल रंग में नजर आता है
00:38इसलिए इसे रेड मून भी कहा जाता है
00:40चंदर्गणहन के वल एक व्यज्यानि घटना भर ही नहीं है वलकि इस समय नाम जब पूजा और ध्यान का विशेस
00:45महत्तो बताया गया है
00:46लेकिन इस खास समय में खाने पीने को लेकर क्या नियम माने जाते हैं आईए जानते हैं
00:51नमस्कार आप देख रहे हैं वन इंडिया हिंदी और मैं हूँ आपके साथ शीवंग धार्मिक मानेताओं के अनुसार ग्रहन के
00:56दौरान भोजन पकाना और भोजन करना दोनों ही शूब नहीं माना जाता है
01:00मानेता है कि इस समय वातावरण में नकरात्मक प्रभाव बढ़ जाते हैं इसलिए लोग ग्रहन से पहले ही भोजन तयार
01:06कर लेते हैं और ग्रहन काल में उसका सेवन नहीं करते हैं
01:09आयरुवेदिक दिष्टिकोंड से भी कहा जाता है कि ग्रहन के समय शरीड की पाचन शक्ती कमजोर पड़ जाती है इसलिए
01:14उपवास रखना या भोजन से परहेज करना बेहतर माना गया है
01:18हलांकि जो लोग वरत नहीं रख सकते हैं उन्हें हलका और सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है ताकि
01:23स्वास्थ पर किसी भी परकाड का असर ना पड़े
01:26मानिता है कि गरहन के दोरान शरीड और मन दोनों अप एक छाक्रित सम्वेदन शील हो जाता है कहा जाता
01:32है कि इस समय पाचन क्रिया धीमी पड़ सकती है इसलिए प्याज, लहसुन, मांसाहार, शराब और भारी भोजन से परहेज
01:38करने की सलाह दी जाती है क्योंकि ये चीजे
01:40शारेडिक असहजता को बढ़ा सकती है, परमपराओं में यह भी माना जाता है कि गरहन से पहले तयार किये भोजन
01:45में तुलसी के पत्ते डाल देने चाहिए, तुलसी को पवित्र और ओशद ही गुरुन से भरपूर माना जाता है, मानिता
01:51है कि यह भोजन को सुरक्षित रख
02:10जाता है कि इस समय वातावरण का प्रभाव मा और गर्भ में पल रह शीशू दोनों पर पढ़ सकता है,
02:15इसलिए उन्हें गरहन काल में खाने पिने से परहेज करने की सलाह दी जाती है, हलांकि यह अधिक गरहन का
02:20समय लंबा हो तो स्वास्थे को ध्यान में रखते हुए गर
02:36करना अधिक उचित मना जाता है, तो कुल मिलाकर चंद्रगणहन को एक और जहां विज्ञान एक सामान खगोली घटना मानता
02:42है, वही धार्मिक परमपराव में इसे विशेश आध्यात्मिक समय के रूप में देखा जाता है, इसी वजह से ग्रहन के
02:48दोरान खाना, पीना, प
03:03ध्यान रखा जाए, तीन मार्च दोहजार चंद्रगणहन का या पूर्ण चंद्रगणहन नकेवल आसमान में एक अधभुत द्रिश्य प्रस्तूत करेगा, बलकि
03:09हमें अपनी परमपराव और वेग्यानिक सोच दोनों को समझने का औसर भी देगा, भारती समयानुसार चं�
03:18को 6 बज कर 40 बजे समाब्ध होगा, इस चंद्रगणहन की कुल अधी करीब 3 घंटे 27 मिनट की रहेगी,
03:24पीन मार्च को भारत में चंद्रगणहन का समय लगभग 6 बज कर 26 मिनट पताया गया है, चंद्रगणहन होते ही
03:30भारत के कई हिस्तों में चंद्रगणहन नजर आने लग
03:32देगा, ऐसी ही तमाम जानकारियों के लिए बने रही हमारे साथ, और देखते रही है, One India Hindi
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