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यह वीडियो 10 जनवरी, रात 11 बजे, भुवनेश्वर में आयोजित सत्र के बाद हुई बातचीत से लिया गया है।
विषय: भारतीय शिल्पकला के पीछे निहित दर्शन।
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Transcript
00:00जो जो प्राचीन भारती आर्गिटेक्चर भी है उस में भी सिर्फ शिल्प मत देखो कि शिल्प कैसा ये है वो
00:08है उसमें भी फिलॉसफी है जो समझनी देखनी दरूरी है चेरे पर देखो तुम एकसाइटमेंट नहीं है अगर हर शह
00:18अगर आनन्द है तो सब कुछ में है प�
00:29यह नहीं हुआ है कि जानवर को मार के उसकी लिपस्टिक लगाई है और अब आपको मिरर में देखके खुश
00:36हो रही है।
00:37If there is happiness, it's a total happiness.
00:40पूरी प्रक्रति एक साथ खुश है।
00:44एक जनरल लचक है।
00:46वेखरे हो, जैसे जैसे नदी का भाव।
00:51लेकिन चहरे पर ऐसा नहीं है कि बिलकुल दाथ दिखाती कोई हसी है।
00:55या कि दोनों हाथ उपर उठा रखे हैं और एक उनमाद अचाया हुआ है।
01:01उनमाद कहीं नहीं है।
01:03सहज ग्रामीर जीवन है।
01:05यहां पर कुछ अपने उपर रखा हुआ है।
01:07कुछ कलश जैसा है।
01:11साधारन कपड़े पहन रखे हैं जो किसी सब है।
01:14किसी सब मैला ही पहनती होंगी।
01:17कपड़ों में भी ऐसा नहीं लेकरा कि कुछ प्रशन करिया जा रहा है।
01:21बहुत सजने सबरने की खाहिश नहीं है।
01:24शरीर जैसा है।
01:25इन कपड़ों में भी सपष्ट है।
01:30मतब जो बिकमिंग की हवस है ना पश्चिम में।
01:34जो है उससे हटके कुछ और बन जाए।
01:38वो बिकमिंग भारती दर्शन में कहीं नहीं है।
01:44क्या बिकमिंग की है।
01:47जो है जो है ऊक्या जाए मृल्य में एक चर थे जो है।
01:50जो है जो बिकमिंग क्णेशन
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