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Transcript
00:00जब कहीं कोई पती अपनी पतनी की या पतनी अपने पती की या प्रेमी अपनी प्रेमिका की हत्या कर देता
00:06है तो हम बहुत जो शोर मचाते हैं वो शोर मचाके कहीं हम खुद कोई नहीं चाहते हैं कि हम
00:11ठीक हैं हम ठीक हैं सहाब जितनी गड़बर हुई है उधर हुई हम ठीक
00:16मैं कितनी बार बात कर चुका हूँ
00:18उन सब बच्चीयों की जो जन्म लेतने से पहले
00:24या जन्म लेते समय मार दी जाती है
00:26उनकी हत्या कोई बात करता है
00:28वही रर्की बड़ी हो जाए 18-18 साल की हो जाए
00:30फिर उसकी हत्या हो जाए तो आप बहुत शोर मचाओगे
00:33आप बस उस अत्या की बात करना चाहते हो
00:37जो रोश्नी में आ गई है
00:39इस अब इसी लिए क्योंकि ये नया है यह नहीं
00:42आप ऐसे ही जीए हो बच्चपन से
00:44कुछ नया नहीं हो रहा है
00:46बस भीतर की हिंसा को अज्ञान को
00:50खोखले पन को प्रकट होने का
00:53एक नया मौका मिल गया है
00:55लड़की को लड़का मिल गया है
00:56लड़के को लड़की मिल गई है
00:58वही चीज जो वो आठ साल की उमर में
01:01प्रकट करता था एक तरीके से
01:03अब वो 28 की उमर में प्रकट कर रहा है
01:05दूसरे तरीके से कुछ नया नहीं हो गया है
01:07आठ की उमर में भी उसे जो खटिया गंधी शिक्षा मिली है अमारे समाज से, वो उस पर ही चल
01:13रहा था और अभी भी वो उसी पर चल रहा है, वो कोई व्यत्थी नहीं है जो हिंसा कर रहा
01:18है, वो हमारे ही दौरा दी गई शिक्षा और संस्कारों का एक उतपाद है, एक स्पि
01:24सिमन भर है उसे हमने ही तायार करा है रिष्टों की एक ही स्वस्थ बुनियाद हो सकती है वो है
01:31प्रेम
01:33प्रेम के नाम पे हम बस पशुता जानते हैं, क्योंकि प्रेम तो अध्यात्मी की होता है, अध्यात्म से हमारा कोई
01:39लेना देना नहीं, प्रेम के नाम पे हम बस बंधन जानते हैं, बंधनों में प्रेम हो नहीं सकता, प्रेम मुक्ते
01:45का दूसरा नाम है, मुक्ते से हमारी रू
01:47हुकापती है
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