00:00भारत का संघर्ष भारत की लड़ाई उन्होंने पूरी दुनिया में जाके लड़ी
00:05लड़ाई भारत की लड़ वो भारत से बाहत जहां जहां हो सकता हर जगह रहे
00:10दुनिया भर में हर जगह जहां हो सकता था वहां से सहता पाने की कोशिश की
00:14कहीं मिली कहीं नहीं मिली पर उनका संघर्ष ये था वत्रा और हम कह रहे थे कि यहीं नहीं देखा
00:19जाना चाहिए कि आई एने की पराजय हो गई
00:22तीन सो आयने के कैदी थे अंग्रेजों को उन्हें छोड़ना पड़ा
00:27क्यों छोड़ना पड़ा प्योंकि भारत में जबरदस्त आक्रोश उठ रहा था कि इनको कुछ नहीं होना चाहिए
00:33दिल्ली में मुकत्मा चल रहा था उन सब को फिर माफी दी गई
00:35इन्हें कुछ नहीं होना चाहिए
00:37क्याते हैं कि जो कारण थे जिनकी वज़े से अंग्रेजों ने भारत को छोड़ा कई कारण थे
00:41एक तो यह कि दूती विश्यूत के बाद ब्रिटेन दुर्बल हो गया था
00:44एक यह कि लेबर पार्टी की सरकारा गई थी एकली का नजरिया दूसरा था
00:49और एक बड़ा कारण यह भी था कि जो यह ट्रायल हुआ था आयने के प्रिजनर्स का
00:56उसमें भारत का जो आक्रोश था उसने अंग्रेजों को दहला दिया था
01:01और भी वह था नेवल म्यूटनी एक होई थी तो हम कैसे जान ले कि आयने सफल रहा क्या सफल
01:07रहा बताओ तो
01:08दिनकर कहते हैं न विजय क्या जानिये बस्ती कहां है विभा उसकी अजय हस्ती कहां है बसीव है जीत के
01:17हुंकार में है छिपी या वो लहू की धार में है
01:22कई बार विजय जीत के हुंकार में नहीं होती
01:24कई बार विजय लहू की धार में छुपी होती है
01:27हमको देख के लगेगा कि हार हो गई
01:29हार नहीं होई है जीत होई है
01:31वो आपको बाद में पता चलता है जीत कैसे होई है
01:34वो बाद में पता चलता है
01:35क्योंकि अध्यात्म का अर्थी ही होता है आगे बढ़ते रहो चरैवेती चरैवेती जब मुक्ति नहीं है अभी तो यात्रा कैसे
01:45रुक गई अभी तो यात्री ही रहे जीवन पर और उनके जैसी यात्रा बहुत कम लोग करते हैं
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