00:00अजराजी मेरे जो सवाल है हमारे समाज में वो पुरुषों के लेकर एक छवी बन गए कि मर्द को दर्द
00:06नहीं होता वैसे करके तो मतलब ऐसे हो क्यों हो रहा है
00:08कोई पुरुष रो पड़े तो तुरंद बोलोगे ये ना सौफटी है तो और महिला कड़क हो जाए तो बोलेंगे बड़ी
00:15मर्दानी बन रही है
00:17तुम जंगल में जाओ तो वहां नर और मादा में कोई बहुत अंतर थोड़ी कर पाओगे
00:23क्या तुम जानते हो कि शेरों में शिकार का ज्यादा तर काम कौन करता है
00:28शेर नी
00:30वो शेर बस अपनी दाड़ी बढ़ा ही घुमता रहता है
00:33वो बस फोटोग्राफी के और नैशनल जोग्रफिक के काम आता है
00:37होमो सेपियन्स अकेले हैं
00:40जिन्होंने भयानक जंडर डिस्टॉर्शन करा है
00:43माने कोई बाहरी किसी ग्रह से वेक्ते आए
00:47विशेशकर एक हिंदुस्तानी पुरुष और एक हिंदुस्तानी इस्तरी को देखे
00:51तो कहेगा यह स्पीशीज दो अलग-अलग है
00:54सब कुछ ही अलग है
00:55एक के बाल लंबे एक के नहीं है
00:57एक ने जिम जा जाके अपने को ऐसा चोड़ा कर लिया है
00:59और दूसरी अपना घर में पढ़ी रहती है
01:01कुछ करती नहीं वो और ऐसी टिटेहरी हो गई है
01:04एक गरजता है वो एक थर्राती है
01:06बोले ये दोनों सेम स्पीशीस कैसे हो सकते है
01:10ये प्रजाती है ये अलग-अलग है
01:12ये विक्रत ही हमने पैदा करी है
01:14हमने स्तरी पुरुष को प्रजाती अलग-अलग बना दिया
01:17ठीक वैसे जैसे स्तरी को गरजना वरजित है
01:21वैसे ही पुरुष को रोना वर्जित है
01:23पुरुष रोई तो उसको बोलोगे
01:25है चूडियां पहन के आ गया
01:28अचा चूडियां अगर
01:30इतनी हे बात होती है
01:32कि चूडि गाली जैसी बात है
01:33तो यह सब महलाओं को चूडि काई पहनाते रहते हो
01:36जो तुमारे लिए गाली है
01:38वो उसका अभूशन हो गया
01:39अगर उस अचमुच गाली है चूडि
01:41तो सबसे पहले उसकी चूडियां उतारो
01:43तो एक स्क्रिप्ट रची गई है
01:45जिसके आधार में ही अंधेरा है
01:49जिसमें
01:49इस्तरी को उतना भावुक
01:51बना दिया जितनी भावुक वो है ही नहीं
01:54और जब तुम
01:55स्तरी को अतिकोमल दिखाना चाहते हो
01:58तो पुरुश को अतिकठोर भी दिखाना पड़ेगा
02:00पुरुश कैसा है
02:01बिलकुल
02:02वज्जर जैसे बाहुदंड
02:05लोहे जैसी छाती
02:07ये कैरिकेचर्स है
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