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Transcript
00:00जो क्लास के टीचर्स होते थे और जो कोचिंग के टीचर होते थे उनके स्तर और ख्षमताओं में बहुत अंतर
00:05होता था
00:06तब ही तो क्लास वाले टीचर की क्लास खाली जाती थी
00:09वहाँ कोई जाते ही नहीं था, मैं 11-12 की बात कर रहा हूँ, वहाँ कोई नहीं जाता था
00:13और सब बंक करकर के कहा बैठी होते हैं तो ट्यूशन सेंटर में
00:18आज UPSC के टीचर्स की बड़ी माननेता हो गई है
00:22लेकिन आप UPSC का syllabus लो तो वो तो UGPG लेवल का ही होता है
00:26ऐसा क्यों हो रहा है, कि graduates और post graduates है
00:31जो पहले ही अपना UGPG का syllabus पढ़ चुके हैं
00:35पढ़ तो चुके हैं ना तभी तो डिगरी मिली होगी
00:37अब उसके बाद जब उन्हें UPSC लिखनी होती है तो वो अलग से coaching लेते हैं
00:41जो कि वो तथा कथित रूप से अपने college में पहले ही पढ़ चुके हैं
00:45डिगरी पा चुके हैं, ये क्या बात है
00:48क्योंकि आपको university में जिस professor ने पढ़ाया था
00:51उस professor के इस्तर में और coaching में जो आपको philosophy पढ़ाते हैं
00:55उनके इस्तर में जमीन आसमान का अंतर है
00:58कुछ बहुत गौर और शाली अपवाद जरूर है
01:02मैं उनकी बात नहीं कर रहा
01:04आज भी विश्युद्यालेयों में कुछ बहुत सच्चे और ज्यानी professors होते हैं
01:12और उनके प्रते मेरा पूरा सम्मान है
01:13लेकिन हम बात भौमत की कर रहे हैं
01:16जादा तर कैसे हैं
01:18किसी भी देश के पिछडे पन का बड़े से बड़ा कारण होता है
01:22उसकी यूनिवर्सिटीज का पिछड़ा हुआ होना
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