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यह वीडियो 16 फरवरी, 2026 को आयोजित बोध प्रत्यूषा सत्र से लिया गया है।
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Transcript
00:00मैं आठवी में था, तो बहन मेरी जाके पता नहीं कहां से वो जाने स्मॉल पॉक्स, चिकन पॉक्स कुछ ले
00:06आई
00:06पूरे शरीर पर वही पॉक्स ही पॉक्स, दाने दाने दाने दाने और उनमें पानी भरा हुआ है
00:12फाइनल एक्जाम आपको पता है किस महीने में होते हैं
00:15अब मार्च में होते हैं
00:16पहले एप्रिलेंड में होते थे
00:18तो लखनव और वो अप्रेल के अंत का समय
00:21और मैं साइकल से स्कूल जाता था
00:23और मेरी माने बिलकुल नहीं कहा है कि एक्जाम नहीं देने
00:25इस साल भर तुमने पढ़ाई करी है और वो मुझे नहला देती थी सुबह और नहला के इतना सारा पाउडर
00:31मेरे मुझे लगा देती थी ताकि वो पता न चले
00:33पर मैं जाता था मैं एक्जाम दे के आ जाता था आखिरी एक्जाम था चले में खड़े हुए थे वो
00:51तो आट शाढे आट बजे का भी सूरज तब कड़ा होने लग जाता है
01:03जो रोट पे बैठा दो, मैं वहाँ एक्जाम दे लूँगा, तो उन्हों नहीं देने दिया, अब इस बात को देखने
01:08के मुझे पता है, बहुत सारे पहलू हो सकते हैं, और आप देख भी सकते हैं, पर एक बात, मुझे
01:14यह हमेशा से इस पश्क थी, मुझे कोई सर पे नहीं �
01:16चढ़ाने वाला, तुम्हें स्मॉल पॉक्स हुआ है कि लार्ज पॉक्स हुआ है, एक्जाम तो नहीं छोड़ोगे तुम, और जब मैं
01:22वापस आया आखरी दिन, बुलते हैं, छूट गया तो छूट गया, रो क्यों रहे हो, जाओ सो जाओ, आराम करो,
01:30बीमारी छोटी ची�
01:32है, बस इतनी सी बात थी, ये बात माबाप व्यवहारिक तरीके से मेरे भीतर बैठा रहे थे, मैं अगर यहाँ
01:42पर जो माबाप बैठे हैं, मैं उनको सलाह नहीं दे रहा हूँ कि उनके बच्चे को भी बीमारी हो गई
01:46हो या स्मॉल पॉक्स हो गया हो, तो यही करें, मैं ऐस
02:02कोई प्रिस्क्रिप्शन नहीं दिया है कि ऐसा आपको भी करना है अपने बच्चों के साथ
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