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Transcript
00:00हम अपने डेली लाइफ में काफी हद तक कि अंडरस्टाइंड करते समझते हैं कि हमारे लिए क्या सही है और
00:08क्या सही हो सकता है बट फिर भी हम खुद को कमपार करने लगें
00:13हम आसक आउट करते हैं कि हम सही है या गलत है थेन वी स्टार्ट तू वार
00:17आप इसे बंदूग रख तो आप तूम बोलो एनेस्थीसिया से तू बाद में अरे गा मैं आप सुआले में सवाल
00:30में बस यह बता दिया है कि ज्ञान और मैं ज्यान आता है अच्छी अच्छी बाते होती है मैं समझ
00:35जाती हूं पर उन बातों पर चलने पाती हूं मैं तो बड
00:49जैसी दुनिया हमारी ये तो पता है कि आप जो बता रही है वो बात ठीक है बिलकुल पर यहां
00:55लोग खड़े कर रखे हैं जो कह रहे हैं कि सच और तो ठीक है हम तुमको अभी इतनी तकलीफ
01:02दे देंगे कि सब भूल जाओगी कोई किसी के उपर हावी कैसे हो सकता है जब तक �
01:07वो व्यक्तिक खुद है और पीछे खड़ा हो करके आपको थमका और राय मौत दे देंगे स्वार्थ डखैट की दी
01:16मौत बड़ी कसाई नुमा होती है और आप कहां पर हो क्या बोलोगे कैसे बोलोगे कि मजबूर थे का मजबूरी
01:24है पढ़े हो लिखे हो जवान हो स्वस्�
01:26हो जानकार हो जागरुख हो कैसे बोलोगे
02:14Namaste Aacharya Ji I am Sulagna Dev from NIFT National Institute of Fashion Technology
02:21so I have a question that we often understand what is right but intentively or yet in daily life
02:32we still act out of fear or comparison or we ask out for you know validation so my question is
02:43how
02:43does one bridge the gap between how to leave it or how to overcome that and what is the truth
02:52behind it
03:00give me an example where this happens to make it make it more intimate
03:04we were talking Hindi
03:05what would you say
03:09okay so I would like to ask this question that we understand in our daily life
03:13that we understand and understand that what is right for us and what is right for us
03:22but we also feel like comparing ourselves or fear or fear or fear or we ask out for validation
03:30if we ask out if we are right or wrong then we start to work and that is my question
03:39how to overcome that or is that a right way to go like that or what is the truth behind
03:47it
03:55What is your name?
03:57Suratna Deha Suratna
03:59Suratna
04:16Suratna
04:23आप मुझे कुछ समझाईए जो सही हो आपके इसे शेत्र संबंद्ध आप जो भी पढ़ाती है आप क्या पढ़ाती है
04:31तो आप मुझे बताया और मुझे बात समझ में आ गई इन्होंने सारी
04:46आप अपने क्षेत्र की विदुशी है अनुभाव भी है जानती है किताबें ग्यान बता दिया मुझे ठीक है बता दिया
04:53आपने क्या बता दिया ऐसा ऐसा होता है ऐसा ऐसा होता है अब तुम बोलो कि अनिस्थीसिया से तू बाद
05:05में मरेगा मैं भी मार दूँगा अनिस्थीस
05:09जैसे आप बाद में मरेंगे, पहले मैं मार दूँगा।
05:18मैं सच को मानूँ या अपनी जान बचाऊंगा।
05:20जान बचाऊंगा।
05:22और मैं आया हम सच क्यों नहीं मनते।
05:30यह तो पता है कि आप जो बता रही है वो बात ठीक है बिलकुल।
05:35पर यहां लोग खड़े कर रखे हैं जो कह रही है कि सच हो गयरा तो ठीक है।
05:42हम तुमको अभी इतनी तकलीफ दे देंगे कि सब भूल जाओगी।
05:49पर आप अपने सवाल में उनका जिकर कहीं नहीं कर रही है।
05:53आप कह रही है कि जैसे समस्या आपके और ग्यान के बीच में हो।
05:59मैं आप हूँ और आप ग्यान है।
06:02आप एनस्थीजिया वगड़ा आप मान लीजिए जो व्रह दक्षेत तरह ग्यान का उसकी प्रतिनिदिय है।
06:07आप ग्यान है। मैं कौन हूँ आप हूँ।
06:13ठीक।
06:14सवाल में किंदो की बात कर दी गई।
06:17कि ग्यान रहता है मैं फिर भी डरी रहती हूँ और मैं गलत काम कर लेती हूँ।
06:22ग्यान रहता है मैं फिर भी डरी रहती हूँ और मैं गलत काम कर लेती हूँ।
06:26मैं हूँ कौन? मैं हूँ कौन? अहंकार
06:30मैं हूँ कौन? अहंकार
06:32मैं अहंकार हूँ
06:36मेरी वैसे ही
06:38सांस रुकी रहती है
06:39मुझे पता है कि हूँ तो मैं नकली
06:41तो हर समय मुझे यही खतरा रहता है
06:44कि कहीं मैं मरना जाओ
06:47हर आत्मी को यही रहता है
06:48कोई नुक्सान न हो जाए कई मरना जाहूंं मरना माने नुक्सान यूड़ा वो जो आखरी डift होती हो सब सब्सक्राइन
06:53होती है
06:55लिकिन जो micro losses लगातार होते रहते हैं वो भी मौत जैसे ही है कुछ टू गया होट गया कुछ
07:01शूट गया कुछ नुक्सान हो गया
07:03एक तो मुझे हर समय वैसे ही ये लगा रहता है कि कुछ नुकसान न हो जाए
07:07मैं तो अहंकार हूँ
07:09ये ग्यान है ग्यान बड़ा अच्छा लगता है
07:11बढ़िया बाते बताते हैं
07:13सुनने में अच्छी लगती है
07:15तरक से समझ में भी आती है
07:19बुद्ध राजी भी हो जाती है
07:21हाँ जो बोला जा रहा है वो तो ठीकी है भाई
07:24पर ये नहीं बताया कि पीछे किसको खड़ा कर रखा है बंदूख लेकर के
07:30अगर मैं हंकार हूँ तो मैंने पीछे किसको खड़ा कर रखा होगा बंदूख लेकर आप बताइए
07:37कोई भी किसी को क्यों खड़ा करेगा पीछे बंदूक ले करके
07:40कोई क्यों खड़ा करेगा
07:42स्वार
07:44कुछ मिल रहा होगा इससे
07:46तभी मैंने
07:46आज फिर से
07:51खड़ा हो जो
07:53ठीक है
07:55कुछ इसको नाम दे देते हैं
07:56क्या नाम दे दे
07:59और और कोई बढ़िया था नाम बता
08:02अरे यार खाना
08:03ले लो ये बाइक ले लो
08:06कुछ तो नाम बताओ
08:07इनके लिए बढ़िया तो आँ नाम क्या है
08:09विने ड़का है
08:12अब ठीक है
08:14जैसी दुनिया हमारी
08:16तो इनको खड़ा कर रखा है
08:21मैं क्यों बरदाश्ट करूँगा
08:22किसी को ऐसे खड़ा करना
08:23बोलो
08:25स्वार्थ
08:27मैं हंकार हूँ
08:29गौर से बताना
08:30मेरा क्या स्वार्थ हो सकता
08:32इसको या खड़ा करना
08:34मेरे पास कौन सी चीज नहीं है
08:35जो मुझे इससे मिल रही होगी
08:37सबसे पहली चीज जो
08:39मुझे में गायब है
08:40कमी है
08:40मिसिंग है
08:41वो क्या है
08:43एक्जिस्टेंस
08:45एक्जिस्टेंस
08:47एक्जिस्टेंस
08:48हंकार कौन सी तीन चीज़ें बोलता है
08:50आई एक्जिस्ट
08:53आई डिजायर
08:54आई एक्ट
08:55आई एक्जिस्ट
08:57I desire, I act
09:02और हैं तीनों ही चीज़ हैं जूट
09:04क्योंकि न तो वो exist करता है
09:06न उसकी desires उसकी अपनी है
09:08न उसका action उसका अपना है
09:11है ना
09:14तो उसको अपनी हस्ती ही
09:16किसी और से लेनी पड़ती है
09:17लेनी पड़ती है ना
09:20अपनी कामना पूर्ती के लिए भी हो दूसरों पर आश्रित है
09:23है ना
09:24तो ये कौन होगा इनसे मुझे क्या मिल रहा होगा
09:27ये वो है जो मुझे मेरी हस्ती दे रहे है
09:30चूक कि ये मुझे मेरी हस्ती दे रहे है
09:33इसलिए मैंने इन्हें हक दे दिया है
09:35यहां मेरी कनपटी पे बंदूक रखने का
09:38यह एक ट्रेड है
09:41तुम मुझे हस्ती दो
09:43मैं तुम्हें माथा दूँगा
09:46इनसे मुझे मेरी आइडेंटीटी मिल रही है
09:48कोई छोटी मोटी चीज नहीं
09:50इगो की अपनी तो कोई आइडेंटीटी है ही नहीं
09:52तो आइडेंटीटी किस से लेती है
09:55दुनिया से लेती है
09:56जो उसे आइडेंटीटी दे वो उसके लिए बहुत बड़ा हो गया
10:00वो इतना बड़ा हो गया कि उसको बंदूक लगाने का हक मिल जाएगा
10:03कलाई मरोडने का हक मिल जाएगा
10:05मरोडो मरोडो
10:07नहीं तो मैं इसे जहटक के हटाना दूँ एक बार में
10:11निश्चित रूप से यहां कोई सौधा चल रहा है
10:13आपके सवाल में वो सौधा छुपा हुआ है
10:16यह भीमानी है छोटी सी
10:18सवाल में बस यह बता दिया है कि ग्यान और मैं
10:21ग्यान आता है अच्छी अच्छी बाते होती है
10:23मैं समझ जाती हूँ पर उन बातों पर चलने ही पाती हूँ
10:26मैं तो बड़ी मासूम हूँ
10:29यह ड़कैत
10:32इसका तो कुछ बताया ही नहीं
10:36यह वो है जिससे मुझे पहचान मिली है
10:38चूकि इसे पहचान मिली है इसलिए इसका हक हो गया मेरे उपर
10:42ये वो है जो मेरी कामनाओं की पूर्ते करता है
10:45मुझे सुक्सुविधाय देता है
10:47चूकि ये सब करता है तो इसलिए इसको अधिकार मिल गया मेरे उपर
10:52और ये बोलता है ग्यान वगरा तो ठीक है पहले मेरी सुन
10:57अब आपको अपनी जिन्दगी में जहाक कर देखना होगा कि कौन सी ताकते हैं
11:01कौन से लोग हैं जिनसे आपको नाम और पहचान मिल रही है
11:05वही हैं जिनके कारण ग्यान की और नहीं बढ़ पा रहे
11:08अब आपको अपनी जिन्दगी में देखना होगा कि डिजायर्स कहा हैं
11:11और कौन से लोग आपकी डिजायर्स पूरी कर सकते हैं या बाधित कर सकते हैं
11:17वही दिशा है जो आपको सही जिन्दगी जीने नहीं दे रही
11:21नहीं तो कोई क्यों रुकेगा
11:24कोई किसी के उपर हावी कैसे हो सकता है
11:27जब तक वो व्यक्ति खुद
11:29अपनी सहमती अनुमती
11:31कंसेंट न दे
11:33कंसेंट तो बड़ा कीमती
11:35शब्द होता है न
11:36छोटे-मूटे मातों में भी हम बोलते हैं
11:38कि कंसेंट जरूरी है
11:40तो ये तो existential crisis है
11:44कोई मेरी
11:45जिन्दगी के केंदर पे सवार हुआ जा रहा है
11:47निश्चित रूप से उसमें
11:49मेरी छुपी कंसेंट शामिल है
11:51मजबूर नहीं हूँ मैं
11:53विवश नहीं हूँ
11:55ये कहना गलत होगा कि
11:57मैं क्या करूँ मैं तो बेचारी हूँ दूसरे हावी हो जाते हैं
12:09तुम मेरी आजादी भलई ले लो पर मुझे नाम और पहचान दे दो प्लीज
12:17तुम मेरा सच ले लो तुम मेरा ज्ञान रौंद डालो
12:22लेकिन मेरी सुख सुविधाएं छिननी नहीं चाहिए
12:30ओध रोशनी सब मेरी जिन्दगी से छीन लो
12:33लेकिन मेरी कामनाएं पूरी करते रहो प्लीज
12:37यह होता है
12:40कभी कोई बोले अब तुम भगजो
12:43कभी कोई बोले
12:48कि मुझे बात समझ में नहीं आती
12:50मान लो भी यहाँ बात हुई
12:51कभी कोई बोले बात समझ में नहीं आती
12:54मुश्किल है
12:56पहले तो गीता नहीं बहुत सरल करके बोली है
12:59उसके बाद मैंने आपकी भाशा में
13:01आपके समय में और सरल करके बता दिये
13:03ऐसा नहीं है समझ में नहीं आती
13:08समझ को सुईकार नहीं करना चाहते
13:11क्योंकि स्वार्थ पर आँच आती है
13:14उसके भी आगे और लोग होती हों कहते हैं हमें तो आती है समझ में
13:18समझ में आती है पर उसको जी नहीं पाते
13:23समझ तो अपने आप स्वतह तत्काल जिंदगी बन जाती है
13:29आप अगर कह रहे हो कि समझ लेते हैं पर जी नहीं पाते तो आप जूट बोल रहे हो
13:35आप जूट बोल रहे हो
13:38जूट इसलिए बोल रहे है कोई कि समझे होते तो स्वार्थों को लात मार दी होती
13:43उन्स्वार्थों से आपको कुछ मिली नहीं रहा है
13:49कमी समझ की नहीं होती
13:53कमी सुईकार की होती है
13:56आप सुईकारी नहीं करना चाते कि आप समझ चुके हो क्योंकि अगर समझ गए तो अब इसको क्यों खड़ा कर
14:01रखा है वो क्या करेगा उसको हटाओगे भगाओगे तो अधिक से दिक क्या बोलेगा क्या बोलेगा तुमारी हस्ती चीन लूँगा
14:08अब फिजिकल हस्ती तो को�
14:22छिनने दो क्यों सवार्थो का सौधा किया हुआ है क्यों घुटने टेक हुए हैं क्यों बिनाबाद की मजबूरी पकड़ी हुई
14:38है सच और आजादी से बड़ा क्या होता है उनको बेच करके कुछ भी हासिल कर लो तो क्या हासिल
14:48कर लिया है
14:50उसके बाद कहते हो नहीं सारी अच्छी अच्छी बाते तो ठीक है
14:55गीता में जो लिखा है वो तो ठीक है
14:57सर आपने भी बाते बढ़ियां बताई
14:59लेकिन क्या है ना मैं Life में Implement नहीं कर पाती
15:03that's not a situation, that's a decision
15:11ये फैसला किया है कि ये चीज़ जिन्दगी में उतरने नहीं देंगे क्योंकि उतरे तो
15:23बात आ रही है और वो पीछे खड़ा हो करके आपको धमका और राय बार बार
15:31क्या रहा है कि हमने तुम्हे नाम पहचान और ये सब दिया है हमने दिया है तो हम छीन भी
15:37सकते हैं
15:41हमारे दम से हो तुम
15:44मौत दे देंगे
15:47स्वार्थ डकैट की दी मौत बड़ी कसाई नुमा होती है
15:51और आप कहा पर रहें
15:56क्या करना है
15:59तुम चाप आगे बढ़ जाओ
16:02उसको बोलो कर ले जो कर सकता है
16:04जो असली है
16:07वो तु छीन नहीं सकता
16:09जो नकली है वो तु छीन ले वो तो वैसे भी नकली है तो मेरा बिगडा क्या
16:14छीन ले जो छीन सकता है जो कुछ छीन सकता है
16:17वो फाल्तूगा ही होगा, जो फाल्तूगा था, वो तुने छीन लिया, मेरा बिगड़ा क्या, ले ले, भला हुआ मुरी मटकी
16:24फूटी, अब मैं पनिया भरन से छूटी,
16:30मुझे मैं आ रही है बाती है, ले जाओ जो ले जा सकते हो, इनसान वही है, जिसको एक बार
16:38सच्चाई दिख गई तो उससे मूह नहीं मुडता,
16:41देखे को अंदेखा नहीं करता, सुने को अंसुना नहीं करता, समझे को अंसमझा नहीं करता, जो ऐसा करे, फिर बैमानी
16:54का कोई लाज नहीं क्योंकि बैमानी भूलना नहीं, एक फैसला है, और आपके फैसले आपके हैं, उन्हें आपके लावा कोई
17:02बदल नहीं सकता, आप
17:04अगर फैसला करी लो कि आपको सचसे
17:06ज्यादा स्वार्थ प्यारा है
17:08तो फिर आपका फैसला आपकी जिन्दगी कोई क्या करेगा
17:13बस ये है कि
17:14दूनी बेई मानी मत करना ये मत कहना कि
17:16मैं मजबूर हूँ
17:18मजबूरी और गएरा कुछ नहीं होती
17:21मजबूरी औगएरा कुछ नहीं होती
17:22सौदे होते हैं
17:26मत बिको
17:28कम से कम
17:29यहाँ पर आप लोग जो बैठे हुए हो
17:30आप बहुत प्रिविलेज्ड लोग हो
17:34बहुत प्रिविलेज्ड लोग हो
17:35यह दो इंस्टिटूशन
17:36इतने मज़दार बात देखो
17:40किया गजब
17:41यह जोड़ी बनी है
17:44इससे अध्यात्म के बारे में कुछ पता चलता है
17:49क्या
17:51अध्यात्म अपने आप में कोई फील्ड नहीं है
17:53it's the field that integrates
17:55all fields
17:57it's the field that's at the
17:59foundation of all fields
18:00नहीं तो यह दोनों fields कैसे integrate होंगे
18:04medical sutures
18:05वह रभन सकते हैं
18:07उसमें आप कुछ फैशन कर दो तो अरे वो जो टाका सिलने के धागे होते हैं तो ये medical college
18:17में तो वही धागे चलते हैं बस और तो यहां तो कोई धागा होता नहीं आपके तो इसमें भी धागे
18:21जासा ही है
18:25कोई convergence हमें आम तोर पर दिखाई नहीं देगी
18:28medical technology और fashion technology में पर convergence है
18:32they share a fundamental common ground
18:40वही धर्शन है वही अध्यात में
18:44आरही बात समुझ में है
18:55कि आप लोग भी अगर मजबूरी का रोना रोने लगे तो फिर तो आम आदमी क्या करेगा
19:06कि जो लोग इस background से आ रहे हैं आपको यह लगता होगा कि हमें भी तो तकलीफे हैं हमें
19:12भी तो जॉब की
19:12problems होती हैं हमें भी तो पैसा कम पड़ता है अपनी तो देख रहे हो पर दुनिया की देखो भारत
19:18की देखो
19:26अरे अभी रुकिये पहले संदेश तो दे लूँ
19:35when it comes to the truth don't compromise आपके पास तो कोई दलील भी नहीं होगी देने के लिए आप
19:42क्या बोलोगे कैसे बोलोगे कि मजबूर थे
19:44का मजबूरी है पढ़े हो लिखे हो जवान हो स्वस्थ हो जानकार हो जागरुख हो आप कैसे बोलोगे कि मैं
19:53तो मजबूर थी तो इसलिए मुझे
19:56दबना पड़ा जुकना पड़ा कई बार तो बिकना पड़ा कैसे बोलोगे मत करना इसलिए बोल रहा हूं मत करना क्योंकि
20:07बहुत होता है
20:12अभी लग रहा होगा कि ऐसे क्यों दबेगा हम दबने वाले नहीं सब दब जाते हैं मत दबना
20:32हाँ जी बताईए नमस्कार आचार्या जी नमस्कार एवरिवन
20:40मेरा नाम सोरुप सुभंकर है और मैं IMS में 4th year MBBS ठात रहूं मेरा सवाल आपसे यह है कि
20:48भारत में एक व्यक्ति की स्वतरनतता बहुत दब गई है
20:53और जीवन की अहम मुद्दे जैसे की करियर और विवा हम सोतनतर रूप से खुद नहीं ले पा रहे हैं
21:02और बलकी समाज और परिवार के द्वारा तय की जा रही है
21:07तो हम खुद इस पर अपना तय कैसे कर सकते हैं आप अकेली मजबूर नहीं है उन्हें माहिक दो मैं
21:22थोड़ा पर खुद दो कि मेरी बात उन्होंने समझी कितनी थी दो तो लगना दो
21:31यह है वो गडबड़ वाला चक्र जहां से शुरू हुए तो देखो वहीं आ गए अब यह कह रहे हैं
21:36कि सब दवा देते हैं सुतंतरता व्यक्तिकी छीन ली जाती है केरियर हो कोई फैसला हो शादी बया हो प्यार
21:42हो दुनिया हम पर चड़ी रहती है हम बड़े मजबूर है �
21:46जवाब दीजिए इनको जवाब दीजिए इनको बोलीये बोलीये
21:55मैंने आपको बोला था ना वही इनको बोल दीजिए बहुत लंबा उच्छा आप शुरू करो जहां रोखना होगा मैं रोख
22:03दूंगा चलो बोलो
22:07जब कोई कहे कि दुनिया मुझ पर चड़ी हुई है मेरी सोतंतरता का हनन कर रही है दबाव बना रही
22:13है विवश कर रही है तो क्या बोले उसको
22:20बोलो बोलो जोर से बोलो पता तो है तो ट्रेड होता है वो बेसिकली
22:31लंबा नहीं हुआ
22:34इतनी सी बात थी सब समझ में आ रहा है अब पीछे मत अटना यह जो भी ट्रेड डील है
22:44इससे बाहर निकलो
22:49आगई बात समझ में जी आचारी अची
22:58हम जब जीवन में होते हैं तब परिवार को ले के चलना ले के चलना मने क्या होता है आगया
23:19मुहावरों में मत उल्जो जले भी बना रहे हो मुहावरों की ले के चलना ध्यान में रखना यह सब क्या
23:24होता है
23:29सबके मन का ख्याल रखना अरे उसका क्या मतलब है मन कहा है मन दिखाओ ख्याल कैसे रखते हो पॉलिश
23:35करते हो मन को क्या करते हो
23:38जो बात सीधी है उसको सीधी क्यों नहीं बोल सकते
23:41उनकी बात सुनना तो सुन लो सुननी तो है दब क्यों रहे हो जो बात असली है उसको वैसे बोलो
23:49बात को असली बात को नहीं बोल पा रहे क्योंकि जो असली है वो अगली है इसलिए बोल नहीं रहे
23:58साफ साफ
24:02हाँ बोले है उत्तीस वतंत्रता को फिर अपने को हटाओ वारी तो सब्सक्राइब है यह नहीं
24:10हुं उनके साथ जो रिष्टा है वो बताओ ना जिसको बोल रहे थे कि ले के चलना पड़ता है श्रवन
24:16कुमार हूं ले के चलना पड़ता है माने क्या
24:21माने क्या मैं नहीं क्या रहा लेकर चलना वगरा बुरा है मैं बस जानना चाहता हूं कि घर वालों को
24:27लेकर चलना माने क्या
24:32कि एक्छाओं का सम्मान करना माने क्या कर दिया सम्मान है हमारी डिसिजिशन में उनकी भी सामती हो उनकी भी
24:43सहमती हो और नहीं है सहमती उनकी तो
24:49मांग रहे हो सही शब्簡 का इस्तमाल करो सहमते एलग चीज uh यह उती है थो कुल मिंलाकर
24:55करके यह कह रहे हो कि जो कोई और बोलेंगा वो करूंगा कर SMT इतनी सी बात थी कि इतनी
25:04सी बात
25:08कोई भी कभी भी किसी से भी क्यों दबता है बताओ
25:14हटाओ कि पुत्र का माबाप के प्रतिहार्दिक प्रेम है व्रिधाश्रम भरे पड़े है जब माबाप से कोई स्वार्थ नहीं रह
25:22जाता तो माबाप वहां नजर आते हैं
25:24हटाओ कि ये प्रेम की बात है कि माबाप से दबना पड़ता है ये बताओ पैत्रिक जाइजाद कितनी है
25:36बस ये है और कुछ नहीं है
25:41जाओ कि माबाप हो अनपड हो कुछ ना करते हो और तो मूटा पैसा कमाते हो तब कहोगे कि घरवालों
25:49को भी तो लेके चलना पड़ता है तब कहोगे
25:53ये प्यार नहीं है
25:54ये प्यार नहीं है
25:57ये स्वार्थ है
25:58और इसमें
26:01तुम जिसकी
26:04आज्याओं का पालन कर रहे हो
26:06एक्छाओं का सम्मान नहीं आज्याओं का पालन
26:08तुम जिसकी आज्याओं का पालन कर रहे हो ना
26:11उसका भी आहित है
26:14उसका भी आहित है
26:20कोई तुम्हें दबा रहा हो तुम दब जाओ
26:22तुमने अपने साथ तो गलत करा ही
26:24जो तुम्हें दबा रहा था तुमने उसके साथ भी गलत करा
26:33ज्यानियों ने कहा है कि जो मुक्त होता है
26:37सोतंतरता की बात कर रहे थे न
26:38जो मुक्त होता है
26:40वो अकेला नहीं मुक्त होता
26:41जब वो मुक्त होता है
26:42तो उसके पीछे पीछे
26:43उसका कुल कुटुम सब मुक्त हो जाता है
26:45ये है असली प्रेम
26:53असली प्रेम ये नहीं है
26:54कि मैं भी बंधन में रहूंगा
26:56और तुम भी बंधन में पड़े रहो
26:58और मैं ज़रा सा अजादी की तरफ बढ़ा
27:00और तुमने मुझे रोक दिया
27:02तो मैं रुख भी जाऊंगा
27:10चेहरे पर डर दिख रहा है
27:13और डर हमेशा
27:15किसी ऐसी चीज़ को खोने का होता
27:17जो तुम्हारी है नहीं
27:20जो चीज़ तुम्हारी है नहीं
27:21उसका लालच क्यों करे बठे हो
27:24वो लालच ही तुम्हारा डर बन रहा है
27:36जो व्यक्ते
27:39सवतंतरता के विरोध में है
27:42वो रोगी है
27:44पुछो क्यों
27:47क्योंकि
27:48मुक्ति स्वभाव है
27:50जो स्वभाव में इस्थित होता है
27:51जो स्वभाव में इस्थित होता है
27:53उसको बोलते है
27:54स्वभाव में इस्थित अर्थात
27:56स्वस्थ
27:58तो मुक्ति स्वास्थ है और तुम डॉक्टर हो
28:03बनोगे
28:05मुक्ति स्वास्थ है तुम डॉक्टर हो
28:07कोई अगर
28:10स्वास्थ के खिलाफ है तो उसको क्या बोलेंगे
28:13बीमार
28:14और मुक्ति स्वास्थ है तो जो सौतंतरता के खिलाफ है वो कौन है वो बीमारी है
28:19डॉक्टर का बीमारी से क्या रिष्टा होना चाहिए
28:23उसका इलाज करोगे या कहोगे कि आपकी आग्याओं का पालन कर रहा हूं
28:28तुम्हारे पास पेशेंट आएगा तो उसका इलाज करोगे या पेशेंट की आग्याओं का पालन करोगे
28:35विलास को कुछ होगा उसको कुछ उपचार देना है दवाई लिखनी है उसका परचा लिखने से पहले कोगे यदि आपकी
28:42अनुमति हो तो आपको ये दवाई लिखू वो गरा नहीं मुझे लॉलिपॉप लिखो और तुम लॉलिपॉप लिख रहे हो क्योंकि
28:50देखो पेशें
29:02कोई लेके चलते हैं गूम रहे है ना तो वैसा डॉक्टर मत वन हो पेशेंट को लेके नहीं चलना पड़ता
29:10पेशेंट को अच्छा लगेगी बुरा लगे उसका इलाज करना पड़ता है और यही पेशेंट के प्रति तुम्हारा प्रेम है वो
29:19बता रहा है तुम्हें दिल �
29:21खराब है और कहा रहा है मेरे घुटने की सरजरी करो और तुम कर भी रहे हो क्यों क्योंकि स्वार्थ
29:26है पैसा मिलेगा यह कैसे डॉक्टर हो तुम
29:32कि जो भूलना नहीं जो सुतंत्रता के खिलाफ है वो बीमार है
29:40कि बीमार से अनुमति सहमति नहीं मांगी जाती
29:46बीमार से अधी प्रेम हो तो उसका उपचार करो और प्रेम ना हो तो दूरी बना लो
29:53दो ही चीज़े हो सकती हैं बीमार के साथ
29:57और अगर खुद उपचार नहीं कर पा रहे तो किसी अच्छे डॉक्टर को रेफर कर दो
30:16जुक्रिया जारिया जी नमस्ते अस्पताल आपका है और प्रैक्टिस में चमका रहा हूं
30:31अगर नमस्कार मेरा नम अखिलिश कुमार दिवेदी है मैं सुआ के भी टेक्स को स्ट्रीम से विलों करता हूं
30:37मेरा एक follow-up question है first question से sir आपने एक board mention किया था कि अगर समझ गए
30:44तो बदल गए अगर समझ गए अपने अहंकार को समझ गए तो आप बदल गए तो आप बदल गए तो
30:49आप बदलते हैं हाँ बदलते हैं सर यह बदलना एक निरंतर वीदी है और और कोई एक विंदू है जिसके
31:06नो जब आगे आगे आगे बढ़ते जाते हो सच के साथ जीने का अभ्यास गहरा हो जाता है तो यह
31:22संभावना कम हो जाती है कि अब फिसलोगे
31:27तो सीधे चलने के लिए न फिसलने के लिए एफर्ट कम लगाना पड़ता है तो विवहारी करूप से तुम कह
31:34सकते हो कि एफर्टलेस हो जाता है विवहारी करूप से लेकिन टेक्निकली एक्चुली नो फिसलने की संभावना कम हो सकती
31:43है शून्य कभी नहीं होती कोई कितना
31:47भी आगे निकल गया हो, कभी फिसल सकता है
31:51तुमने जिन्दगी में हो सकता है
31:53पांच सो सही फैसले करें
31:55निरंतर एक के बाद एक
31:56तब भी हो सकता है कि पांच सो एक वाँ फैसला
31:59तुम गलत कर दो, क्योंकि
32:01अहंकार, इसका जो कारण है
32:03वो अहंकार
32:05के अस्तित्त से रिलेटेड है
32:07अस्तित्त माने
32:08physiological existence
32:10जिसको हम ego कहते हैं
32:12that psychological self
32:13वो हमारी physiology से आता है
32:17तभी जब आपका खोपड़े पे
32:18कोई मार देता है
32:21हथोड़ा
32:21तो हंकार गायब हो जाता है कि नहीं
32:25क्योंकि वो material है
32:27physiological है
32:28आप शराब पी लेते हो
32:29तो sense of self ऐसे ऐसे
32:31wobble करने लग जाती है कि नहीं
32:33क्योंकि उसका relation
32:35ethanol के molecule से है
32:37बात समझ में आ रही है यह
32:39इसका मतलब यह है कि
32:41जब तक यह physiology है
32:43वो psychological error होने की
32:45probability बनी रहती है
32:49क्योंकि
32:49अहंकार का संबंद
32:51इस physiology से है
32:52वो स्वयम material नहीं है
32:54पर एक
32:55vicious material configuration की
32:58पैदाईश है
32:59आपका जैसा यह पूरा शरीर है न
33:03आप evolution के
33:04complex product हो
33:06एक simple product नहीं हो
33:07amoeba जैसे या किसी और चीज़ जैसे
33:09तो यह जो हमारी complex physiology है
33:12ego इसी से उठती है
33:14और यह physiology तो तुम
33:16कह दो कि तुम enlightened हो गए
33:18कुछ हो गए बुद्ध हो गए
33:19यह physiology तो नहीं बदल जाएगी न
33:21घुठना तो घुठना ही रहेगा
33:23और नाक तो नाक ही रहेगी
33:25तुम हो गए महाग्यानी
33:26पर नाक तो नाक है न शरीर तो नहीं बदल गया न
33:30शरीर जब तक है तब तक
33:33अहंकार की संभावना बनी रहेगी
33:35क्योंकि शरीर और अहंकार सदा एक साथ चलते हैं
33:39तो practically yes effortlessness आ सकती है
33:43लेकिन सावधान रहना संभावना फिसलने की रहेगी
33:49अंततक रहेगी तो तुम्हारे लिए अच्छा है कि तुम यही मानो
33:52कि both practically and actually the thing called effortlessness will never come
34:01इसका मतलब है कि जीवन सतत संभर्ष ही रहेगा
34:05सतत संभर्ष रहेगा यह जो तुम कह रहे हो कि effortless हो जाएं
34:11वो पाना बड़ा मुश्किल होने वाला है
34:15थोड़ा सा effort सदा करना पड़ेगा वो करते रहो
34:18वही मानदारी है वही अध्यात्मिक साधना है
34:21और जब फसे रहोगे गड़े में गिरे रहोगे तो बाहर आने के लिए बहुत जादा effort करना पड़ेगा
34:31बाहर आ गए तो भी थोड़ा effort तो जीवन भर करना ही पड़ेगा
34:38और अच्छा है कि तुम सचेत रहो सावधान रहो कि कभी भी फिसल सकते हो ताकि effort करना बंद ना
34:44कर दो
34:44हम शारिरिक effort की बात नहीं कर रहे हैं हम inner effort की बात कर रहे हैं
34:48inner effort in the form of keeping the distraction away
34:52so that attention remains
34:58मतलब सब्सक्राइब हार टाइम खुद को introspect करना पड़ता कि क्या ना इंत्रोस्पेक्शन यह वही बात होगी जो उन्होंने का
35:05था कि
35:05I will remove myself वैसे ही कह रहे हैं I will introspect
35:11तुम तुम चोर को पुलिस बना रहे हो तुम चोर को ही कह रहे हो गो एंड इंस्पेक्ट
35:18introspect? inspector? तुमने जो चोर है कौन? अहंकार? उसको ही तो कह दिया है go and introspect
35:27वो क्या करेगा? यह introspection की नहीं बात है यह इमानदारी की बात है
35:34self observation real time होता है और introspection एक phase lag के बाद होता है
35:40introspection हमेशा delayed होगा तुमने काम कर दिया बाद में introspect करोगे
35:45हम बात कर रहे हैं तुरित इमानदारी की that spontaneous honesty
35:51मुझे पता है अभी क्या हो रहा है और मुझे नहीं पता होगा तो
35:58किसको पता होगा? क्योंकि कहां हो रहा है? यहां हो रहा है तो जब हो रहा है ठीक तभी पता
36:05है
36:05without a gap, without a lag मुझे अभी पता है
36:13नमस्ते आचारे जी
36:21मेरा नम रीत है तो मेरा यह प्रश्न था कि बहुत लोग होते हैं कि कुछ लोग किसी
36:30आइडियोलोजी में मानते हैं और कुछ लोग नहीं मानते हैं वह कुछ भी हो सकते हैं
36:38तो कभी कभी क्या होता है जो लोग मानते हैं वह उनके बीच में और जो लोग नहीं मानते हैं
36:45उनके बीच में बीच में गॉन्फलिक्ट हो जाता है
36:47तो वो क्यूं होता है और उसको प्रवेंट कर सकते हैं?
36:52I am X.
36:54मैं कौन हूँ?
36:55X हूँ.
36:57X एक आइडियोजी भी हो सकती है.
36:59मैं कॉम्मुनिस्ट हूँ.
37:02हाँ?
37:03मैं कुछ भी हो सकता हूँ.
37:04सोशलिस्ट हूँ.
37:06Anything.
37:08Islamist हूँ.
37:10Hindu तोवादी हूँ.
37:11I am X.
37:13X कुछ भी हो सकता है.
37:17X हटा दिया तो क्या हो जाएगा?
37:23I am गिर गया.
37:26उस बिचारे के पास
37:30जीने के लिए वो आइडियोलोजी नाम की बैसाखी है.
37:36तुम वो भी छीन लोगे तो वो लड़ेगा नहीं तुमसे.
37:40यह आइडियोलोजी वालों से बहुत साउधानी से बात करा करो.
37:45क्योंकि यह वो लोग होते हैं जिन्होंने अपनी टांग यूँ मोड रखी होती है
37:48और यहाँ बैसाखी पकड रखी होती है.
37:52लंगडे नहीं होते.
37:53खुदी टांग मोड़ी भी नहीं होती, मोड़ के बांध ली होती है.
37:56और यह बैसाखी पकड ली होती है, बोलते हैं बैसाखी हटी तो हम गिर जाएंगे.
38:02और दो आइडियोलोजी आपस में कभी भी मेल खा नहीं सकती हैं, क्योंकि सब आइडियोलोजी ले दे के कहानियां होती
38:09हैं, टुछ तो कहीं होता नहीं.
38:12तो कोई भी दो आइडियोलोजी आपस में कभी पूरी तरह मैच नहीं कर सकती हैं, विसंगत होंगी हमेशा.
38:20तो अगर तुम्हारी आइडियोलोजी टूथ है तुम्हारे अनुसार तुम्हारे अनुसार दूसरे की आइडियोलोजी अनेवारे रूप से क्या होगी
38:28फॉल्स होगी तो लड़ोगे नहीं तो क्या करोगे तुम उसकी आइडियोलोजी को फॉल्स बोलोगे
38:48तो तो मेरी गलत हो गई है तो उसको मारना ज़रुरी है
39:04ये एक ऐसा क्लैश आफ वेलिउस बनता है जिसमें जो दushman है उसको जीने की अजाज़त भी नहीं दी जाती
39:15तेरी हस्ती भी अपराद है
39:17क्योंकि तेरी माननेता मेरी माननेता के खिलाफ है
39:20मैं तुझे मार के इदम लूँगा
39:22जो जितना ज्यादा
39:25आइडियोलोजिकली आपस्टिनेट होगा
39:27वो आदमी उतना वहशी होगा, दरिंदा होगा, खतरनाक होगा
39:33सत्य कोई विचारधारा नहीं होता
39:36सत्य कोई सिध्धान्त नहीं होता
39:41सत्य होता है स्वयम को देखना
39:43सत्य का संबंद किसी अबजेक्ट से नहीं है
39:47सब्जेक्ट से है, स्वयम से है
39:50सत्य माने यह नहीं कि मैं यहां से सत्य ढून लाया
39:52ये पकड़ लाया फलानी चीज सत्ते हो गया
39:56सत्ते माने मैं जो हूँ ना मैं
39:58मैं ही सबसे बड़ा जूट हूँ
40:00ये लगातार देखते रहना ही सत्ते है
40:04ठीक है
40:04आइडियोलोजी वाले तो एक दूसरे का सर फोड़ेंगे
40:07फोड़ेंगे
40:11धन्यवाद
40:16मेरा नम रूपा है
40:17मैं उत्राकंट से हूँ
40:19और पहले हैसा था
40:21कि बहुत सारी माननेता हैं
40:24परमपराएं और
40:25जो भी हम पर सभी पर थोपी जाते हैं
40:28वो सारी चीजें
40:28वो सारी चीजें करके देखी
40:32लेकिन अंदर से एक संदूस्त्री
40:34नहीं मिले मुझे कभी
40:35जब आचार जी को सुना
40:36तो इन सब चीजें तो ये सारी माननेता हैं
40:39और परमपराएं और ये सारी चीजें हटी
40:42और सबसे जवरी जो था
40:45वो मेरे अंदर डर था
40:46सबसे चादा तो वो हटा
40:49और मेरे अंदर की जो सरलता थी
40:51वो बहार आई और आचार जी ने मुझे बहुत कुस्तिया है उसके साथ मुझे मेरी ही चीज़े लोटाई हैं मेरे
41:00अंदर की सरलता और मेरे अंदर की अच्छा सच्चाईया मुझे लोटाई हैं
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