00:03फालगुन मास के शुकल पक्षकी एकादशी को आमलकी ये रंगभरी एकादशी मनाई जाती है।
00:30माले पुत्री गौरा का गौना करा कर काशी लेकर आये थे। और काशी के लोगों ने गुलाल उड़ा कर उनका
00:35स्वागत किया था।
01:03अब पारण के समय आमला जो अपने भोग में चड़ाय था उसे ग्रहन करके अपना वरत का पारण कर सकते
01:10हैं।
01:10ध्यान रहे। इस दिन प्राताय जल्दी उटकर स्नानादी से निवरत तो हो जाएंगे।
01:15घर के मंदर के साफसफाई कर दिया जलाएं।
01:17भगवान विष्णू, भगवान अश्रव और माता पारवती को गंगाजल से अभिशेक करें।
01:22फिर उन्हें फूलों की माला अर्पित करें। देशी घी का दीपक जलाएं।
01:26आरती करें और मंत्रों का जाप करें।
01:28अंद में उन्हें सात्विक चीजों का भोग लगाएं।
01:31आवला भी जरूर चड़ाएं। आप उसे कच्चा या मुरब्बा बना कर भी चड़ा सकते हैं।
01:36इसके साथ ही फल और खीर का भी प्रसाद लगाएं।
01:39इस दिन आमले के पेड की भी पूझा करें।
01:42ध्यान रहे भगवान वश्नु, मातालक्ष्मी और शिव पार्वती को इस दन गुलाल जरूर अरपत करें।
01:48साथी आमले के पेड़ की पूजा के दोरान भी आप चुटकी भर गुलाल आमले के पेड़ पर भी अर्पत कर
01:54सकते हैं
01:54इसके बाद आप परिवार जनों को भी गुलाल लगा सकते हैं
01:58कहते हैं कि सबसे पहले अपने देवी देवताओं को गुलाल अर्पत करना चाहिए
02:02फिर ही होली का तेवहार जशन से मनाना चाहिए
02:06फिल्हाल से वीडियो में इतना ही
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