00:02भारत के आध्यात्मिक केंद्र में जहां भक्ति और रहसिवाद का संगम होता है।
00:30मसाने की होली के नाम से जाना जाता है।
01:00पहले से ही चल रही है।
01:01जहां आयोजन के सुनिश्रत कर रही है कि भव्वे आयोजन अपनी पारंपरिक भवेता को बरकरार रखे।
01:07यह उत्सव काशी के अध्यात्मिक पंचांगिक अनुसार मनाय जाता है जिसकी शुरुवात रंगभरी एकादशी से होती है।
01:14कहते हैं कि इसी दिन भगवान अश्रफ देवी गौरी को विदिपूरुवक काशी लाते हैं।
01:19इसके अगले दिन महाश्रमशान भारत के सबसे गहन और प्रतिकात्म को होली अनुस्ठानों में से एक का केंदर बिंदू बन
01:25जाता है।
01:26इस होली की अनुठी विशेषता इसका महाश्रमशान में जलती चिताओं के बीच का वातावरन है।
01:32भगत और सादू न केवल चमकीले गुलाल से बलकि चिताओं की पवित्र राक से भी अपने शरीर को लेते हैं।
01:38ये अनुष्ठान जीवन की छडभंगूरता और मृत्यू के परमसक्ति का प्रतीक है जो भगवान अश्रम से गहराई से जुड़े विशे
01:45हैं।
01:45ये केवल मनोरंजन के लिए बनाया गया एक तमाशन नहीं। ये शैव दर्शन में नहित एक आध्यात्मिक अभिव्यक्ति है।
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