00:00मैं फिजिकली डिसेबल्ड लोगों के बारे में कुछ बोचना चाहता हूँ
00:04जो लोग हमें आम से मिलते हैं वो या तो हमें दया की दृष्टी से देखते हैं
00:09पर हमें सामाने मनुष्य की तरफ तरफ ज़्यादा समझा नहीं जाता
00:13तो यह जो रवया है सामाज के प्रती और मैं इसे एफेक्ट भी होता हूँ
00:18तो इसके रिगार्डिंग मैं मतलब अपने अंदर क्या चेंजिस ला सकता हूँ
00:22वो तुम्हारे बारे में कुछ नहीं कह रहे हैं
00:24उन्हें इंसान के नाम पर बस हट्टी और मास नजर आता है
00:27वो व्यक्ति को देखते हैं तो कहेंगे अच्छा गोरा है काला है
00:31आदमी है औरत है अच्छा जवान है क्या
00:34उनको शरीर ही दिखता है
00:36हम नजाने कितनी विभूतियों को जानते हैं
00:39जो शारीक रूप से कभी कम कभी ज्यादा अक्षम थी
00:44लेकिन उसके बाद भी मानवता मिनोंने बड़े से बड़े योगदान दिये
00:47तुम्हारा सौभाग्य है एक तरीके से कि धोखे को छानने वाली छननी तुम्हें प्रकृति नहीं दे दिये
00:53जो भी इनसान तुम्हें तुम्हारे शरीर पर तौले उसको छान कर अलग कर देना
01:00वो तुम्हारे लायक नहीं और रही दया की बाद ये तो अपनी गरिमा है कि किसी की दया का पातर
01:07नहीं बनना है
01:08कोई आए दया दिखाने तो पहले ही पूछलो कि बता दे भाई हिसाब क्या है
01:13बता दे भाई किस रेट पर दया दिखा रहा है
01:15और हिसाब साफ रख बाद में वसूलने मता जाना कि मैंने दया दिखाई थी बदले मैं अब तुछ से ये
01:21चाहिए
01:21भूलना नहीं कि निस्वार्थ तो कोई कृष्णी होते हैं, कोई बुद्धी होता है, जितना हो सके स्वावलंबी रहो, और जहां
01:30किफी की मदद की जरूरत पड़े, वहां दाम चुका दे, दाम बस उसके मत चुका न, जो जीवन में सचमुछ
01:36प्रेमवश आए, तो तब तक
01:38के लिए बहतर यही है कि सौदा खरा खरा, ठीक है?
Comments