00:08आज जब मैं देखती हूं महिलाओं को लेकिन उनके अंदर वो जजवा ही नहीं होता है
00:14कनकलता बरुआ उनके उपर गुलामी की जनजीर पड़ी आप ही बता रही हैं कि उन्होंने जजबे के साथ जनजीर को
00:25आप कह रहे हैं आज की लड़कियों महिलाओं में जजबा क्यों नहीं होता है ना अब जैसे अब यहां पर
00:30महिलाओं बैठी है
00:32अब यह से मेरी जेव में आपको पता है ना मैं महाशिव रात्री वाला हूं साप वाप रखके चलता हूं
00:40अभी यहां से निकाल कर अरे मजाग समझ रहो
00:42मैंने आज तक छुपा के रखा अपना mystical enlightenment तो तुम मानते ही नहीं
00:46अभी मैं यहां से साप निकाल कर फेकूँ
00:50फिर देखिए अभी जजबा कैसे नहीं छा जाएगा
00:54उतना ही पैशन उठेगा जितना किसी करांतिकारी में उठता है बंधनों के विरुद्ध
01:00पैशन कहीं नहीं चला गया है
01:02बस स्वार्थ के लिए
01:05एक वीडियो था जिसमें गाउं की दो महिलाएं बस की एक seat के पीछे
01:09इतना लड़ी इतना लड़ी कि एक को बसमें की अंदर जो खंबा होता उसनों उसका सर ऐसे पकड़ के मार
01:14दिया वो बहोश हो गई बस के अंदर
01:15पैशन तो पूरा है पर किस चीज के लिए है बस की seat के लिए है
01:22करनक लटा इस मामले में सेल नहीं थी कर उनमें कोई विशेष आग थी शेष्ट इस मामले में थी कि
01:30संसकारित नहीं
01:31थी, corrupted नहीं थी, जो चीज जैसी थी, जस कितस उनको दिखाई देती थी, बंधन तो बंधन है, दिख रहा
01:37है बंधन है, और उस समय हम उमर और भी लड़किया रही होंगी, वो क्या करें, गुड़े-गुड़िया खेल खेल
01:44रही है, उस समय का भारत, 17-18 की उमर, नजाने उनक
01:49कितनी सक्यों सहलियों का तो बया हो गया होगा, बच्चे हो गए उनको उमर में, वो विशेश इसलिए थी, क्योंकि
01:54उनको दिख रहा था कि ये बंधन है सब कुछ, और जिस आख से वो देख पा रही थी, कि
02:02सामाजिक रस्मों रिवाज और दुनिया की कहानिया ये बंधन ह
02:06उसी आख से वो ये भी देख पा रही थी, कि अंग्रेजी साशन भी बंधन है, पैशन कैसे चला जाएगा,
02:13आत्मा की तुलना कई बार अगनी से की गई है, अगनी, ऐसी अगनी जो किसी प्रकार का बंधन बरदाश्त नहीं
02:20करती, वो अगनी हर महिला में है, और वो जजबा
02:25जला देना चाहता है अपने हर दुश्मन को, दिक्कत यह है कि दुश्मन की पहचानी नहीं हो पा रही, वो
02:32बस वाली महिला को क्या लग रहा था, दुश्मन कौन है, वो दूसरी महिला को दुश्मन मान रही है, तो
02:36उसका सर फोड़ दिया, कनकलता पहचान पाई दुश्मन
02:40कौन है आज की महिला पहचाएंगी नहीं पारी दुश्मन कौन है
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