00:05अरंत में बाद देश की सबसे बड़ी अदालत यानि की सुपरीम पोट से आई उस ख़बर की जिसन्य आज पूरे
00:11देश में हल चल तीज कर दी
00:12अर्दिश की सबसे बड़ी अदालत ने एक ऐसा फैसला लिया, एक ऐसा फैसला सुनाया, जिसने सियासी गलियारों से लेकर आम
00:20जन्मानस तक एक नई पहस को जन्म दे दिया
00:22सुप्रीम कोट ने उस याचिका को सुन्य से साफ इंगार कर दिया जिसमें मांग की गई कि मुगल शाशक बावर
00:28के नाम पर देश में कहीं कोई मज़द ना बनाई जाए
00:31जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस संदीप महता की पीठ ने दो टूक शब्दों में याचिका को खारिश करते हुए साफ कर दिया
00:38कि अदालत इस तरह है कि मांगो में दखल देने का कोई आधार देखती ही नहीं
00:43सुनवाई के दोरां याचिका करता के वकील ने बाबर को आकरांता बताते हुए तीखी दरिल दी
00:48कहा गया कि बाबर ने हिंदूओं को गुलाम कहा था और ऐसे व्यक्ति के नाम पर किसी भी धारमेक धांचे
00:54का निर्मान दीश की भावना के खिलाफ है
00:56याचिका में यहां तक कहा गया कि प्रिशाशन को आदेश दिया जाए कि बाबर के नाम से जोड़ी किसी भी
01:02मस्जित के निर्मान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए
01:04लेकिन सुप्रीम कूर्ट की पीठ इन दलीलों से विभावित महीं हुई और बिना किसी लंबी बहस में जाय याचिका को
01:10खारिच कर दिया गया
01:11इस फैसले की टाइमिंग ने इसे और ज्यादा संवीदर शील बना दिया क्योंकि हाली में पश्चे मंगाल के मुशिताबाद में
01:17टेमसी से निलंबित विधायक हुमायो कबीर ने बाबरी मस्जित की नीव रखी थी बाबरी मस्जित बनाने की बात की है
01:24और दावा किया गया कि वो वहाँ बाबरी मस्जित की रीव रखने के बाद पूरी मस्जित के बनिर्माण कारे को
01:30भी देख रही है
01:31इस घटना करम के बाद ये अच्छिका सुप्रीम कोर्ट महुंची जिससे मामला सिर्फ कानूनी नहीं बलकि राशनातिक और सामाशिक बन
01:37गया
01:38सुप्रीम कोर्ट का इंकार अपने आपने एक बड़ा संकेत माना जा रहा है
01:41अदालत ने ये नहीं कहा कि बाबर के नाम पर मस्जित बननी चाहिए या नहीं बननी चाहिए
01:46अदलत ने ये जरूर साफ कर दिया कि किसी आतिहासिक व्यक्ति को लेकर भावनात्मक या फिर वैचारिक आपत्यों के आधार
01:53पर धार्विक निर्मान पर रोक लगाने का फैसला मियाई पालिका का काम बिलकुल नहीं है
01:58ये फैसला सीधे तोर पर कानून के दाइरे और समवधानिक सीमाओं की याद दिलाता है ये पूरा मामला आयुध्या फैसले
02:05की भी आपको याद दिलाता होगा किस तरह से उस वक्त भी बाबरी मस्जित को लेकर विवाद विरूध तीस थे
02:12जवंबर 2019 में सुप्रीम कूट्टी राममंदिर नर्माण का रास्ता साफ कर दिया था लेकिन उसी फैसले में ये भी साफ
02:18किया था कि 1992 में बाबरी मस्जित का विद्वन्स कानून के शाशन का घोर उलंगन किया गया था
02:24अजालत ने संतुलन बनाते हुए सरकार को आदेश दिया था कि मुस्लिम पक्ष को मस्जित के नर्माण के लिए पांच
02:30एकड़ वैकल पिक जमीन दी जाए और वो भी अयुद्या की किसी प्रमुक जगह पर
02:34आज के फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल ये कि क्या आप देश में अलग-लग जगाहों पर बावरी मस्जित
02:39के नाम से निर्माण की बातीं और भी तीज होंगी
02:42सुप्रीम कोट ने भले ही स्याचिका को खारिच कर दिया हो लेकिन उसने ये भी स्वष्ट कर दिया कि कानून
02:48अपने रास्ते से चलेगा ना कि भावनाओ या फिर इधियास की व्याक्ष्याओं के दबाव में
02:53ये फैसला एक तरह से संदिश लेता है कि भारत का समविधान और नियाए विवस्था किसी एक नाम एक विचार
02:59या फिर राजनेतिक शोर से नहीं चलता विवेक से चलता है और जिनता के हित में बात की जाती है
03:06फिलाल इतना तो तैह है कि सुप्रीम कूर्ट के इस रुखने एक नई बहस के दरवाजे कोल दिये अब निगाहें
03:11होंगी फिर राजनीती प्रिशाशन और समाज पर कि वो इस फैसले को आखिर एडाप्ट कैसे करते हैं फैसले को उस
03:17विकार कैसे करते हैं और दीश को किस द
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