00:00तो त्याग आखिर होता क्या है? आज हम हिंदू पौराने कथाओं की एक ऐसी कहानी की बात करेंगे, जो त्याग,
00:06मोक्ष और एक बहुत बड़े बलिदान के बारे में है. ये कहानी है महादीव की और उनके सबसे महान त्याग
00:13की.
00:13और इस पूरी कहानी का जो सार है न, वो एक बहुत ही दिल्चस्प सवाल में छिपा है. आखिर भगवान
00:19शिफ का गला नीला क्यों है? इसका जवाब किसी छोटी-मोटी घटना में नहीं, बलकि एक ऐसी ब्रहमांडिय घटना में
00:26है, जिसने पूरे ब्रहमांड का भविश्य ह
00:29तो चलिए कहानी की शुरुवात करते हैं, देवताओं का संकट भ्रहमांड विनाश के कगार पर. बात उस समय की है,
00:37जब भ्रहमांड दो ताकतों के बीच बटा हुआ था, अच्छाई और बुराई. एक तरफ थे देवता, और दूसरी तरफ असुर,
00:45और दोनों के बीच ए
00:57और ये धार्मिक वीडियो आनने लोगों तक शेर कीजिए. शिश्वाय नमस तुप्य बीना देरी किये देखते हैं आगे का वीडियो.
01:27शिश्वाय ने उन्हें सिर्फ एक ही रास्ता दिखाया, अमरित यानी अमर्ता का दिव्य पे. अगर ये उन्हें मिल गया, तो
01:34वो अजे हो जाएंगे और असुर उन्हें कभी हरा नहीं पाएंगे. अमरित के लिए मन्थन एक असंभव गट बंधन. लेकिन
01:42अमरित पाना, �
01:43बै कोई बच्चों का खेल तो था नहीं? इसके लिए एक शीर सागर, यानी दूद के महा सागर का मन्थन
01:49करना था. और इस विशाल काम के लिए उन दोनों गुटों को साथ हाना पड़ा, जो एक दूसरे के खून
01:55के प्यासे थे, देवता और असुर.
01:57ये कोई छोटा मोटा काम नहीं था, बलकि एक बहुत बड़ा आयोजन था. इसके लिए विशाल मंदराचल परवत को बनाया
02:04गया मतनी और रसी का काम किया नागराज वासुकी ने. फिर क्या था? दोनों तरफ देवता और असुर लग गये
02:11और शुरू हो गया समुद्र का �
02:13वो महान मंथन. और जैसे ही मंथन शुरू हुआ, समुद्र से एक से बढ़कर एक अनमोल चीजे निकलने लगी. सबसे
02:22पहले निकली धन की देवी लक्षमी, फिर दिव्य सफेध हाथी एरावत, चमकता हुआ चांद और बेश कीमती कौस्तुब मनी. ऐसा
02:31लगने लगा कि ब
02:43सेर तक नहीं टिक सका. कहानी में एक ऐसा खतरनाक मोडाया, जिसने सब कुछ बदल कर रख दिया. समुद्र ने
02:51अपना सब से घातक राज बहर निकाल दिया. अमृत निकलने से ठीक पहले, समुद्र से बहर आया हलाहल. एक ऐसा
02:59विश जो पूरे ब्रहमांड को पल भर में र
03:13प्रित्वी और पाताल जलने लगे थे. देवता हो या असुर हर कोई डर से काप रहा था. किसी में भी
03:21इतनी हिम्मत नहीं थी कि इसे रोक सके. महादेव का महान बलिदान, रक्षक से एक प्रार्थना. अब जब किसी को
03:29कुछ समझ नहीं आ रहा था, जब सारी उम्मीदे ख
03:32खतम हो चुकी थी. तब डरे हुए देवता और असुर दोनों मिलकर पहुँचे कैलाश परवत पर भगवान शिव के पास.
03:39बस एक ही गुहार थी कि महादेव ही इस विनाश को रोक सकते हैं. भगवान शिव तो करुना की सागर
03:46है. वो जानते थे कि सिर्फ वही हैं जो इस �
03:48सबाही को रोक सकते हैं. उन्होंने तै कर लिया और कहा, अगर मैं ये विश नहीं पिऊंगा, तो पूरी स्रिष्टी
03:55ही खतम हो जाएगी. और बस एक पल भी सोचे बिना, उन्होंने उस जान लेवा विश को उठाया और पी
04:02लिया. ये सिर्फ एक घोट विश नहीं था. ये
04:16वो जहर शरीर के अंदर ना जा पाए. तो विश उनके गले में ही अटक गया. और उसकी प्रचंड शक्ती
04:22ने उनके कंठ को हमेशा के लिए नीला कर दिया. और तभी से उनका एक नाम पड़ा नील कंठ यानी
04:29नीले कंठ वाले.
04:30नील कंठ और महा शिवरातरी पौराने कथा से जीवन्त परमपरा तक. लेकिन ये कहानी सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती. ये
04:39सिर्फ एक पौराने कथा नहीं है. बलकि आज भी हमारे जीवन का, हमारी परमपराओं का एक बहुत बड़ा हिस्सा है.
04:46भगवान शिव के इस महान
04:58आभार जताने के लिए पूरी रात जाकर उनकी पूजा की थी. और बस उसी रात से महा शिवरातरी यानी शिव
05:06की महानरातरी की परमपरा शुरू हो गई. आज भी भक्त इस दिन उपवास रखते हैं, पूजा करते हैं और जागरन
05:13करते हैं. तो महा शिवरातरी की हर एक रस
05:28वो श्रिष्टी की रक्षा के लिए उनका धन्यवाद करने के लिए है और जो प्रसात चढ़ाया जाता है वो उस
05:34रक्षक के सम्मान में है जिसने सब कुछ बचाया तो असल में महाशिवरात्री सिर्फ एक त्योहार नहीं है ये त्याग,
05:42करुणा और उस महान रक्षक के प्र
05:58बलेदान का आखिर क्या महत्व है अगर एक महान कारे के लिए एक महान त्याग की जरूरत होती है तो
06:04आज के समय में हम इस दुनिया को बहतर बनाने के लिए क्या कुछ करने को तयार है इस पर
06:09सोचिएगा जरूर
06:28कारी लाता रहता है आप हमारे चैनल को जरूर सब्सक्राइब कीजिए राइट साइड में जो बेल आइकन का निशान दिख
06:33रहा है उस बेल आइकन पर आल पर क्लिक करके आप नोटिफिसन चालू कर लीजिए मित्रो कमेंड में श्री शिवाय
06:39नमस्तुभ्यम जरूर लेखे
06:40और आपके इस बिसे पर वीडियो देखना चाहते हैं यह भी जरूर लेखे मित्रो श्री सिवाय नमस्तुभ्यम पाच बार जरूर
06:45बोले मित्रो श्री सिवाय नमस्तुभ्यम
Comments