00:00नमस्कार, आज हम भक्ती की उस दुनिया में चलेंगे जहां शब्द नहीं बादाएंगे।
00:05नहीं बहाव बोलते हैं। और एक ऐसी ही पंक्ती के गहरे अर्थ को समझेंगे जो सीध्य बादाएंगे।
00:10दिल में उतर जाती है। एक पंक्ती जो भगवान कृष्ण और उनकी दिव्य बादाएंगे।
00:15तो चलिए सीधे इसी पंक्ती के मर्म को छूते हैं।
00:20देखिए ये सिर्फ कुछ शब्द नहीं है। ये तो भक्ती का एक ऐलान है।
00:25पावर्फुल डेक्लेरेशन जो हमारी पूरी भक्ती परमपरा की आत्मा को उसके आत्मा को जाते हैं।
00:30एसेंस को अपने अंदर समेटे हुए है।
00:32असल में ये किसी गाने की लाइन से
00:35ये कहीं ज्यादा है। ये ये तो एक आत्मा की गहरी पुकार है।
00:40एक ऐसी आवाज जो एक डिवाइन म्यूजिक का जवाब दे रही है।
00:43और जानते हैं ये संगीत का ज़ाएं।
00:45कहां से आ रहा है।
00:46ये आ रहा है सीधे कृष्ण की बंसी से।
00:49कहते हैं
00:50कि कृष्ण की बंसी वो कोई मामूली साज नहीं है।
00:53वो तो बिना बोले ही है।
00:55सब कुछ कह देती है।
00:56उसमें प्रेम की गहराई भी है, विरह की टीस भी है।
01:00करुणा का सागर भी है और हां मुक्ती का रास्ता भी वही दिखाती है।
01:05अच्छा, अब इस लाइन की पूरी गहराई को अगर समझना है न, तो हमें इसके दो
01:10वो सबसे जरूरी शब्दों को जरा खोल कर देखना होगा।
01:13क्योंकि इन ही दो शब्दों में पूरी गहराई है।
01:15पूरे समरपण का उस प्रेम भरे सरिंडर का सार छुपा है।
01:19पहला शब्द।
01:20है बलिहार जाना इसका मतलब क्या है इसका मतलब है किसी पर
01:25इतना प्रेम लुटाना इतनी भक्ति करना कि मन करें कि अपना सब कुछ अपना है
01:30न पूरा वजूद ही उस्वर नियोच्छावर कर दें।
01:32ये है बलिहार जाने का भाव।
01:35और दूसरा प्यारा सशब्द है रसिया ये कृष्ण का एक नाम है।
01:40यानि रस से सराबूर वो जो प्रेम, आनन्द और जाव।
01:45और सुन्दर्ता के दिव्यरस से भरे हुए हैं।
01:50जो सारे दुख हर लेता है और आत्मा को आनन्द से भर देता है।
01:55यहां से बात और भी गहरी हो जाती है।
01:59खुद उस बंसी के आध्याद्मिक रहस्य की।
02:03शास्त्रों में क्या कहा गया है।
02:05क्रिश्न की बंसी में जो तीन छेद होते हैं न।
02:09प्रकृती के तीन मूल गुणों का प्रतीक माना जाता है।
02:13हैं सत्व, रजस और तमस।
02:15और यहीं पर एक बहुत ही खुश।
02:18हुपसूरत और गहरी सीख छिपी है।
02:20सुचिए, बानसुरी से सुरीला संक्राइब
02:23तब ही निकलता है जब वो अंदर से
02:25पूरी तरह खाली हो।
02:27है न।
02:28अचैसे ही इनसान के अंदर से
02:30परमातमा की दिव्योधुन तभी निकलती है
02:33जब वो अपने अहंकार को अपने मैं को पूरी तरह से खाली कर देता है।
02:38तो चलिए अब जरा आगे बढ़ते हैं और देखते हैं कि ये दिव्य संगेत ये कैसे हैं।
02:43एक ऐसे जबरदस्त आकर्शन में एक ऐसी खिचाव में बदल जाता है जो इस दुनिया में बढ़ते हैं।
02:48कि सारी हदों के पार ले जाता है।
02:50ब्रज की कथाओं में इसका कितना सुंदर जिक्र है।
02:53कहते हैं कि जब कृष्ण की बंसी बचती थी न तो गोप्य सब को रहा है।
02:58कुछ भूल जाती थी घर, परिवार, कामकाज, यहां तक की दुनिया की लाज।
03:03सब कुछ भूल कर बस उस एक धुन की दीवानी होकर उसकी और खिची चलिया।
03:08तो आप समझिये, यह कोई दुनियावी अट्रेक्शन नहीं था, यह तो अधुन की लाज।
03:13आत्मा का परमात्मा की तरफ खिचाव था।
03:16एक ऐसी पुकार थी, जो कामकाज, अधुन की लाज।
03:18पानों से नहीं सुनी जाती, बलकि सीधे दिल की गहराईयों में महसूस होती थी।
03:23तो अब सवाल ये उड़ता है, कि भक्ती का ये जो इतना पुराना भाव है।
03:28वो हमारे आज के इस मॉडर्न, इस भागदोडवाले जीवन में कहां फिट होता है।
03:33इसका हमारे लिए आज क्या मतलब है।
03:38इस भागदगी के शोर में सुकून धूनने का एक टाइमलेस मेसिज देता है।
03:42एक ऐसा संदेश जो कभी पुराना नहीं होता।
03:46ये हमें याद दिलाएं।
03:47बार बार याद दिलाता है कि इस स्ट्रेस और टेंशन से भरी दुनिया में
03:52जो असली खुशी है, जो पर्मनेंट हैपीनेस है, वो बाहर की चीजों में नहीं है।
03:57वो इस मटीरियलिस्टिक रेस में नहीं, वो तो हमारे अंदर ही है।
04:02तो सबसे जरूरी सीख क्या है।
04:04ये भजन हमें एक रास्ता दिखाता है, ये सिखाता है।
04:07कि अगर हम जिन्दगी के इस शोर के बीच उस अंदर की दिव्वे आवास को सुनना सीख लें।
04:12तो हम अपनी जिन्दगी की हर कडवाहट को मिठास में बदल सकते हैं।
04:17तो आखिर में तेरी बंसी पर जाओं बलिहार ये लाइन और कुछ नहीं बलिहाए।
04:22आत्मा की सबसे गहरी गुहार है।
04:25ये एक प्रार्थना है।
04:27प्रभू मुझे इस दुनिया के बंधनों में नहीं बलकि अपने प्रेम के बंधन में बांदुए।
04:32और बस यही एक सवाल है जो आज की ये चर्चा हमारे लिए छोड़ जाती है।
04:37अपनी जिन्दगी की इस भागदोड और इस कोलाहल में क्या हम सच में उस दिव्य आवाज है।
04:42इस को उस मीठे संगीत को सुनने के लिए एक पल भी ठेरते हैं।
04:47तो दोस्तो हमने आपको इस सुन्दर भजन की व्याख्या करके बताई, आप सभी बताएगा।
04:52वीडियो आपको कैसा लगा यदि वीडियो आपको अच्छा लगा हो तो हमारे वीडियो को लाइक कीजिए हमारे चैनल को साथ
04:57कीजिए और अधिक से अधिक संक्या में इस प्रकार की धार्मिक वीडियो आप
05:02करने दोस्तों मित्रों रिष्टेदारों तक शेयर कीजिए दोस्तों आपके इस बिसे पर वीडियों
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05:27अब चलते हैं पुनाय मिलेंगे एक नए वीडियो के साथ में तब तक सिरी सिवाय नबस्तु दिए
05:32हम कमेंड में जरूर लिखें शीषिवाय नमस्तु भी हम और पांच बार जाएं
05:37ज्याय सर्द्रिक्रश्णा ज्याय सरी करश्ना ज्याय सरी करश्णा ज्याय स्री करश्ना जरूर बोले भैद
05:42यह भजन सुनते सुनते इसकी व्याख्या सुनते सुनते जाए स्रीकर्ष्णा
05:47इसकी व्याओध्या सुनते इसकी व्याओटी जारा इसकी व्याओध्या।
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