Skip to playerSkip to main content
कृष्ण भजन, सुपरहिट कृष्ण भजन हिंदी, मधुर कृष्ण भजन, कान्हा जी के गाने, सांवरे के भजन, बाँके बिहारी के भजन, श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी भजन, Best Krishna Bhajan for Peace, Top Krishna Bhajans Collection, Krishna Ji Ka Gaana, Bhakti Geet Krishna, Krishna Leela Bhajan, Bhagwan Krishna Ke Bhajan, Lord Krishna Devotional Tracks, Krishna Aarti and Bhajan, Nonstop Krishna Bhakti, Best Devotional Songs.
​#KrishnaBhajan #RadheRadhe #ShriKrishna #Bhakti #Kanha

Category

🎵
Music
Transcript
00:00नमस्कार, आज हम भक्ती की उस दुनिया में चलेंगे जहां शब्द नहीं बादाएंगे।
00:05नहीं बहाव बोलते हैं। और एक ऐसी ही पंक्ती के गहरे अर्थ को समझेंगे जो सीध्य बादाएंगे।
00:10दिल में उतर जाती है। एक पंक्ती जो भगवान कृष्ण और उनकी दिव्य बादाएंगे।
00:15तो चलिए सीधे इसी पंक्ती के मर्म को छूते हैं।
00:20देखिए ये सिर्फ कुछ शब्द नहीं है। ये तो भक्ती का एक ऐलान है।
00:25पावर्फुल डेक्लेरेशन जो हमारी पूरी भक्ती परमपरा की आत्मा को उसके आत्मा को जाते हैं।
00:30एसेंस को अपने अंदर समेटे हुए है।
00:32असल में ये किसी गाने की लाइन से
00:35ये कहीं ज्यादा है। ये ये तो एक आत्मा की गहरी पुकार है।
00:40एक ऐसी आवाज जो एक डिवाइन म्यूजिक का जवाब दे रही है।
00:43और जानते हैं ये संगीत का ज़ाएं।
00:45कहां से आ रहा है।
00:46ये आ रहा है सीधे कृष्ण की बंसी से।
00:49कहते हैं
00:50कि कृष्ण की बंसी वो कोई मामूली साज नहीं है।
00:53वो तो बिना बोले ही है।
00:55सब कुछ कह देती है।
00:56उसमें प्रेम की गहराई भी है, विरह की टीस भी है।
01:00करुणा का सागर भी है और हां मुक्ती का रास्ता भी वही दिखाती है।
01:05अच्छा, अब इस लाइन की पूरी गहराई को अगर समझना है न, तो हमें इसके दो
01:10वो सबसे जरूरी शब्दों को जरा खोल कर देखना होगा।
01:13क्योंकि इन ही दो शब्दों में पूरी गहराई है।
01:15पूरे समरपण का उस प्रेम भरे सरिंडर का सार छुपा है।
01:19पहला शब्द।
01:20है बलिहार जाना इसका मतलब क्या है इसका मतलब है किसी पर
01:25इतना प्रेम लुटाना इतनी भक्ति करना कि मन करें कि अपना सब कुछ अपना है
01:30न पूरा वजूद ही उस्वर नियोच्छावर कर दें।
01:32ये है बलिहार जाने का भाव।
01:35और दूसरा प्यारा सशब्द है रसिया ये कृष्ण का एक नाम है।
01:40यानि रस से सराबूर वो जो प्रेम, आनन्द और जाव।
01:45और सुन्दर्ता के दिव्यरस से भरे हुए हैं।
01:50जो सारे दुख हर लेता है और आत्मा को आनन्द से भर देता है।
01:55यहां से बात और भी गहरी हो जाती है।
01:59खुद उस बंसी के आध्याद्मिक रहस्य की।
02:03शास्त्रों में क्या कहा गया है।
02:05क्रिश्न की बंसी में जो तीन छेद होते हैं न।
02:09प्रकृती के तीन मूल गुणों का प्रतीक माना जाता है।
02:13हैं सत्व, रजस और तमस।
02:15और यहीं पर एक बहुत ही खुश।
02:18हुपसूरत और गहरी सीख छिपी है।
02:20सुचिए, बानसुरी से सुरीला संक्राइब
02:23तब ही निकलता है जब वो अंदर से
02:25पूरी तरह खाली हो।
02:27है न।
02:28अचैसे ही इनसान के अंदर से
02:30परमातमा की दिव्योधुन तभी निकलती है
02:33जब वो अपने अहंकार को अपने मैं को पूरी तरह से खाली कर देता है।
02:38तो चलिए अब जरा आगे बढ़ते हैं और देखते हैं कि ये दिव्य संगेत ये कैसे हैं।
02:43एक ऐसे जबरदस्त आकर्शन में एक ऐसी खिचाव में बदल जाता है जो इस दुनिया में बढ़ते हैं।
02:48कि सारी हदों के पार ले जाता है।
02:50ब्रज की कथाओं में इसका कितना सुंदर जिक्र है।
02:53कहते हैं कि जब कृष्ण की बंसी बचती थी न तो गोप्य सब को रहा है।
02:58कुछ भूल जाती थी घर, परिवार, कामकाज, यहां तक की दुनिया की लाज।
03:03सब कुछ भूल कर बस उस एक धुन की दीवानी होकर उसकी और खिची चलिया।
03:08तो आप समझिये, यह कोई दुनियावी अट्रेक्शन नहीं था, यह तो अधुन की लाज।
03:13आत्मा का परमात्मा की तरफ खिचाव था।
03:16एक ऐसी पुकार थी, जो कामकाज, अधुन की लाज।
03:18पानों से नहीं सुनी जाती, बलकि सीधे दिल की गहराईयों में महसूस होती थी।
03:23तो अब सवाल ये उड़ता है, कि भक्ती का ये जो इतना पुराना भाव है।
03:28वो हमारे आज के इस मॉडर्न, इस भागदोडवाले जीवन में कहां फिट होता है।
03:33इसका हमारे लिए आज क्या मतलब है।
03:38इस भागदगी के शोर में सुकून धूनने का एक टाइमलेस मेसिज देता है।
03:42एक ऐसा संदेश जो कभी पुराना नहीं होता।
03:46ये हमें याद दिलाएं।
03:47बार बार याद दिलाता है कि इस स्ट्रेस और टेंशन से भरी दुनिया में
03:52जो असली खुशी है, जो पर्मनेंट हैपीनेस है, वो बाहर की चीजों में नहीं है।
03:57वो इस मटीरियलिस्टिक रेस में नहीं, वो तो हमारे अंदर ही है।
04:02तो सबसे जरूरी सीख क्या है।
04:04ये भजन हमें एक रास्ता दिखाता है, ये सिखाता है।
04:07कि अगर हम जिन्दगी के इस शोर के बीच उस अंदर की दिव्वे आवास को सुनना सीख लें।
04:12तो हम अपनी जिन्दगी की हर कडवाहट को मिठास में बदल सकते हैं।
04:17तो आखिर में तेरी बंसी पर जाओं बलिहार ये लाइन और कुछ नहीं बलिहाए।
04:22आत्मा की सबसे गहरी गुहार है।
04:25ये एक प्रार्थना है।
04:27प्रभू मुझे इस दुनिया के बंधनों में नहीं बलकि अपने प्रेम के बंधन में बांदुए।
04:32और बस यही एक सवाल है जो आज की ये चर्चा हमारे लिए छोड़ जाती है।
04:37अपनी जिन्दगी की इस भागदोड और इस कोलाहल में क्या हम सच में उस दिव्य आवाज है।
04:42इस को उस मीठे संगीत को सुनने के लिए एक पल भी ठेरते हैं।
04:47तो दोस्तो हमने आपको इस सुन्दर भजन की व्याख्या करके बताई, आप सभी बताएगा।
04:52वीडियो आपको कैसा लगा यदि वीडियो आपको अच्छा लगा हो तो हमारे वीडियो को लाइक कीजिए हमारे चैनल को साथ
04:57कीजिए और अधिक से अधिक संक्या में इस प्रकार की धार्मिक वीडियो आप
05:02करने दोस्तों मित्रों रिष्टेदारों तक शेयर कीजिए दोस्तों आपके इस बिसे पर वीडियों
05:07वीडियो देखना चाहते हैं हमें कमेंट में जरूर बताएं हम कोसिस करेंगे हमारे टीम दौरा आज
05:12आपके बताएं गए टौपिक पर वीडियो बनाया जा सके और मित्रों कुना कहेंगे
05:17प्यादी अभी तक आपने हमारे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया तो सब्सक्राइब जरू कर ले हमारा चैनल इस परकार के
05:22धार्मिक और रोमांचक और सुन्दर जानकारी लाता रहता है तुमें
05:27अब चलते हैं पुनाय मिलेंगे एक नए वीडियो के साथ में तब तक सिरी सिवाय नबस्तु दिए
05:32हम कमेंड में जरूर लिखें शीषिवाय नमस्तु भी हम और पांच बार जाएं
05:37ज्याय सर्द्रिक्रश्णा ज्याय सरी करश्ना ज्याय सरी करश्णा ज्याय स्री करश्ना जरूर बोले भैद
05:42यह भजन सुनते सुनते इसकी व्याख्या सुनते सुनते जाए स्रीकर्ष्णा
05:47इसकी व्याओध्या सुनते इसकी व्याओटी जारा इसकी व्याओध्या।
Comments

Recommended