00:00महा शिवरात्री के इस बेहत खास मौके पर चलिए एक ऐसी कहानी में उतरते हैं जो भक्ती के असल माइने
00:07को हमारे दिलों तक पहुँचाएगी. ये कहानी है एक ऐसे भक्त की जिसे दुनिया ने तो ठुकरा दिया पर महादेव
00:14ने उन्होंने उसे गले से लगा लिया.
00:15तो चलिए चलते हैं महा शिवरात्री की उस रात में एक ऐसी रात जब एक तरफ तो पूरी दुनिया जश्न
00:23में डूबी थी त्योहार मना रही थी लेकिन लेकिन वहीं दूसरी तरफ एक भक्त था जो बिलकुल अकेला और दुखी
00:31अपनी जिंदगी की शायद सबसे काली रात
00:34का सामना कर रहा था
00:52जरा सूचिए एक तरफ मंदिरों में घंटों की आवाज गूंज रही है धूप और दियों की खुश्पू से सब कुछ
00:59पवित्र हो गया है
01:00पूरी दुनिया रोश्णी और उलास में है और ठीक उसी वक्त दूसरी तरफ दीन बंधू उसका जीवन बस अंधेरे और
01:07दर्द से भरा हुआ था
01:08ये कहानी इसी गहरे फर्क को इसी विरोधा भास को हमारे सामने रखती है
01:13अब दीन बंधू के इस दर्द को इस गहरे दुख को समझने के लिए ये जाना बहुत जरूरी है कि
01:20आखिर उसकी जिंदिगी थी कैसी
01:22वो कौन सी मुश्किले थी जिने वो हर रोज, हर रोज जीने के लिए मजबूर था
01:28उसका नाम था दीन बंधू, नाम का मतलब था दीनों का बे सहरों का दोस्त
01:33पर देखिये विडंबना, उसका अपना कोई दोस्त नहीं था, कोई सहरा नहीं था
01:37गाओं वाले तो उसे अप्शगुनी मानते थे, इतना कि उसकी परच्छाई से भी दूर भागते थे
01:43उसकी सुरत तक नहीं देखना चाते थे, तो दीन बंधू की जिंदगी बस ऐसे ही दर्दनाक किस्सों से भरी पड़ी
01:49थी
01:49समाज ने उसे कदम कदम पर जलील किया, उसे सताया, और उसके दिल पर ऐसे जख्म दिये, जो शायद ही
01:57कभी भर पाते
01:58एक पल को सोच कर देखिए, एक भूका इंसान और उसे मंदिर से, इश्वर के घर से, ये शब्द कहकर
02:06भगा गिया गया, ये सुनकर दीन बंधू का दिल जैसे तूट कर बिखर गया, उसे उस जगे से ठुकराया गया,
02:13जिसे सब भगवान का घर कहते हैं
02:15और तब दीन बंधू ने मनी मन महादेव से पूछा, हे महादेव, क्या आपके दरबार में भी मेरे लिए कोई
02:21जगा नहीं? ये कोई सवाल नहीं था, नहीं, ये तो उसके तूटे हुए दिल से निकली एक खामोश चीक थी,
02:28एक पुकार थी, तो अब कहानी उस मोड पे आत
02:45बेजज़त किया जाएगा, फिर अपमान मिलेगा, लेकिन फिर भी दीन बंधू अपने महादेव से मिलने के लिए मन्दिर की तरफ
02:52चल पड़ा, जानते हैं क्यों? क्योंकि उसकी अटूट भक्ती ने, उसके विश्वास ने, उससे ये हिम्मत दी थी, वो मन्दिर
03:00के एक को
03:01उने में छिप गया, और वहाँ उसने भगवान को कुछ भी नहीं चड़ाया, ना फूल, ना फल, उसने तो बस
03:07अपने आसू और अपने सारे दुख को ही अर्पित कर दिया, और यकीन मानिये, यही उसकी सबसे सच्ची, सबसे पवित्र
03:15पूजा थी, और यही पर ये कहानी ह
03:29ने दीन बंधू की वो दर्द भरी पुकार सुन ली, और उनका वो करुणा से भरा दिल, वो पिघल गया,
03:36उन्होंने तुरंत महादेव से पूछा कि ये दुखी भगत कौन है, तब महादेव ने कहा, देवी, दीन बंधू का हर
03:43एक आसू, उसे मिला हर एक अपमान, वो सब
03:47सीधा मेरे दिल तक पहुँचा है, और इसकी भगती, वही इस दुनिया में सबसे सची भगती है, और फिर कहानी
03:55का वो पल आता है, जिसका सब को इंतजार था, वो सबसे खास पल, जब भगवान शिव, खुद, अपने उस
04:03सच्चे भगत से मिलने के लिए धर्ती पर उतर आ
04:08कि तब ही उसे अचानक एक अजीब सी, एक अधभुत शांती महसूस हुई, और जब उसने अपनी आखें खोली, तो
04:17सामने का नजारा देखकर वो हैरान रह गया, भगवान शिव और मा पारवती खुद उसके सामने खड़े थे, भगवान शिव
04:25की आवाज पूरे मंदर में
04:27गूंज उठी, उन्होंने दीन बंधू से कहा कि तुम्हारी सच्ची भक्ती ने, तुम्हारे अटूट विश्वास ने मुझे जीत लिया है,
04:35तुम्हारे ये आशू दुनिया के किसी भी कीमती चड़ावे से कहीं ज्यादा अनमोल हैं, और बस उसी पल भगवान शिव
04:43ने �
04:44दीन बंधू को एक नएा जीवन दे दिया, उसके सारे दोख, सारी पीडा हर ली और उसका नाम भी बदल
04:50दिया, दीन बंधू से वो बन गया ग्ञान बंधू, यानी ग्यान का मित्र, तो चलिए अब इस कहानी के सबसे
04:59जरूरी सबक की बात करते हैं, वो सबक जो हमें दीन �
05:03इस पूरे बदलाव से मिलता है।
05:06अब ज्यानबंधू ने क्या किया?
05:08उसमें उन सभी लोगों को माफ कर दिया।
05:11जी हाँ उन सबको जिन्होंने उसे इतना सताया था।
05:15उसने कहा कि वो सब तो अज्यान में थे।
05:17और अब उसके मन में किसी के लिए जरा सभी गुस्सा नहीं था।
05:22तो इस कहानी का जो सार है, जो सबसे बड़ी सीख है,
05:25वो यही है कि सची भक्ती, किसी महंगी भेंट या दिखावे की मोताज नहीं होती।
05:31वो तो बस मन की सच्चाई और दिल की पवित्रता पर निर्भर करती है।
05:36तो आखिर में यह कहानी हमें एक सवाल के साथ छोड़ जाती है,
05:39कि जब किसी के पास चढ़ाने के लिए अर्पित करने के लिए कुछ भी ना हो,
05:43तब वो क्या दे सकता है।
05:45शायद तब भी दिल की सच्चाई और सच्ची भावनाय अर्पित की जा सकती हैं।
05:50और क्या पता वही सबसे बड़ी भेंट हो?
06:16बैल आइकन पर आल पर क्लिक कर लिजिए,
06:18ताकि आपको तुरंद नोटिक हाएं,
06:21पाच बा जाय भोलनाथ जाय भोलनाथ ज要 बोलनाथ जरूर बोलिए।
06:25और कमेंड में जाय भोलनाथ श्रीश्रीवा, नमस्तु न प्भ्याम जरूर लेके मित्प्याँ।
06:29जय वोरेना से शिवाना मास्टुब्यामा
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