00:00महा शिवरात्री ये सिर्फ एक त्योहार नहीं बलकि वो खास रात है जब आत्मा का परमात्मा से मिलन होता है
00:07कहते हैं इस रात पृत्वी पर आध्यात्मिक उर्जा अपने चरम पर होती है
00:12तो चलिए आज इस रात के गहरे मतलब को समझने की कोशिश करते हैं
00:17तो आज हम इसी सवाल का जवाब ढूंडेंगे क्या सच्ची भक्ती का मतलब दूद, फूल और बेल पत्र चड़ाना है
00:37या फिर कुछ और, कुछ ऐसा जो इन सब चीजों से कहीं बढ़कर है
00:41कुछ ऐसा जो सीधे दिल की गहराई से निकलता है
00:44अच्छा, तो ये रात इतनी खास क्यों है?
00:48असल में इसका महत्व हमारी पौराने कथाओं में बहुत गहरा है
00:51ये कोई मामूली रात नहीं है
00:53ये वो रात है, जब ब्रमान में कुछ ऐसी दिव्वे घटनाए हुई
00:57जिनोंने हमेशा हमेशा के लिए हमारी अध्यात्मिक दुनिया को बदल दिया
01:01देखिए, इस एक रात से तीन बड़ी-बड़ी कहानिया जुड़ी है
01:05पहली, जब भगवान शिव ने अपना दिव्वे नृत्य तांडव किया
01:09जो स्रिष्टी के बनने, चलने और खत्म होने का प्रतीक है
01:12दूसरी, जब मा पार्वती की सालों की कठोर तपस्या सफल हुई
01:16और उनका शिव से विवा हुआ
01:18और तीसरी, जब स्रिष्टी को बचाने के लिए शिव ने समुध मन्थन से निकला
01:22जहरीला हलाहल विश पी लिया था
01:24पर इन बड़े-बड़े ब्रहमांडिये घटनाओं के अलावा भी
01:28ये रात हमें एक बहुत ही परसनल, एक बहुत ही दिल को छूलेने वाली कहानी के जरिए
01:33भक्ती का असली मतलब समझाती है
01:35ये कहानी है दीन बंधू की
01:37नाम का मतलब है दीनों का मित्र पर किस्मत का खेल देखे
01:41उसका अपना कोई दोश नहीं था, कोई सहारा नहीं था
01:45तो सोचिये जरा, महाशिव रातरी की रात है
01:48एक तरफ पूरा गाउं जश्न में डूबा है
01:50मंदिरों से घंटियों की आवाज आ रही है
01:53और दूसरी तरफ है दीन बंधू
01:55अपनी तूटी फूटी जोपडी में
01:57भूख और अकेलेपन के अंधेरे में गुम
01:59उसके पास चढ़ाने को ना फूल थे
02:02ना दूद ना ही कोई और चीज
02:04उसकी जिन्दगी बस अपमान से भरी थी
02:08लोग उसे अपशकुनी कहकर
02:10अपने पास से भगा देते थे
02:12एक बार एक शादी में उसने थोड़ा सा खाना मांगा
02:15तो उसे बुरी तरह पीटा गया
02:17यहां तक कि मंदिर में भी
02:18उसे अपवित्र कहकर प्रसाद देने से मना कर दिया गया
02:22वो हर रोज यही सोचता था
02:24हे महादेव आखिर ऐसा जीवन मुझे क्यों दिया
02:27उस रात जब उसके पास देने के लिए सच मुझ कुछ भी नहीं था
02:31उसके मन में एक हिम्मत आई
02:33उसने सोचा आज तो महादेव का महापर्व है
02:36क्या आज भी वो मुझे अपने दर्वाजे से लोटा देंगे
02:39नहीं आज तो मैं जरूर जाऊंगा
02:41बस पेट की आग और दिल में एक आखरी उम्मीद लेकर
02:45वो मंदिर की तरफ चल पड़ा
02:47मंदिर पहुँच कर वो एक कोने में बैठ गया
02:50चारों तरफ भीड थी मंत्र पड़े जा रहे थे
02:53दीन बंदू के पास कुछ नहीं था
02:55सिवाएक तूटे हुए दिल और आखों में भरे सच्चे आशूओं के
02:59और बस उसकी आखों से आशूओं की धारा बहने लगी
03:03उसका दिल जैसे चिला कर कह रहा था
03:05हे मेरे महादेव, मेरे पास आपको देने के लिए कुछ भी नहीं है
03:09आज, आज मेरे ये आशू ही आपका अभिशेक है
03:12उसने अपनी सारी पीड़ा, अपनी जिंदगी का सारा अपमान
03:17उन आशूओं में घोल कर भगवान को अर्पित कर दिया
03:20उसने मन ही मन कहा
03:29कहते हैं कि दीन बंधु की ये खामोश आवाज, ये दर्द भरी पुकार
03:33सीधे कैलाश परवत तक पहुच गई
03:36वहाँ भगवान शिफ्त ध्यान में थे, पर उनके पास बैठी मा पारवती का दिल पिघल गया
03:41उन्होंने दीन बंधु के उस गहरे दर्द को महसूस कर लिया था
03:45मा पारवती ने महादेव से उस भक्त की पीडा को दूर करने के लिए प्रार्थना की
03:51और फिर कुछ ऐसा हुआ जिसकी दीन बंधु ने कभी कलपना भी नहीं की होगी
03:57महादेव ने अपनी आखें खोली और कहा
03:59देवी इसका दिल तो बिल्कुल सोने जैसा खरा है
04:03दुनिया ने इसे हर कदम पर ठुकराया
04:05पर देखो इसका विश्वास मुझ पर से नहीं डिगा
04:08सच्ची भक्ती तो यही है
04:10जो इतने मुश्किल हालात में भी टिकी रहे
04:12हमें इसे दर्शन देने ही होंगे
04:14और फिर अचानक पूरे मंदिर में एक दिव्य रोश्नी फैल गई
04:19उस रोश्नी के बीच दीन बंधु ने साक्षाद भगवान शिव
04:23और मा पारवदी को अपने सामने देखा
04:25पहले तो उसे अपनी आखो पर यकीन ही नहीं हुआ
04:27और फिर उसकी आखो से खुशी और शुकराने के आसू बहने लगे
04:32भगवान शिव ने उसे आशिरवाद देते हुए कहा
04:35उठो मेरे भग्त तुम्हारे इन आसूं की पवित्रता
04:38दुनिया के हर चड़ावे से कहीं ज्यादा कीमती है
04:41आज से तुम्हारे सारे दुख खत्म होते हैं
04:43महादेव ने उसे एक नया नाम दिया
04:45उन्होंने कहा आज से तुम दीन बंधु नहीं ग्यान बंधु कहलाओगे
04:49तुम्हारी गरीबी खतम होती है
04:51लेकिन याद रखना असली दौलत तो ग्यान और भक्ती ही है
04:55और बस उसी पल दीन बंधु की तो जैसे काया ही पलड़ गई
04:59और पता है सबसे बड़ी बात क्या हुई
05:01जब वही लोग जो से हमेशा दुदकारते थे उससे माफी मांगने आए
05:06तो ग्यान बंधु की आँखों में गुस्सा नहीं बलकी दया थी
05:10उसने हाद जोड कर कहा आप लोगों ने जो भी किया वो नासमजी में किया
05:14मैं आप सबको माफ करता हूँ
05:16असल में तो ये थी उसकी जीत
05:18गुस्से पर दया की जीत
05:20तो दीन बंधु की ये कहानी हमें महा शिवरात्री का असली मतलब समझाती है
05:24और ये मतलब बाहर के दिखावे से बहुत बहुत गहरा है
05:28इस कंपैरिजन को देखिए
05:30कितना पावफुल है
05:32एक तरफ हैं दूद, जल, बेल पत्र
05:35और दूसरी तरफ हैं दीन बंधु के चढ़ावे
05:38मतलब साफ है
05:39महा देव के लिए दूद, जल से कहीं कीमती है सच्छे आसू
05:43और फूलों से ज्यादा मुल्यवान है एक तूटावा दिल
05:46जिसे भक्ती के धागे से जोड़ा गया हो
05:48तो कुल मिलाकर महा शिवरात्री हमें कई बाते सिखाती है
05:52मा पारवती की तरह अपने लक्ष पर डटे रहना
05:55शिकारी की कहानी की तरह ये समझना कि इनसान का दिल कभी भी बदल सकता है
06:00नीलकंट के रूप में ये जानना कि दूसरों के लिए दर्द सहना ही असली सेवा है
06:05और हाँ, दीन बंधु की तरह ये मानना कि सच्ची भावना ही सबसे बड़ी पूजा है
06:10आखिर में शिव शब्द का मतलब ही है कल्यान
06:13तो ये त्योहार असल में अपने अंदर के दुश्मन यानि गुसा, लालच और एहिंकार इन सब को खतम करने का
06:21दिन है
06:21ताकि हमारे अंदर शिव का यानि कल्यान का जन्ब हो सके
06:25तो बस अगली बार जब भी जिन्दगी में अंधेरा लगे, जब मन बहुत बेचैन हो
06:31तो महा शिवरात्री की इस रात को और दीन बंधु की इस कहानी को जरूर याद रखना
06:36क्योंकि सच्ची भक्ती के लिए किसी सामान की जरूरत नहीं होती
06:40सिर्फ एक साफ दिल चाहिए
06:42शिव किसी दूर कैलाश परवत पर नहीं है
06:44वो तो हम सब के अंदर ही बसे हैं
06:46हर हर महादेव
07:06आपको इस प्रगा की धार में वीडियो का नोटिफिकेशन तुरंत मिलता रहा है
07:10मैं तुर आपकी इस विशे पर वीडियो देखना चाहते हैं
07:12आप हमें कमेंड में बताए हम कोसिस करेंगे
07:14अपनी ट्यूम दारा उस विशे पर वीडियो बनाने के लिए
07:17तो हमारे चैनल को जरूर सब्सक्राइब करें
07:20और पांच वार जैसराम जैसराम जैसराम जरूर बोले
07:23और कमेंड में भी जैसराम जरूर लिखें
07:25जैसराम
07:26जै भूले नात
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