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Mahashivratri Vrat Katha 2026: महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर आइये आपको सुनाते है व्रत कथा
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~HT.504~

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00:01भगवान शिर्फ को चतूरदशी तिथी का स्वामी माना जाता है इशान सहीता में कहा गया है कि भगवान शिर्फ आलगुनमास
00:07के क्रिश्नपक्ष की चतूरदशी तिथी वाले दिन जियोतरलिंग के रूप में प्रगट होए थे इसलिए इस तिथी वाले दिन महाश्रिवर
00:15पर्व मनाया जाने लगा लेकिन इसके अलावा भी महाश्रिवरात्री के विशय में कई मानेदाएं हैं एक कथा के नुसार इस
00:23दिन सागर मन्थन हुआ था और जिसमें से कालकेतु विश निकला था उसमें भगवान श्रिव ने संपून ब्रह्माहंट की रक्षा
00:31करने के लि�
00:44में भी मनाने की परंपरा नहीं है ऐसे में चलिए आपको महाश्रिवरात्री की वृत कथा सुनाते हैं पूर्वकाल में तरिभानू
00:53नामा के एक शिकारी था जानवरु की हत्या करके वो अपने परिवार को पालता था वो एक साहुकार का कर्जदार
01:00था लेकिन उसका रण सम
01:03क्रोधत सहुकार ने शिकारी को शिव्मत में बंधी बना लियाival मुझे और चिव्मात के लिए विश्वर stoked IT जकारी ध्यान
01:11मग्न होकर शिव्मात हमद्ध क्वरत की कथा भी सुनी शाम होते ही सहुकार नंहीं अपAL सोंग दरने का थेंगत लिनिकिन
01:31लेकिन दिन भर बंदी ग्रह में रहने की कारण भोग प्यास से व्याकुल था
01:35शिकार खोच था हुआ वो बहुत दूर निकल गया
01:38जब अंधकार हो गया तो उसने विचार किया कि रात जंगल में ही बितानी पड़ीगी
01:43वो वन एक तलाब के किनारे एक बेल के पेड़ पर चड़कर रात पीतने का इंदिजार करने लगा
01:49बिल्ब व्रिक्ष के नीजे शिवलिंग था जो बिल्फ पत्रों से ढखा हुआ था
01:54शिकारी को उसका पताना चला पड़ाव बनाते समय उसने जो टहनिया तोड़ी वो संयोग से शिवलिंग पर गिरती चली गई
02:01इस प्रकार दिन भर भूके प्यासे शिकारी का व्रत भी हो गया और शिवलिंग पर बिल्फ पत्र भी चड़ गए
02:06एक पहर रातरी बीच जाने पर एक गर्भीनी हिरनी ताला पर पानी पीने पहुँची
02:11शिकारी ने धनुष पर तीर चड़ा कर जो ही प्रत्यंचा खीची
02:16हिरनी बोली मैं गर्भीनी हूँ
02:19शिग्री ही प्रसफ करूंगी
02:21तुम्हें एक साथ दो जीवों की हत्या करोगी जो ठीक नहीं है
02:25मैं बच्चे को जर्म देकर शिग्र ही तुमारे समक्ष प्रस्तद हो जाऊंगी
02:29तब माल लेना
02:30शिकारी ने प्रत्यंचा धेली कर दी और हिरनी जंगली जाड़ियों में लुप्त हो गई
02:35प्रत्यंचा चड़ाहने तथा धेली करने के वक्त कुछ बिलपत्र अनायास ही तूटकर शिवलिंग पर गिर गए
02:40इस प्रकार उससे अंजाने में ही प्रत्म पहर का पूजन भी संपन्न हो गया
02:45कुछी देर बाद एक और हिरनी उधर से निकली
02:48शिकारी की प्रसनता का ठिकाना न रहा
02:50समीप आने पर उसने धनुष पर बाण चड़ाया
02:53तब उसे देख हिरनी ने विनर्मता पुर्वक निवितन किया
02:56हे शिकारी मैं थोड़ी देर पहले रितू से निवरित होई हूँ
03:00कामा तोर विरहनी हूँ
03:02अपने प्रिये की खोज में भटक रही हूँ
03:04मैं अपने पती से मिलकर शिगर ही तुमारे पास आ जाओंगी
03:07शिकारी ने उसे भी जाने दिया
03:09दो बार शिकार को खोकर उसका मा थठनका
03:12वो चिंता में पड़ गया
03:13रातरी का आखरी पहर पीद रहा था
03:16इस बार भी धनुष से लगकर कुछ पेलपत्र शिवलिंग पर जागे रे
03:20सथा दूसरे पहर की पूजन भी संपन्न हो गई
03:22तभी एक अन्य हिरनी अपने बच्चे की साथ उधर से निकली
03:26शिकारी के लिए सुणने मफसर था
03:29उसने धनुष पर तीर चड़ाने में देरी नहीं लगाई
03:32वो तीर छोड़ने ही वाला था कि हिरनी बोली
03:35हे शिकारी मैं बच्चो को इनके पिता के हवाले करके लोटाओंगी
03:39इस समय मुझे मत मारो
03:41शिकारी हसा और बोला
03:43सामने आय शिकार को छोड़ दू
03:45मैं ऐसा मुर्क नहीं
03:46इससे पहले मैं दो बार अपना शिकार खो चुका हूँ
03:49मेरे बच्चे भोगे प्यास से व्यग्र हो रहे है
03:51उत्तर में हिरनी ने फिर कहा
03:53जैसे तुम्हें अपने बच्चों की मम्दा सता रही है
03:56ठीक वैसे मुझे भी सता रही है
03:58हे शिकारी मेरा विश्वास करो
04:00मैं इन्हें इनके पिता के पास छोड़कर तुरंद लोटने की प्रतिग्या करती हूँ
04:04हिरनी का दुख भरा स्वर सुन कर शिकारी को उस पर तया आ गई
04:08उसने उस मृगी को भी जाने दिया
04:10शिकार के अभाव में तथा भूख प्यास से व्याकुल शिकारी अंजाने में ही बेल व्रिक्ष पर बैठा बेल पत्र तोड़
04:17तोड़ कर नीचे फेकता जा रहा था
04:19पौफटने को हुई तो एक हश्ट पुष्ट म्रिग उसी रास्ते पर आया
04:24शिकारी ने सोच लिया कि इसका शिकार वो अवश्य करेगा
04:27शिकारी की तनी प्रत्यंचा देखकर ब्रिग विनीत स्वर में बोला
04:31हे शिकारी यदि तुमने मुझसे पूर्व आने वाले तेन ब्रिगियों तथा छोटे छोटे बच्चों को मार डाला है
04:37तो मुझे भी माढ़ने में विलम ना करो थाकि मुझे उनके वियोग में एक श्रण भी तुखना सहना पड़े
04:43मैं उन हिरणियों का पती हूँ
04:45यदि तुमने उन्हें जीवन दान दिया है तो मुझे भी कुछ ख्रण का जीवन देने की कृपा करो
04:50मैं उनसे मिलकर तुम्हारी समक्ष उपस्तित हो जाओंगा
04:53मुरिक की बात सुनते ही शिकारी के सामने पूरी रात का घटना चक्र खुमाया
04:58उसने सारी कथा मुरिक को सुना दी
05:01तुम्रिक ने कहा मेरी तीनों पत्निया जिस प्रकार प्रतिग्या बद्ध होकर गई है
05:06मेरी मृत्यों से अपने धर्म का पालन नहीं कर पाएंगी
05:10अधा जैसे तुमने उन्हें विश्वास पात्र मान कर छुड़ा है
05:13वैसे ही मुझे भी जाने दो
05:15मैं उन्हें सबके साथ तुम्हारे सामने एक शीकर ही उपस्तित होता हूँ
05:18शिकारी ने उसे भी जाने दिया
05:20इस प्रकार प्रताह हो आई
05:22उपवास, रात्री जागरन थथा शिवलिंग पर बेलपत्र चड़ने से अंजाने में ही शिवरात्री की पूजा पूर्णों हो गई
05:29पर अंजाने में ही कोई पूजन का परिणाम उसे ततकाल मिला
05:33शिकारी का हिंसा खृदय निर्मल हो गया
05:36उसमें भगवत शक्ती का वास हो गया
05:39थोड़ी दिर बाद वुम्रिग सह परिवार शिकारी की समक्ष उपस्तित हो गया
05:43ताकि वो उनका शिकार कर सके
05:45किन्तु जंगली पशों की ऐसी सत्यता, सात्विक्ता और सामोहिक प्रेमभाम न देखकर शिकारी को पड़ी कलानी होई
05:52उस निम्रिक परिवार को जीवंदान दे दिया
05:55अंजाने में शिवरात्री के व्रत का पालन करने पर भी शिकारी को मोक्ष की प्राप्ति होई
06:01जम्रत्योकाल में यम्दूत उसके जीव को ले जाने आई तो शिवगणों ने उन्हें वापस भीश दिया
06:06तथा शिकारी को शिवलोक ले गए
06:08शिवजी की कृपा से ही अपने इस जन में राजा चित्रभानू अपने पिछले जन को याल रख पाई
06:14तथा महाशिवरात्री के महत्व को जान कर उसका अगले जन में भी पालन कर पाई
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