00:00सभी समसद्गण, सरकार के सभी कर्मचारी, अन्यमहनुभाव और मेरे प्यारे साथियों
00:13आज हम सभी एक नए इतिहास को बनते देख रहे हैं
00:30आज विक्रम सम्वत्थ दोहजार बयासी, फाल्दुन कृष्णपक्ष, विजिया एकादसी, ये महत्वपुन शुबदीन, माग चौबीश, सक सम्वत्थ
01:001947 का पुन्य अउसर और आज की प्रचली द्भाषा में कहूं तो,
01:1013 फरवरी का ये दिन भारत की विकास यात्रा में एक नए आरंब का साक्षी बन रहा है
01:24हमारा शास्त्रों में विजया एकादसी का बहुत महत्व रहा है
01:37इस दिन जिस संकल्प के साथ आगे बढ़ते हैं उसमें विजय अवश्य प्राप्त होती हैं
01:51आज हम सभी भी विक्सीत भारत का संकल्प लेकर सेवा तीर्थ में करतव्य भवन में प्रवेश कर रहें
02:11अपने लक्ष में विजय होने का दैविय आशिरवाद हमारे साथ है
02:20मैं आप सभी को
02:24PMO की पूरी टीम को
02:29केमिनेट सचीवाले और विभिन्य विभागों के सभी कर्मचारियों को
02:38सेवा तीर्थ और नए भवनों की बधाई देता है
02:45मैं इनके निर्मान से जुड़े सभी इंजिनियर्स का और श्रमिक साथियों का आभार व्यक्त करता है
02:59साथियों आजहादी के बाद
03:06साउथ ब्लोक और नर्थ ब्लोक
03:13जैसी इमारतों से देश के लिए अनेक एहम निर्णे हुए नीतियां बनी
03:25लेकिन ये भी सच है
03:29ये इमारतें
03:32ब्रिटीज सामराज्य के प्रतीक के तौर पर बढ़ाई गई थी
03:39इन इमारतों को बनाने का मकसद
03:44भारत को सदियों तक
03:49गुलामी की जंजीरों में जकड़े रखना था
03:54साथियों आप भी जानते हैं
04:00एक समय था
04:03जब कोलकता शहर
04:06देश की राजधानी हुआ करता था
04:11लेकिन 1905 के बंगाल विभाजन के उस दौर में
04:17कोलकता
04:19ब्रिटीश विरोधी आंदोलन का
04:23प्रबल केंद्र बन चुका था
04:27और इसलिए अंग्रेजों ने
04:301911 में
04:34भारत की राजधानी को
04:37कोलकता से दिल्ली शिप किया
04:41और उसी के बाद
04:45अंग्रेजी हुकुमत की जरूरतों और उसकी सोच को ध्यान में रखकर
04:54नॉर्थ ब्लॉक, साउट ब्लॉक जैसी इमारते बनाने का काम शुरू हुआ हुआ है।
05:02इसके बाद, जब राजधीना हिल्स के इन भवनों का उद्गारन हुआ था, तब उस समय के वाइसराई ने कहा था, जो नए भवन बने हैं, वो ब्रिटीज समराड की इच्छाओं के अनुरूप बने हैं।
05:25यानि उस दौर में ये भवन ब्रिटेन के महराजा की सोच को गुलाम भारत की जमिन पर उतारने का माज्यम थे।
05:43राइशिना हिल्स का चुनाव भी इसलिए किया गया, कि इमारतें अन्य इमारतों से उपर रहे, कोई उनकी बराबरी ना कर सके।
06:01अब संयोग से सेवा तिर्ष का ये पूरा परिशर किसी पहाड़ी पर न होकर जमीन से ज़्यादा जुड़ा है।
06:16South Block और North Block जैसी इमारतें जहां ब्रिटीज हकुमत की सोच को लागू करने के लिए बनी थी।
06:32वही आज मैं गर्व के साथ कह सकता हूँ कि सेवा तिर्थ और कर्तब्व भवन जैसे नए परिशर भारत की जनता की आकांख्षाओं को पूरा करने के लिए बने हैं।
06:56यहां से जो फैसले होंगे वो किसी महराजा की सोच को नहीं
07:08एक सो चालीस करोड देश स्वाश्यों की अपेक्षाओं को आगे बढ़ाने का आधार होंग बनेंगे।
07:18इसी अम्रित भावना के साथ आज मैं ये सेवातीर्थ एक कर्तव्य भवन भारत की जनता को समर्पित कर रहा हूँ।
07:37साथियों इस समय 21 सदी का पहला क्वार्टर पूरा हो चुका है।
07:52ये आवशक है कि विक्सीद भारत की हमारी कलपना केवल नीतियों और योजनाओं में ही नहीं हमारे कार्यस्थलों हमारी इमारतों में भी दिखाई दे।
08:14जहां से देश का संचालन होता है वो जगर प्रभावी भी होनी चाहिए और प्रेरणादाई भी होनी चाहिए।
08:32वो इंप्रेसिव भी हो और इंस्पारिंग भी हो। आज नई नई टेकनलोजी तेजी से हमारे भी जगह बना रही है।
08:51लेकिन इन सुविधाओं के विस्तार के लिए नए टूल्स के उप्योग के लिए पुरानी इमारतें ना काफी पड़ रही है।
09:04South Block, North Block पुराने भवनों में जगह की कमी थी।
09:15सुविधाओं की भी अपनी सिमाएं थी।
09:19करीब करीब सौ साल पुरानी ये इमारतें भीतर से जरजर होती जा रही थी।
09:30इसके अलावा भी कई चुनोतियां थी।
09:34मैं समझता हूँ इन चुनोतियों के बारे में भी देश को निरंतर बताया जाना जरूरी है।
09:46जैसे आजहादी के इतने दसकों के बाद भी भारत सरकार के अनेकों मंत्राले दिल्ली के 50 से जादा अलग-अलग स्थानों से चल रहे हैं।
10:01हर साल इन मंत्रालेओं की इमारतों के किराए पर ही पती वर्ष देड़ हजार करोड रुपिय से जादा खर्च हो रहे हैं।
10:17हर रोच आट से दस हजार करमचारियों को एक इमारत से दूसरी इमारत में जाने का लौजिस्तिक खर्च अलग होता था।
10:33अब सेवातिर्थ और कर्तवय भवनों के निर्मान से ये खर्च कम होगा, समय बचेगा और करमचारियों के समय की बचत से प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी।
10:53साथियों, इस बदलाव के बीच निश्चित तोर पर पूराने भवन में बिताए गए वर्षों की स्मृतियां हमारे साथ रहेगी।
11:13अलग-अलग समय की चुनोतियों से जूचते हुए, वहां से कई महत्वपून फैसले किये गए हैं।
11:23वहां से देश को नई दिशा मिली। सुधार की अनेक पहले हुई है।
11:31वो परिशर, वो इमारत, भारत के इतिहास का अमर हिस्सा है।
11:41इसलिए हमने उस भवन को देश के लिए समर्पित मुज्यम बनाने का फैसला किया है।
11:52वो युगे युगीन भारत मुज्यम का ही हिस्सा होगी।
11:58वो इमारत देश की आने वाली पीडी के लिए प्रिणा केंद्र बनेगी।
12:06नई पीडी के युवा जब नहां जाएंगे तो एतिहास एक लेगेसी उनका मारदर्शन करेगी।
12:17साथियों, विक्सीद भारत की सियात्रा में ये बहुत जरूरी है कि भारत गुलामी की मानसिक्ता से मुक्त होकर आगे बड़े।
12:35दुर्भाग्य है आजादी के बाद भी हमारे हां गुलामी के प्रतिकों को धोया जाता रहा।
12:49आप देखिए, पहले क्या स्थिती थी।
12:55प्रधानमत्री निवास जहां है उसे रेस्कोर्ष कहा जाता था।
13:02उपराष्टपती के लिए कोई निवास्थां त्राही नहीं था।
13:08राष्टपती भवन तक आने वाले रास्त्य को लोकतंत्र में राजपत कहा जाता था।
13:19आधाद भारत में जो सैनिक शहीद हुए उनके लिए कोई स्मारक ही नहीं था।
13:30जो सुरक्षयबल, जो पुलिस कनमी शहीद हुए उनके लिए भी कोई स्मुर्तिस्थल नहीं था।
13:45यानि 1947 में स्वतंत्र हुए देश की राजदानी जहां से देश के बड़े-बड़े निर्णे होते थे।
13:57वो पूरी तरह गुलामी की मानसिक्ता में जक्डी हुई थी।
14:05दिल्ली की इमारतों, सारवजनिक स्थानों, एतिहासिक स्थलों पर गुलामी के चिन ही भरे पड़े।
14:20लेकिन साथियों कहते हैं न, समय का चक्र कभी भी एक जैसा नहीं रहता।
14:352014 में देश ने ताहि किया कि गुलामी की मानसिक्ता अब और नहीं चलेगी।
14:50हमने गुलामी की इस मानसिक्ता को बदलने का अभ्यान शुरू किया।
14:58हमने वीरों के नाम नेशनल बार मेमोरियल बनाया।
15:08हमने पुलीस की वित्ता को सम्मान देने के लिए पुलीस मारक बनाया।
15:15गेस कौर्स रोड उसका नाम बदलकर लोग कल्यान मार रखा गया।
15:25और ये केवल नाम बदलने का निरण ही नहीं था।
15:31ये सत्ता के मिजाज को सेवा की भावना में बदलने का पवित्र प्रयास था।
15:45साथ क्यों हमारे इन फैसलों के पीशे एक गहरी भावना है।
15:53एक वीजन है।
15:57ये हमारे वर्तमान, हमारे अतीत और भविशकों भारत के गवरव से जोडती है।
16:09जिस जगह को पहले राजपत के नाम से जाना जाता था।
16:15वहां न परियापत सुविधाएं थी।
16:19न आम नागरीकों के लिए समुचित ववस्ता।
16:23हमने उसे कर्तब ये पत के रुप में विक्सित किया।
16:28आज बही स्थान परिवारों, बच्चों, देश बर्चे आने वाले नागरीकों के लिए एक जीवन सार्वजिनिक स्थल बन चुका है।
16:41इसी परिशन में नेताजी सुभाज चंद्र बोज की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई।
16:49लंबे समय तक हमारी राजधानी में अपने महान नायकों की स्वृति को इस रुप में स्थान नहीं मिला था।
17:02हमने यह तहय किया कि देश की नई पीडी राजधानी के कैंद्र में अपने नायकों से प्रेरणा ले।
17:15राश्ट्रपति भवन परिशर में भी परिवर्तन किये गया है।
17:22मुगल गार्डन का नाम बदल कर अम्रत उद्ध्यान किया गया है।
17:29जब पुरानी संसत के पास नए संसत भवन का निर्मान हुआ तो हमने पुराने भवन को भुलाया नहीं।
17:41हमने उसे संविधान सदन के रुप में नई पहचान दी।
17:47जब अलग-अलग मंत्रालयों को एक परिसर में लाया गया, तो उन भवनों को करत्यव्य भवन का नाम दिया गया।
18:01नाम बदलने की पहल केवल शब्दों का बढ़लाव नहीं है।
18:09इन सभी प्रयासों के पीछे वैचारिक सुत्रता एक ही है।
18:19स्वतंत्र भारत की स्वतंत्र पहचान गुलामी से मुक्त निशान।
18:29साथियों, नए प्रधानमंत्री कारले का नाम है सेवा तीर्थ।
18:40सेवा की भावना ही भारत की आत्मा है।
18:47सेवा की भावना ही भारत की पहचान है।
18:53स्री रामकर्ष्ण परभावंजी कहते थे शिव ज्यान से जीव ज्यान सेवा।
19:03यह विचार केवल अध्यात्मिक नहीं है।
19:10यह राष्ट निर्मान का दर्शन है।
19:14यह भवन हमें हरक्षन याद दिलाएगा कि शाचन का अर्थ सेवा है।
19:26दाइत्व का अर्थ समर्पन है।
19:30हमारे सास्त्रों में भी कहा गया है।
19:35सेवा परमो धर्मा है।
19:38हर्थात सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।
19:46भारतिय संस्कृति का यही विचार प्रधान मंत्री कार्याल है।
19:55और सरकार का विजन है।
19:59इसलिए सेवा तिर्थ यह केवल एक नाम नहीं।
20:06यह संकल्प है।
20:10सेवा तिर्थ यानि नागरिक की सेवा से पवित्र हुआ स्थल।
20:19सेवा के संकल्प को सिद्धी तक ले जाने का स्थल।
20:25तिर्थ का अर्ध भी होता है।
20:29तर्थी अनेन इती तिर्थ।
20:33अर्थात जो तारने की पार करने की छमता रखे।
20:39जो लक्षों की प्राप्ति में सहायक हो वो तीर्थ है।
20:47आज भारत के सामने भी विक्सित भारत का लक्ष है।
20:55आत्म निर्भर भारत का लक्ष है।
20:59हमें करोणों देश्वाजियों को गरीबी से मुक्ति दिलानी है।
21:08हमें देश को गुलामी की मानसिक्ता से मुक्ति दिलानी है।
21:16और ये काम सेवा के सामर्त से ही सिद्ध होगा।
21:23थात्यों आज जब भारत रिफाउम एक्सप्रेस पर सवार है।
21:32आज जब भारत अंतराष्टिय समंधों के एक नई गाथा लिख रहा है।
21:40आज जब नए नए ट्रेड अग्रिमेंट्स संभावनाओं के नए दरवाजे खोल रहे हैं।
21:48जब देश सेचुरेशन के लक्ष की और तेजी से बढ़ रहा है।
21:56तो सेवा तिरत और करतवे भवनों में आप सब के काम की नई गती और आपका नया आत्मविश्वास देश के लक्षों को प्राप्त करने में बहुत बड़ी भूमी का निभाएगा।
22:17साथ्यों, हमारी संस्कृति कहती हैं, हर सुब कार्य से पहले स्वस्ति वाचन,
22:29मंगल की कामना, शुभ का संकल्प वेद का मंत्र हमें दिशा देता है।
22:41आनो भद्राहा, क्रतवो यंतु विश्वतह, अर्धात, कल्यान कारी विचार, हर दिशा से हम तक आते रहें।
22:56यही इस भवन की आत्मा होनी चाहिए।
23:03भारत के महान लोक्तंत्र में, जनता के विचार ही हमारी शक्ति है।
23:13जनता के सपने ही हमारी पूजी है।
23:20जनता की अपेक्षाहे हमारी प्रात्विक्ता है।
23:26जनता की आकांग्षाहे ही हमारा मारदर्शन है।
23:31ुई भावनों और इस भवन के बीच कोई दिवार नहीं होनी चाहिए, कोई दूरी नहीं होनी चाहिए।
23:44जब आप जनता के सपनों को समझेंगे, तभी नीतियां जीवन्त होगी। जब आप जनता की आकांख्षाओं को मैसूस करेंगे, तभी निर्णे प्रभावी होंगे।
24:09पिछले ग्यारा वर्सों में हमने गवनन्स का एक नया मोडल देखा है, एक ऐसा मोडल जहां निर्णे, निर्णे का केंद्रा भारत का नागरीक है, नागरीक देवो भवा, ये केवल वाक्य नहीं है,
24:39ये हमारी कार्य संस्कृति है, इसे आत्म साथ कर आपके इन नए भवनों में प्रवेश कर रहा है।
24:51सेवा तिर्थ में लिया गया हर निर्णे, यहां चलने वाली हर फाइल, यहां बिताया गया हर ख्षान,
25:05एक सो चालीस करोड देश वास्वा के जीवन को बहतर बनाने के लिए होना चाहिए।
25:15मैं हर अधिकारी से, हर कर्मचारी से, हर कर्मयोगी से कहना चाहता हूँ।
25:30जब भी आप इस भवन में कदम रखे, पल भर के लिए रुख जाए।
25:39कुशक्षन ठहरे, अपने आप से पूछे, क्या आज का मेरा कारिय करोड देश वास्चों के जीवन को आसान बनाएगा।
25:55यही आत्ममंधन इस थान की सबसे बड़ी शक्ति वनेगा।
26:03साथ क्यों, हम यहाँ अधिकार दिखाने नहीं आये हैं।
26:10हम यहाँ जिम्मेदारी निभाने आये हैं।
26:16और हमने देखा है, जब शांचन सेवा भाव से चलता है, तो परिणाम भी और साधारन होते हैं।
26:28और तभी तो पचीस करोड़ लोग गरीबी से बाहार निकलते हैं।
26:37तभी तो आर्थ ववस्ता नई गति पकरती हैं।
26:43साथ क्यों, आज विक्सित भारत 2047 सिर्फ हमारा लक्ष नहीं है।
26:52यह विश्व की निगाओं में भारत की प्रतिया है।
27:00और इसलिए यहां बनने वाली हर नीती, यहां होने वाला हर दिर्णे, सेवा की निरंतर भावना से प्रेरित होना चाहिए।
27:16और एक दिल जब आप सेवा निवरत्त होकर या स्थानांतरन के बाद इस भावन से विदा लेंगे, आप पीछे मुड़ कर देखेंगे, अपने आज के दिनों को गर्व के साथ याद करेंगे।
27:39तब आप स्वयम से कह सकेंगे कि हाँ, जितने दिन में सेवा तिर्थ में रहां, करत भावन में रहां, हर दिन मैंने देश के नागरीकों की सेवा की।
27:57हर निर्णे राज के हीत में लिया, वक्षाण आपको सुकुन देगा, वक्षाण आपकी सबसे बड़ी उपलब्दी होगा,
28:14वक्षाण आपकी व्यक्तिगत पूंजी होगा, और वही पूंजी आपके जीवन को गवरों से भर देगी।
28:28साथियों, महत्मा गांधी की भावना थी, कर्तव्य की बुनियाद पर ही अधिकार की भव्य इमारत का निर्माण होता है,
28:44जब हम अपना कर्तव्य निभाते हैं, तो बड़ी से बड़ी चुनोती से टकरा सकते हैं, उसका सम्विधान कर सकते हैं,
28:58हमारे सम्विधान निर्माताओं ने, इसलिए ही कर्तव्य पर बहुत जोड दिया है,
29:06और इसलिए हमें याद रखना है, कोटी-कोटी देशवाच्यों के सपनों को साकार करने का अधार हैं,
29:16कर्तव्य, कर्तव्य आरंब है, कर्तव्य इस जीवन्त राष्ट की प्राण वायू है,
29:31करुणा और कर्मणता के इस देशुत्र में बंदा कर्म है, कर्तव्य,
29:38संकल्पों की आज है, कर्तव्य, परिश्रम की पराकास्ता है, कर्तव्य,
29:47हर समस्या का समाधान है, कर्तव्य, विक्सित भारत का विश्वाथ है, कर्तव्य,
29:55कर्तव्य, समता है, कर्तव्य, ममता है, कर्तव्य, सार्व भौमिक है, कर्तव्य, सर्वस्पर्शी है,
30:10सबका साथ, सबका विकास के भाव में पिरोया, मंत्र है कर्तव्य,
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33:19ुपूरा विश्वास है हमारा संकल पर इतिहास लिखेगा हमारा परिष्णम पीडियों को दिशा देगा
33:33मैंने लाल किले से कहा था यही समय है सही समय है आईए हम हर पल हर ख्षण का सही इस्तमाल करें
33:50हम राष्ट्र प्रथम की भावना से ऐसे पुन्य कार्य करें कि आने वाली सतावियां कहें
34:02यही वह समय था जब भारत ने स्वयम के भाग्य को पुनह परिभाशित किया
34:14यही वह समय था जब भारत ने अगले एक हजार साल के उज्वल भविच के लिए
34:26अपना मजबुत कदम नई उर्जा नई गती के साथ उठाया था
34:36इसी विश्वास के साथ आप सभी को मेरी बहुत बहुत शुब कामनाएं
34:45बहुत बहुत धन्यवाद बंदे मात्रम
34:50बहुत बहुत बहुत