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  • 8 months ago
सोजे वतन नोवेल प्रेमचन्द

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00:00क्या कहानियां सच में एक देश को जगा सकती हैं।
00:03आज हम प्रेमचंद के सोजे वतन की दुनिया में उतरेंगे।
00:07ये वो कहानी संग्रे है जिसे बिटिश सरकार ने इतना खतरनाक माना कि उसे जला दिया गया था।
00:14आए समझते हैं क्यों।
00:16प्रेमचंद के लिए साहित ते सिर्फ मनोरंजन नहीं था।
00:18वो तो अपने दौर का, अपने समाज का आईना था।
00:22सोजे वतन की शुरुआत में ही उन्होंने साफ साफ लिखा कि कहानिया ही वो जरिया हैं जो किसी युग की आत्मा को, उसके दर्द को आवाज देती है।
00:31और ये आवाज बुलंद की मुशिप प्रेमचंद ने।
00:34सोचिए, वो एक ऐसा दौर था जब देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। और उस वक्त उन्होंने महसूस किया कि शब्दों में करांती लाने की कितनी जबर्दस ताकत होती है, कि एक ऐसे साहिती की जरूरत है जो लोगों के दिलों में राश्ट्रिय गौ
01:04जो साहित्य था, वो या तो पुरानी खयाली दास्तानों में खोया हुआ था, या फिर अंग्रेजी साहित्य की बस नकल कर रहा था। उसमें भारत की अपनी मिट्टी की खुश्बू, अपने लोगों का दर्द कहीं था ही नहीं। तो प्रेमचन ने इसी खालीपन को भरने
01:34जो एक बहुत ही बुन्यादी सवाल से शुरू होती है। और यही सवाल, यही चुनोती, कहानी का नायक है दिलफिगार, जिससे उसकी प्रेमे का मलेका दिलफरेब देती है। अब दिलफिगार की ये जो खोज है न, ये हमें भावनाव के कई पड़ावों से गुजारती ह
02:04नहीं है। और फिर आखिर में उसे जवाब मिलता है। एक सैनिक के खून की वो आखरी बूंद जो अपनी मात्र भूमी की रक्षा करते हुए गिरी हो। दिलफरेब इसे दुनिया का सबसे अनमोल रत्न मान कर स्विकार कर लेती है। और इस तरह प्रेम चंद बलिदान को �
02:34इसी गहरे और नीजी सवाल के सामने लाकर खड़ा कर देती है। कहानी यही मेरा वतन का जो नायक है, वो साट साल बाद अमेरिका से भारत लोटता है। पैसा, शोहरत, सब कुछ है उसके पास, लेकिन दिल में अपनी मात्र भूमी के लिए गहरी तडप है। लेकिन जब व
03:04अजनभी, बदला हुआ, जहां हर चीज में एक दिखावा था, वो अपनी यादों के भारत से कोसो दूर आ चुका था। ये सिफ बाहरी बदलाव नहीं थे, ये तो जैसे उसकी पूरी पहचान पर एक हमला था। उसे ऐसा महसूस होता है, जैसे वो अपनी ही जमीन पर, अ
03:34बदल सकती है, लोगों के कपड़े बदल सकते हैं, लेकिन देश की जो आत्मा है, वो तो उसकी गीतों में, उसकी आस्था में, उसकी संस्किती में बसती है, और वो हमेशा जिन्दा रहती है। तो अब तक हमने देश प्रेम को एक बलिदान के रूप में देखा, और एक ग
04:04जो सिर्फ एक भावना नहीं, बल्कि एक कर्तव्य है.
04:08ये कहानी है, एक हारे हुए राजा, शाह बामुराद और उनके बेटे मसूद की.
04:13उनका राजपाट छिन चुका है, और वो छुपे हुए जी रहे हैं.
04:16मरते वक्त, राजा अपने बेटे को अपनी मात्र भूमी वापस जीतने का कर्तव विसौप जाता है.
04:21ये एक पीडी से दूसरी पीडी तक चलने वाली शपत है.
04:24और वो बेटा मसूद, अपने पिता की उस आखरी इच्शा को ही अपनी जिन्दगी का, अपने वजूद का एक मात्र मकसद बना लेता है.
04:32उसकी हर सांस, उसका हर काम बस अपने उस खोए हुए राज्य को वापस पाने के लिए होता है.
04:37तो जब हम इन तीनों कहानियों को, इन तीनों अलग-अलग धागों को एक साथ बुनते हैं, तो देशभक्ती की एक बहुत ही मुकमल तस्वीर हमारे सामने उभर कराती है.
04:47देखे, पहली कहानी देशभक्ती को एक बलिदान की रूप में दिखाती है.
04:50एक ऐसी कीमत जिसके लिए जान भी दी जा सकती है.
04:54दूसरी कहानी उससे एक सार, एक आत्मा की रूप में दिखाती है.
04:57एक ऐसी संस्कृती जिसे हर हाल में बचा कर रखना है.
05:00और तीसरी कहानी, देशभक्ती को एक कर्तव्य की रूप में परिभाशित करती है.
05:04एक ऐसा काम जिसे पूरा करना ही है
05:07मतलब साफ है
05:08प्रेमचंद के लिए देश प्रेम कोई एक अकेली सीधी साधी भावना नहीं थी
05:12ये असल में बलिदान देने की इच्छा
05:15अपनी संस्कृती की जड़ों से गहरा जुडाव
05:17और अपने देश के प्रती अपने कर्तव्य को निभाने की जिम्मेदारी
05:21इन तीनों का एक बहुत ही शक्तिशाली संगम है
05:24प्रेमचंद ने ये कहानिया उस दौर में एक सोय हुए राश्ट्र को जगाने के लिए लिखी थी
05:29और ये हमें आज सोचने पर मजबूर करता है कि आज हमारे दौर में हमारे राश्ट्र को किन नई कहानियों की जरूरत है
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