00:00नमस्कार दोस्तों, बोलती पोथी में आपका स्वागत है।
00:04आज हम सुनेंगे कहानी उस नदी की जिसमें पत्थर रूप में पड़े मिलते हैं शापित भगवान विश्णू।
00:11जी हाँ, हम बात कर रहे हैं गंड की नदी और शालिग्राम की।
00:16शालिग्राम पूजा सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो भगवान विश्णू के विग्रह स्वरूप माने जाते हैं।
00:24गंड की नदी जो नेपाल से निकलती है शालिग्राम शिलाओं का स्रोथ है और इसकी पवित्रता को कई पुराणों और भक्ती काव्यों में वर्नित किया गया है।
00:34सनातन परंपरा में भगवान शालिग्राम की पूजा का खास महत्व है।
00:39धार में ग्रंतों के अनुसार शालिग्राम ही जगत के पालनहार श्री हरी विष्नु का विग्रह स्वरूप हैं।
01:09इन्हें घर में रखकर नियमित रूप से पूजा करने से आपको कई तरहे की परिशानियों से निजात मिलती है। साथ ही घर में सुक सम्रिध्धी आती है।
01:39गंड की नदी को बड़ी गंडक या केवल गंडक भी कहा जाता है। इस नदी को नेपाल में सालिग्रामी या साल ग्रामी और मैदानों में नारायनी और सप्त गंड की कहते हैं।
02:09गंड का जो पतित पावन नाम है वो इसी नदी के कारण मिलता है। पुराणों में वर्णन है कि गंड की असल में एक गंड का था।
02:17प्राचीन काल में गंड का वैश्या का ही एक प्रकार हुआ करता था। और ये गीत, संगीत, कला, आधी में निपण हुआ करती थी।
02:25ये एक समय में एक ही प्रेमी स्विकार करती थी और उससे अनुबंधित रहती थी। इसी गंड का के घर एक बार भगवान आय थे और उसकी परीक्षा ली थी। जिसके बाद गंड का का उध्धार हुआ।
02:39गंड का की उध्धार की कई कथाए पुराणों में अलग-अलग संदर्ब में दर्च है। लेकिन सभी का क्लाइमाक्स एक जैसा ही है। जिसमें उसे मोक्ष मिलता है और वो एक पवित्र नदी के रूप में बदल जाती है जिसमें भगवान भी निवास करते है।
02:54शिफपुरान में गंड की का जिक्र एक वैश्या के तौर पर आता है जहां वो एक गणिका यानी वैश्या थी। वो वैश्या तो थी लेकिन इसके साथ ही सरल रिदय की और ईश्वर में आस्था रखने वाली भी थी। उसकी मा भी एक वैश्या थी इसलिए उसे यही पे�
03:24अलच क्यों ना दे। ये गणिका का नियम था और इस नियम से वो कभी नहीं टलती थी। एक बार गणिका की चर्चा नारद मुनी ने तृदेवो से की। इस पर भगवान शिव उसकी परीक्षा लेने आये। वो हाथ में रत्न जड़ा हुआ शिवलिंग लेकर और सौदा
03:54नहीं कर पाऊं। इस शिवलिंग की कृपा से ही मुझे धन संपदा प्राप्त होई है और ये मुझे प्राणों से भी प्रिये है। गनिका ने कहा आप मुझसे क्या चाहते हैं। सौदागर बने शिव बोले। देवी मैंने सुना है कि तुम धर्मनिष्ठ हो और एक बार म
04:24हो जाओगी और मैं अपना शिवलिंग ले लूँगा। गनिका ने सोचा ठीक है। ये भी उपाय सही है कि इसके जरिये एक तो मुझे शिवलिंग की पूजा का मौका मिलेगा और दूसरा ये कि कम से कम छे महतों भक्ती भाव में बीतेंगे। किसी पुरुष के संपर्क मे
04:54अब शिवजी ने आखिरी और कठिन शर्त रखी। उन्होंने कहा ध्यान रहे देवी ये स्वटिक शिवलिंग है। अगर ये खंडित हुआ या इसे किसी तरह का नुकसान पहुचा तो मैं भी आत्मदाह कर लूँगा। ऐसा कहकर सौदागर शिवजी व्यापारिक यात्र
05:24लालच मिले और बड़े बड़े सेठो राजाओं ने धन के धेर लगा कर उससे अपनी पत्नी बनने को कहा। लेकिन गणिका का एक ही उत्तर होता कि वे छे महीने बाद ही किसी अन्य का प्रस्ताव स्विकार करेगी और वे पहले से अनुबंध में है। उसने सभी धनवानो
05:54वे सोचने लगी कि व्यापारी को क्या जवाब देगी। उधर सही समय पर व्यापारी बने शिवजी वापस आय और उन्हें महल में अगनी कांट का पता चला। तब उन्होंने कहा दुखी मत हो देवी, ईश्वर की जो इच्छा, लेकिन अब मुझे आत्मदाह करना ही हो�
06:24से विका हूँ और ये मेरा स्वामी है, मुझे इसके अनुसार ही कार्य करना चाहिए। ऐसा सोचकर गडिका भी द्रड निश्चे करके उस चिता में कूट पड़ी। चिता में दोनों के शरीर जलते हुए आकाश में धुआ भर उठा और कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा �
06:54शिवजी ने गणिका को अमरता का वर्दान दिया, भ्रमा जी ने उसे पवित्रता का वर्दान दे कर दंगा जल बना दिया और विश्णु जी ने कहा, देवी तुम्हारा जल ही अब मेरा निवास बनेगा। जैसे में एक शीर सागर में शयन करता हूँ, मेरा शालिग्राम
07:24गंड की नदी के तटपर स्थित स्थान को शाल ग्राम कहा जाता है। गौतमिय तंत्र के अनुसार यही से निकलने वाले पत्थरों को शालिग्राम शिला कहा जाता है। हिंदू माननेता के अनुसार शालिग्राम शिला के भीतर एक छोटे से कीट का निवास होता है, जिसे
07:54पर बने चिन्ह या आकार उसे विशेश धार्मित महत्व देते हैं। ये शालेग्राम विभिन्न रंगों में मिलते हैं। काले, गहरे काले, लाल, नीले, पीले और हरे। लाल रंग को छोड़कर सभी रंगों के शालेग्राम अत्यंत पवित्र माने जाते हैं। परंतु पील
08:24साथ ही ये तंत्र और विपरीत तंत्र साधनाओं नकारात्मक उर्जा और काले जादू के निवारण में भी उप्योग किया जाता है
08:34शालिग्राम शिलाओं के विभिन्न आकार भगवान विश्नु के विभिन्ने अफ्तारों से जुड़े हैं जैसे मत्स्य शालिग्राम, नरसिंग शालिग्राम, कूर्म शालिग्राम, सुदर्शन शालिग्राम आदी
08:48गंड की नदी इस प्रकार केवल एक जलधारा नहीं है बलकि ये भक्ती, निश्था और ईश्वर के प्लती समर्पन का प्लतीक है
08:57इसके जल में प्रवाहित हर शालिग्राम शिला इस कथा की जीवित स्वृती है जहां प्रेम, परिक्षा और ईश्वर की उपस्थिती एक साथ प्रवाहित होते हैं
09:09दोस्तों आशा है आपको भगवान शालिग्राम की ये कहानी पसंदाई होगी
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