00:00ये निचले वर्ण का है या तथा कथी निचली जाती का है बताओ कैसे इसकी जाती निचली ये बताओ शरीर तो सबका एक जैसा होता है जो अपने आपको बहुत उचे वर्ण का बोलता हो जब बहुत निचले वर्ण का बोलता हो दोनों के शरीर से सेंपल्स ले लो जिस भी �
00:30वो भेद तुमने कहां से प्रक्षे पित कराए है।
00:34कोवीड में आप ये तो नहीं देख रहे थे ना कि वो जो ऑक्सीजन है वो पहले किसने इस्तिमाल करा था।
00:41क्योंकि सबके फेफड़े एक जैसे हैं।
00:42जब खून की जरूवत होती है या प्लेटलेट्स की जरूवत होती है तो भी आप नहीं देखते हो कि किसकी जाती से आ रहा है योगी शरीर सबके एक जैसे हैं।
00:52तो फिर हम कैसे मान लेते हैं कि एक जात दूसरी जात से अलग है। सोचो, समझाओ ना, जेनिटिकली तुम खराब हो, जीन्स तो तुम्हारे वही हैं जो किसी और के भी हैं, पर तुम ना काम करना चाहते, ना महनत करना चाहते, ना जिम्मेदारी उठाना चाहते, तो तु
01:22की जड़ है मैं, the ego is the first superstition, वो है नहीं, पर कहती है कि मैं हूँ, और उसी ego का जो सबसे vicious, सबसे विशैला रूप होता है, वो होता है soul, जब तक आप soul के superstition को नहीं हटाते, कुछ भी चलेगा, कुछ भी चलेगा,
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